तस्लीम पर चित्र पहेलियाँ क्यों बंद हुई -जवाब हाज़िर है!

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लीजिये जनाब जवाब हाजिर है ... हिन्दी ब्लॉग टिप्स पर जाईये वहां इस बात का खुलासा है कि किस तरह विद्वता नहीं ,जानकारी की काबिलियत नहीं फिर भी ...

लीजिये जनाब जवाब हाजिर है ...हिन्दी ब्लॉग टिप्स पर जाईये वहां इस बात का खुलासा है कि किस तरह विद्वता नहीं ,जानकारी की काबिलियत नहीं फिर भी दन से लोग चित्र  पहेलियों का उत्तर लेकर पहुँच जाते थे....यह मानवीय प्रतिभा का पतन था और इसलिए इसे बंद करना पड़ा -जबकि मेरे कई मित्रों को यह नागवार लगा खुद जाकिर भाई को जो इस ब्लॉग के संचालक हैं ..मित्रों झूठ  की मियाद नहीं होती और सच कभी हारता नहीं .....आज ऐसी साईट मौजूद है कि आप बिना अपनी काबिलियत को मौका दिए चित्रों के जवाब, सही स्रोत, पल भर में खोज सकते हैं ...यह मनुष्य की प्रतिभा का अवमूल्यन है इसलिए एक कठोर निर्णय से यहाँ पहेलियाँ बंद करनी पडी ..बिना अपने खुद के अर्जित ज्ञान के ही कुछ लोग यहाँ तेजू खां बने रहे हैं और पहेलियों के जरिये बिना अक्ल के नक़ल जैसे एक अनैतिक काम को प्रोत्साहित करते रहे -उस्ताद जी जैसे छल क्षद्म वाले मुखौटे इसे बढाते रहे और मेरे कठोर निर्णय पर मेरे ब्लॉग पर आ कर मुझे गरियाते भी रहे ...


मित्रों मैं पुनः स्पष्ट कर दूं अपने मूल स्वरुप में या जब तक मैं यहाँ हूँ तस्लीम को किसी तात्कालिक प्रायोजित फायदों के लिए उपयोग /दुरूपयोग में लाने का अपने तई विरोध जारी रखूंगा और जब यह समझूंगा कि मैं सफल नहीं हो पा रहा तो चल दूंगा -बहता पानी रमता जोगी ....

यहाँ चित्र पहेली बंद करने के मेरे प्रत्यक्षतः अप्रिय फैसले से कुछ मित्र आज भी मुंह फुलाए बैठे हैं ..वे जाकर हिन्दी ब्लॉग टिप्स की उपरोक्त पोस्ट  को जरूर पढ़ आयें -मानवीय प्रतिभा का अवमूल्यन, माँ सरस्वती का अपमान कैसे सहा जा सकता है? मैं यहाँ पहेलियाँ फिर से शुरू करने का आग्रह रजनीश जी से  तब करूंगा जब हमारे पास    खुद के मौलिक चित्रों का अच्छा संग्रह होगा ..
आज यहाँ की तस्लीमनुमा पोस्टों की रवानी में मेरे इस  छोटे से हस्तक्षेप के लिए माफी चाहता हूँ .....


अगर आपको 'तस्लीम' का यह प्रयास पसंद आया हो, तो कृपया फॉलोअर बन कर हमारा उत्साह अवश्य बढ़ाएँ।

COMMENTS

BLOGGER: 46
  1. तो यह है राज़....
    इस तकनीक से तो चित्र खोजना बहुत ही आसान है|
    अपने खीचें हुए चित्र या अपनी विकसित की हुई प्रायोगिक पहेली का सही हल ना आने का नज़ारा आप नीचे लिंक पर देख सकते है
    जहां कोई जवाब नहीं दे सका अभी तक चार पहेलियों में ३००-४०० हिट होने के बावजूद
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    तसलीम पर पहेलियों का इंतज़ार है स्वागत है सम्मान है |
    ये देखें
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    विज्ञान पहेली -4 आ गयी(सही जवाब नहीं आया अभी तक)और विज्ञान पहेली -3 का जवाब देखे

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  2. mera bhi blog visit karen aur meri kavita dekhe.. uchit raay de...
    www.pradip13m.blogspot.com

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  3. कुछ नया करने में तस्लीम टीम सक्षम है, पहेली नही तो तत्काल कुछ और शुरू करने की गुजारिश है.

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  7. उस्‍तादों का जवाब नहीं।

    लेकिन इसी बहाने कुछ जानकारियां तो हिन्‍दी में आ ही रही थीं।

    वैसे खण्‍डेलवाल जी के ब्‍लॉग पर इसका तोड मयंक जी ने बता ही दिया है कि अपनी खींची फोटो लगाइए और इन सबसे मुक्ति पाइए।

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  8. @उस्ताद जी
    यह सर्टीफ़िकेट केवल उन जनाब के धन्यवाद स्वरूप लगाया है जिन्होंने मेरे नाम से बंटी चोर को ताऊ पहेली का जवाब बताया
    आगे भी बताते रहना
    आभारी हूँगा
    की फर्क पैन्दा आपा ते फेर वी मस्त वां

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  9. जिस फोटो को एडिट कर के कोई टेक्स्ट डाल दिया जाए वो फोटो नहीं सर्च की जा सकती है
    ताऊ और शास्त्री जी की पहेली का कोई मैच नहीं मिला जीरो रिजल्ट आता है कोई फोटो नहीं मिल सकी
    अत् पहेली वालो को घबराने की जरूरत नहीं है वो फोटो पर कोई शब्द लिख कर पहेली पूछ सकते है
    लेकिन आज पहली बार इस् साईट का पता लगा तो अच्छा लगा
    इस् तकनीक का और भी लाभ हो सकता है मैंने आज इस् का प्रयोग कर के एक चित्र खोजा है पर पहले उस चित्र को नेट पर अपलोड करना पड़ता है किसी ब्लॉग पोस्ट पर धन्यवाद

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  10. आपको पहेली को बंद करने की आवश्यकता नहीं है,

    आप गूगल से फोटो लेखर उसे किसी इमेज एडिटिंग प्रोग्राम में खोल कर कोई फ़िल्टर अप्लाई कर दीजिए बस हो गया काम|

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  11. जब कोई इंसान बिना तस्दीक किये कुछ लिखता है तो ऐसा ही लिखता है मैंने अभी स्वयं ताऊ की पहेलियों के चित्रों को इस साईट की सहायता से खोजने की कोशिश की, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला !

    पहले मैंने कुछ उन पहेलियों को देखा जिनमें मुझे प्रथम स्थान हासिल हुआ था :
    ताऊ पहेली - 99, 97, 96, 90, 87, 82, 80, 76, 73, 69, 67, 63, 61, 58, 53, 25, 24 etc..
    उपरोक्त किसी पहेली का चित्र इस वेबसाईट में नहीं मिला !
    फिर मैंने अभी हाल की ताजी पहेलियों को देखने की कोशिश की लेकिन उनका भी चित्र नहीं मिला ! आप भी देखें :
    ताऊ पहेली - 95, 98, 99, 100, 101, 102, 103, 104, 105, 107, 109, 110

    अब आप लोग ही बताएं अगर कोई प्रतियोगी इस साईट के भरोसे रहेगा तो कैसे जीत सकता है ?

    दूसरी महत्वपूर्ण बात -
    जब दिग्गज लोगों को आज तक इस साईट का पता नहीं मालूम था तो एक आम प्रतियोगी को भला कैसे इस साईट का पता चल सकता है ?
    अगर पता था तो इसका मतलब सारे प्रतियोगी सीमा जी, अल्पना जी, समीर जी वगैरह चीटिंग करके से जीतते रहे ? मैं तो संभवतः तस्लीम की एक भी पहेली नहीं जीत पाया आज तक !

    पता नहीं कुछ लोग किसी आयोजन की सार्थकता को नहीं समझ पाते बस हवा में लाठी घुमाते रहते हैं !

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  12. आप यहाँ अपने खुद के घोषित नाम से टिप्पणी कर रहे हैं इसलिए सौजन्यता /शालीनता अपेक्षित है ....जो कुछ कहना है मुझे सीधे संबोधित करके कहें ...
    यहाँ तस्दीक करने का औचित्य और आवश्यकता नहीं समझी गयी ..आपने अपने विचार व्यक्त किये ,परिशीलन कर लिया गया ..
    "जब दिग्गज लोगों को आज तक इस साईट का पता नहीं मालूम था तो एक आम प्रतियोगी को भला कैसे इस साईट का पता चल सकता है ?"
    यह कोई तर्क नहीं है -चौर्य/अनैतिक काम करने वालों की नजर बहुत सूक्ष्म होती है -सुवरण को खोजत फिरत कवि व्यभिचारी चोर ....

    "अगर पता था तो इसका मतलब सारे प्रतियोगी सीमा जी, अल्पना जी, समीर जी वगैरह चीटिंग करके से जीतते रहे ? मैं तो संभवतः तस्लीम की एक भी पहेली नहीं जीत पाया आज तक ! "

    तस्लीम की शुरू की पहेलियाँ केवल अल्पना जी और सीमा जी बूझती रहीं बादमें जाकिर ने नेट के चित्र लगाने शुरू किये फिर उन्हें बूझने वालों कीसंख्या अचानक बढी ..

    "पता नहीं कुछ लोग किसी आयोजन की सार्थकता को नहीं समझ पाते बस हवा में लाठी घुमाते रहते हैं !"
    हवा में लाठी घुमाने का वाक्यांश मेरे ऊपर व्यक्तिगत आक्षेप है और आपत्तिजनक शब्दावली है ......और यह खुद को मियाँ मिट्ठू बने रहने की प्रवृत्ति से भी प्रेरित है ...
    मुझे समझ नहीं आता आक्षेप मैंने बेनामी उस्ताद जी को किया क्षुब्ध आप हो रहे हैं :)

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  13. .यह निर्णय तो सही है.

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  14. आदरणीय अरविंद मिश्रा जी नमस्कार

    आज आप ने जिस तकनीकी का हवाला दिया ,उस पर मैंने प्रयोग किया कई निष्कर्ष निकले जो इस प्रकार रहे

    1. http://4.bp.blogspot.com/_S46EZmGC1oo/TTbfT414-xI/AAAAAAAAHqA/1wx6qgBp93E/s320/paheli110-4.JPG
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    2. http://3.bp.blogspot.com/_S46EZmGC1oo/TCtl8_KKcII/AAAAAAAAGo8/x3wHUyIsjF8/s1600/paheli82+MainPicture+%281%29.jpg
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    3. http://1.bp.blogspot.com/_S46EZmGC1oo/SynZfaSwPfI/AAAAAAAAEf8/CjvQHZFpg7s/s1600/Paheli53mainpicture.JPG
    परिणाम 0
    4. http://3.bp.blogspot.com/_BUnrGRb2PkU/TRYqF-DJLqI/AAAAAAAAAv0/tX52cE2cmn0/s320/bpm+q+25.JPG
    परिणाम 0
    5. http://1.bp.blogspot.com/_C-lNvRysyww/TMqAlVrkusI/AAAAAAAABpY/RmbZPaJXs5s/s200/Paheli.jpg
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    लिए दिए मैंने ऐसे ही २० चित्र पहेलियों से सम्बंधित image url को tin eye पर डाल कर देखा पर मुझे एक भी चित्र का उत्तर नहीं मिला , आगे खोजने पर हो सकता है कि एकाक का
    जवाब मिल जाए , पर क्या उसके आधार पर अब तक के सभी पहेली विजेताओं को झूठा ठहराया जा सकता है ? ..............मेरे ख्याल से बिलकुल नहीं, किसी भी चित्र को ढूँढना इतना आसान नहीं होता
    मुझे ये समझ में नहीं आ रहा है कि आप के द्वारा हर बार पहेली आयोजको एवं पहेली विजेताओं को आहात क्यों किया जा रहा है ? , यहाँ कोई भी पहेली कराने वाला व्यक्ति जब किसी चित्र को दिखाकर
    उससे सम्बंधित स्थान के बारे में पूछता है तो उसके कुछ उद्देश्य होते हैं १. मनोरंजन , २. ज्ञानवर्धन और ३. एक दूसरे से परिचय
    पहेली किसी विषयवस्तु को समझने का मनोरंजनपूर्ण माध्यम होता है , पर यहाँ इसी पहेली को लेकर ऐसी रंजीस हो रही है कि राम जाने. आज के समय में जालस्थल पर कई स्थान के बारे में
    सारगर्भित जानकारी है पर व्यक्ति वहाँ उस विषय कि तरफ ध्यान नहीं दे पाता लेकिन उसी स्थान या विषयवस्तु को एक पहेली के माध्यम से पूछा जाता है तो व्यक्ति का ध्यान उस तरफ जरुर
    केंद्रित होता है ............... क्या इस प्रकार से किसी इस स्थान के बारे में जानना और दूसरों को बताना गलत है ?

    इन पहेलियों नए व्यक्तियों से भी पहचान होती है ताऊ पहेली ये गवाह है कि उसके माध्यम से कितने व्यक्ति आपस में जुड़े .....
    अब बात तसलीम की करते है यहाँ पर जब पहेलियाँ पूछी जाती थी तो मनोरंजनपुराण माध्यम में हमें कुछ जानने को मिलता था , उदाहरण के लिए राकेश शर्मा को मैंने कभी नहीं देखा था
    पर इस पहेली के द्वारा मैंने उन्हें देखा. ऐसा नहीं है कि राकेश शर्मा जी की फोटो कहीं नहीं मिलेगी पर वहाँ तक पहुँचाने का एक माध्यम होना चाहिए.

    आप ने कहा कि यह मानवीय प्रतिभा का पतन है ................कैसे ? कोई भी व्यक्ति जन्मजात ज्ञानी नहीं होता , वो हर किसी से कुछ ना कुछ पूछकर ही सीखता है या किसी के पूछने पे सीखता है ,
    क्या चित्र पहेलियों से व्यक्ति कुछ सीख रहा है तो वो गलत है ........?

    मेरे ख्याल से हिन्दी ब्लोगरों को इस तकनीकी के बारें में आज ही मालुम चला होगा पर आपने इसका हवाला देकर कईयों को झूठा तमाचा मार दिया
    कुछ भी हो सर आपने पहले भी इस माध्यम का अपमान किया था और आज भी किया है.........................

    सादर

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  15. किसी और की फोटो पर अपने नाम डाल कर पहेली पूछना क्या नैतिक है.. जो फोटो आप उठा रहे है वो किसी और की बौद्धिक संपत्ति है..

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  16. बेनामी1/27/2011 6:06 pm

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  17. he bhagvaan yahan fir wahi bahas ?
    hamne bhi is 6 pictures search karne ke liye try kiya lekin sirf ek hi picture mili. uska bhi answer aadha hi tha.
    हिन्दी ब्लॉग टिप्स ne sahi tarah check nahi kiya shaayad.
    arvind mishra ji aapse ham bachchon ki khushi kyun nahi dekhi ja rahi. raham kariye

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  18. @आशीष मिश्र,
    पहले तो स्पष्ट कर दूं के इस मुद्दे पर मुझे किसी के प्रति कोई निजी मनोमालिन्य नहीं था /है ,अब बस एक को छोड़कर ! क्योंकि वहां से विरोध की शुरुआत ही गाली गलौज से हुयी थी ...कारण यह था कि उनसे समर्थित /प्रायोजित एक पहेली मंच पर चीतल को लेकर पहेलीकर्ता खुद ही कन्फ्यूज हो गए -तब महाशय ने मुझसे रात १० बजे मदद की गुहार लगाई ..मगर ऐसे ना शुकरा निकले कि बाद में गाली गलौज पर उतर आये -अब जो शख्स भारतीय वन्य जीवन के एक अति परिचित जानवर को लेकर ही कन्फ्यूज है उसके सामने ज्ञान की स्थिति कितनी दयनीय है.....उसे पहले खुद अपना ज्ञान बढ़ाना चाहिए ..फिर ज्ञान की शेखी बघारनी चाहिए ..
    अंतर्जाल से चित्र ढूंढकर पहेली का अर्थ बताने वाले और बिना उसकी मदद के खुद बताने वाले में बड़ा पहेली बूझने वाल कौन है ? मैंने बस इसी प्रतिभा ,वास्तविक प्रतिभा के क्षरण को रोकने के लिए ही अंतर्जाल के चित्रों की पहेलियों से अपनी असहमति जाहिर की ...मगर लोग इतने प्रतिक्रियात्मक हो गए कि तत्क्षण गाली गलौज पर उतर आये .....यह किसी भी दृष्टि से उचित नहीं था ....मैं पहेलियों के पूछे और बूझे जाने के विरोध में आज भी नहीं हूँ ,कोई अपने बट- बिरवे को सूखने नहीं देना चाहता ..मगर झाड झंखाड़ भी नहीं चाहेगा .....मौलिक चित्रों वाली पहेलियाँ लाईये सदैव स्वागत होगा ......हम खुद ही तस्लीम पर कुछ नया लाने की सोच रहे हैं -मगर वह बिलकुल मौलिक हो तभी ...आशा है मेरा दृष्टिकोण कुछ स्पष्ट हुआ होगा ......

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  19. अरविन्द जी आपकी यह बात में दम है कि फोटो मूल होनी चाहिए ... ताकि उसका नेट पर कोई रिकॉर्ड ना हो ... फिर नेट पर ढूंढने वाले तो ढूंढते ही रह जायेंगे और जानकार पहेली को बूझ पाएंगे... आपकी यह पोस्ट आज चर्चामंच की शोभा बड़ा रहा है...
    आज (28/1/2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।
    http://charchamanch.uchcharan.com

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  20. उफ्फ्फ....
    ये पहेलियाँ....इनपर इतनी बहस....कुछ चीजों पर बहस/चर्चा कभी ख़त्म नहीं होती...परिणाम भी कुछ नहीं आता...
    हाँ ऐसी बेतुकी चीजों से उन लोगों का उत्साह जरूर टूट जाता है जो कुछ अच्छा करना चाहते हैं....
    हालाँकि मैं थोडा नया हूँ इस ब्लॉगजगत में लेकिन बस इतना पता है यहाँ उंगलियाँ उठाने वालों की कमी नहीं है हो भी क्यूँ न भला यहाँ ऊँगली उठाने के लिए अपना नाम भी बताने की जरूरत नहीं है ... जो मन में आये किसी से कह दो...अब देखिये न यहीं पर न जाने कितने बेनामी टीप गए हैं...
    खैर मुद्दे की बात ये है कि कितने लोग इस वेबसाईट का उपयोग करके उत्तर देते होंगे....मेरे ख्याल से १ या दो...हाँ गूगल का उपयोग बहुत लोग करते हैं... चलिए इसी बहाने उस जगह या इंसान के बारे में ढूँढ़ते तो हैं... बात ये नहीं उन्होंने जवाब कैसे खोजा...बात ये है कि क्या एक बार जवाब खोजने के बाद वो उस जगह या इंसान को भूल पाएंगे....जिन्होंने पूरी शिद्दत से खोजा होगा वो तो नहीं भूलेंगे....बस हमारा उद्देश्य पूरा हुआ...उन्हें जानकारी मिली....

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  21. ऊपर के सभी बेनामी कमेन्ट प्रकाश गोविन्द के हैं और वही उस्ताद जी भी हैं
    ये उनका असली चेहरा है या वे साबित करें कि ऐसा नहीं है ....
    वैसे भी उनका असली चेहरा किसी ने नहीं देखा है आज तक खुद लखनऊ के ब्लागरों तक ने भी नहीं ....
    इसलिए असली चेहरा दिखाना जरुरी है कि किस तरह लोग मुखौटे लगाकर दो पहचान बनाए हुए हैं ....
    इन्होने मेरे ब्लॉग पर मुझे इसी मुद्दे पर अत्यंत अशोभनीय गालियाँ दी ...और अब फिर शुरू हो गए है
    इनके बारे में और भी कई अंतर्जाल के पीछे की बाते हैं समय आने पर और मजबूर होने पर आपके सामने लाना होगा
    ऐसे लोगों से सावधान होने की जरुरत है -हम ब्लॉग जगत को पारदर्शी बनाने की मुहीम पर हैं और इसकी कोई भी कीमत चुकाने को तैयार हैं
    अब साफ़ सफाई का वक्त आ गया है !
    कोई तो बताये प्रकाश गोविन्द को किसी ने भी आज तक देखा है -मेरी यह बड़ी उत्कंठा है !

    उत्तर देंहटाएं
  22. प्रकाश गोविन्द जी ,
    आप कल चैट पर आये ..व्यस्तता वश बात नहीं हुयी
    अब जो आपके कहना है सबके सामने कहिये
    ध्यान रहे अब चूंकि आप जो कहेंगे प्रकाश गोविन्द होकर कहेगें अतः
    भाषा शैली की शुचिता का ध्यान रखेगें !

    उत्तर देंहटाएं
  23. यह साइट ताजमहल के बारे में बता सकती है लेकिन जाट पहेली में पूछे गये नई दिल्ली के बारे में नहीं।
    वैसे उन दुष्ट लोगों का यह घिनौना काम ही था जिनकी वजह से आखिरकार जाट पहेलियां भी बन्द करनी पडीं।

    उत्तर देंहटाएं
  24. सबसे पहली बात तो यहाँ यह है कि... यहाँ ब्लॉग जगत में ९०% लोग नालायक हैं... मैं कहता हूँ कि अगर कोई आदमी इंटेलिजेंट है... तो सबसे पहले उसकी शक्ल बोलेगी... फिर उसके बात करने का अंदाज़ बोलेगा... और सबसे बड़ी बात कि उसका प्रोफेशन बोलेगा... (यहाँ प्रोफेशन से पत्रकारिता को निकाल दिया जाये.. क्यूंकि पत्रकारिता प्रोफेशन नहीं है.. यह नालायकों का जमावड़ा है.. जो अपने स्कूल टाइम से लेकर अब तक असफल रहे हैं.. इज़ नोन ऐज़ पत्रकारिता)... अब जैसे अगर हम देखे तो अरविन्द मिश्र जी इंटेलेक्चुयल हैं... यह इनके काम और बातों से ज़ाहिर होता है.... बस! कुछ लोगों ने इनके खिलाफ मुहीम चला रखी है..... और मिश्र जी ने अपनी इंटेलीजेंशिया ... अपने काम से प्रूव किया है... इनको किसी अटेस्टेशन की ज़रूरत नहीं है...

    अगर कोई नेट की पहेली भी सोल्व कर रहा है... तो इसका मतलब यह नहीं है कि ... वो स्टीफन हॉकिन्स हो गया... अगर कोई इंसान इंटेलिजेंट है तो वो सबसे पहले अपने प्रोफ्रेशन से ही जाना जायेगा कि वो इंटेलिजेंट है.. जैसे कि मिश्र जी... तो यहाँ पहेलियों पर बहस कर के... कोई फायदा नहीं है..... मिश्र जी का यह आलेख बिलकुल सटीक है.. अब मिश्र जी और ज़ाकिर भाई... यहाँ नालयकों की और फ़ौज नहीं इक्कट्ठा करना चाहते... तो यह उनका अपना डेसीज़न है... और इसका स्वागत करना चाहिए... देखिये.. नालायक आदमी बहुत ज़्यादा उछलता है... और इंटेलिजेंट आदमी हमेशा कन्फ्यूज़ रहता है.. कम नॉलेज वाला इंसान हमेशा ज़्यादा बहस करेगा... समझदार चुपचाप निकल लेगा...

    मेरा एक सवाल यहाँ गोविन्द जी से भी है.... कि हम लखनऊ के सारे ब्लोग्गेर्स एक-दुसरे को जानते हैं... एक दूसरे के घर भी आते जाते हैं.. आपस में झगडा भी करते हैं... और प्यार भी ... तकरीबन हम सब लखनऊ के ब्लॉगर एक दूसरे से मिल चुके हैं.. चाहे वो महिला हो या पुरुष.. हम सब एक दूसरे को बहुत ही अच्छे से जानते हैं... सबने एक दूसरे की शक्लें भी देखीं है... हम सब लखनऊ ब्लोग्गेर्स ज़ाकिर भाई.. के फंक्शन में इक्कट्ठे हुए थे... और उसके बाद भी जो फंक्शंज़ हुए हैं ... सब एक दूसरे से मिले हैं.. वक़्त नहीं रहता फिर भी सब फोन से टच में रहते हैं... तो भई.. आपको क्या दिक्कत है मिलने में.. ऐसा भी नहीं है कि बाकी लोगों का स्टेंडर्ड आपसे डाउन है.... कि मिलना न पसंद करें.. और फिर जब मेरे जैसा घमंडी इंसान सबसे मिलता जुलता रहता है... तो आपको कोई क्यूँ नहीं जानता.. ? एक भी लखनऊ का ब्लॉगर कोई बता दे... जो ज़ाकिर, सलीम, रविन्द्र जी, गिरिजेश जी, मीनू दी...अलका जी, सुशीला जी... पूनम जी... सर्वत जी, ज्योति.. मिथिलेश या फिर मुझे नहीं जानता हो... या फिर न मिला हो.... (और भी बहुत से नाम हैं)... तो भई...अगर बहस करनी है... तो आईडेनटीटी प्रूव करते हुए... बहस अच्छी लगेगी... बेहतर है कि हम खुद का आंकलन ज़्यादा करें... बेकार की बहस में पड़ कर रिश्ते न खराब करें...




    मिश्र जी ... आंकलन मतलब एनालिसिस ही होता है न?

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  25. मैंने तो आजतक पहेलियाँ नहीं बूझ पाया, सोचता रहा...सोचता रहा और सोचता ही रह गया ! मेरी भी कई बार प्रकाश गोविन्द जी से टेलीफोन पर बात हुयी है, किन्तु उनसे मुलाक़ात नहीं हो सकी आजतक ! यदि बेनामी टिपण्णी के सन्दर्भ में अरविन्द जी की बातों में सत्यता है तो इसे शर्मनाक ही कहा जा सकता है ! ब्लोगिंग के लिए इसे शुभ नहीं कहा जा सकता !

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  26. पहेलियों को लेकर यह जो कुछ हो रहा है, वह कतई नहीं होना चाहिए था! लेकिन शायद इसीलिए कहा गया है कि होनी को कौन रोक पाया है!
    मेरा अपना मानना है कि असहमतियां होना जायज है, दो व्यक्ति कत्तई एक जैसा नहीं सोच सकते, इसलिए मतभेद तो सामने आना चाहिए, मनभेद कत्तई नहीं! और मनभेद के चक्कर में गाली गलौज तो किसी भी तरह से सहन करने के योग्य नहीं है! मैं अपने स्तर से इस सबकी भर्तसना करता हूं!
    जहां तक प्रकाश गोविंद की बात है, उनसे ब्लॉगर के रूप में तो नहीं, पर लगभग 7 या 8 साल पहले हिन्दी संस्थान में मेरी मुलाकात हुई थी! मैं चूंकि थोडा भुलक्कड टाइप का व्यक्ति हूं, इसलिए मुझे ध्यान नहीं था, लेकिन आज जब प्रकाश गोविंद जी ने हिन्दी संस्थान के निदेशक के कक्ष में हुई मुलाकात और उसके बाद एमवे की मीटिंग में जाने की बात बताई, तो मुझे याद आ गया!
    प्रकाश गोविंद जी से मेरी अक्सर फोन पर बात भी होती रहती है और वे तस्लीम के अंधविश्वास उन्मूलन के कार्य को काफी सराहते भी रहे हैं! पहेली के बहाने उनका जहां पर भी नाम आया है और जो कुछ भी अप्रिय घटित हुआ है, मैं उसके लिए मैं अपने स्तर से खेद व्यक्त करता हूं!

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  27. साथ ही मैं सभी लोगों से गुजारिश करता हूं कि आपको जो भी बात कहनी हो अपने नाम के साथ साहसपूर्वक और दूसरे की मर्यादा का ध्यान रखते हुए कहें, अनामी बनकर नहीं! यदि आपकी शिष्टतापूर्वक अपनी बात रखेंगे, तो उसे न सिर्फ प्रकाशित किया जाएगा, बल्कि उसका जवाब भी दिया जाएगा! लेकिन यदि आप लोग अनामी बनकर उल्टे सीधे कमेंट करेंगे, तो उन्हें डिलीट करने के सिवा हमारे पास और कोई रास्ता नहीं होगा!

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  28. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  29. @ आदरणीय रजनीश जी नमस्कार ,

    मुझे वो दिन याद आ रहा है जब आपने अपनी एक गलती के कारण सभी से सहयोग की मांग की थी कि विजेता किसे बनाया जाए, मुझे नहीं मालुम था कि आपकी वो पोस्ट पहेली आयोजकों एवं पहेली प्रतिभागियों के लिए बहोत बुरा मोड लेकर आयेगी . आप ने तो केवल सहायता माँगी थी और आदरणीय अरविंद मिश्रा जी ने उसकी कमान अपने हाथों में लेकर उसे एक अलग ही रूप दे दिया. ऐसा रूप जो खुशनुमा माहौल में चल रही कई पहेलीयों को अपने ज्वालारुपी मुंह में ले लिया.
    आप ने खुद भी महसूस किया होगा कि चित्र पहेली के माध्यम से मनोरंजन के साथ किसी विषयवस्तु की हमें जानकारी मिलती थी,
    खैर वहाँ तो बात किसी प्रकार खत्म हुई थी. फिर ये अचानक इसी विषय पर कल एक पोस्ट को प्रकाशित कर मिश्रा जी क्या साबित करना चाहते थे? यही ना हर पहेली विजेता झूठा है ......उन्होंने ऐसी तकनीकी का हवाला दिया जो मुश्कील से ५ फीसदी भी परिणाम नहीं खोज पाया.
    श्री अरविंद मिश्रा जी का उद्देश्य तो मुझे सिर्फ एक ही लगता है कि एक व्यक्ति विशेष को सबकी नज़रों में गिराना , आपने उनके पहले वाले पोस्ट में देखा होगा कि किसी व्यक्ति विशेष का भेजा हुआ ई-मेल किस तरह सबके सामने कर दिया था, मैंने विरोध किया था तो मुझे केवल गोलमोल जवाब मिला.............

    मै आपसे ये सब इसलिए कह रहा हूँ क्योकि आप तसलीम के मोडरेटर है. इस प्रकार की पोस्ट तसलीम पर प्रकाशित करना कहाँ तक न्यायसंगत है, पोस्ट में टिप्पणीयों के माध्यम से एक व्यक्ति पर सीधा आरोप लगाना सही है..... ?
    यदि ये किसी प्रकार की निजी रंजीस है तो उसे निजी रूप से ही सुलझाया जाए. .....

    आशा है आप मेरी बात समझ रहे होंगे ...

    उत्तर देंहटाएं
  30. हाहाहाहाह मुझे तो हँसी और गुस्सा दोनों आ रहा है इस विवाद को लेकर । अगर प्रकाश गोविंद जी बेनामी से कमेंट कर रहे है तो उनका ये कृत्य अक्षम्य है । दूसरी गलती यहाँ जाकिर अली जी की है , अगर वे प्रकाश गोविंद जी से मिल चुके हैं तो उनको इसका उल्लेख पहले ही करना चाहिए था ताकि इतना विवाद ना होता , और जबकि अरविंद मिश्रा जी से जाकिर भाई की बात ब्लोगिंग के इतर भी होती रही है , अभी-अभी मेरे पास प्रकाश गोविंद जी का फोन आया था उन्होंने मुझसे कहा कि उनकी जाकिर भाई से कई मर्तबा मुलाकात हो चुकी है । उपरोक्त विवाद के जिम्मेदार जाकिर भाई भी है ।

    उत्तर देंहटाएं
  31. भईया महफूज जी मैं पत्रकार बनने के लिए पढ़ाई कर रहा हूँ ?? मैं नालायक नहीं हूँ ये तो आपको पता ही होगा , ।

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  32. अनर्गल प्रलाप और वेनामी टिप्पणियों के माध्यम से जिन लोगों के द्वारा असंसदीय भाषा का प्रयोग किया गया है चाहे वह किसी को संवोधित करते हुए किया गया हो, मैं उसकी भर्त्सना करता हूँ और समस्त असंसदीय टिप्पणियों को मिटाते हुए यह घोषणा करता हूँ की आगे ऐसी टिप्पणियों को कत्तई प्रकाशित नहीं किया जाएगा !

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  33. महफूज जी ,
    आकलन =असेसमेंट

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  34. @ ज़ाकिर अली साहब ,
    पहेलियां बूझी जायें या नहीं इससे मुझे कोई सरोकार नहीं ,यह ब्लॉग स्वामियों की अपनी पसंद और उनके अपने ब्लॉग के लिए निर्धारित नीतियों का मामला है !

    मेरा मानना ये है कि अरविन्द जी पहेलियां बूझने वालों को झूठा नहीं कह रहे हैं ! वे केवल इतना ही कह रह हैं कि स्प्रिंटर्स में से कोई एक खुद दौड़ने के बजाये मोटर साईकिल की मदद से जीत हासिल करेगा तो ये दूसरे स्प्रिंटर्स के साथ अन्याय है ! स्वस्थ प्रतियोगिता के स्केल भी एक जैसे ही होने चाहिए ! राजनीति और नौकरी में भी इसी तरह के शार्टकट का विरोध कमोबेश हम सभी करते हैं !

    गलती तसलीम परिवार की ओर से केवल इतनी सी है कि उन्हें अपनी पालिसी पहले ही साफ़ तौर पर कहनी चाहिए थी !

    टिप्पणियों को लंबे समय से बांचते हुए मेरा ख्याल भी यही है कि उस्ताद जी और प्रकाश गोविन्द जी अलग अलग इंसान नहीं होने चाहिए :)

    विशेष रूप से उल्लेख करना चाहूंगा कि उस्ताद जी ने मेरे ब्लॉग पर भी अरविन्द जी के लिए अशिष्ट कमेन्ट किये थे जिन्हें मैंने हटा दिया था और मुझे मजबूरी में अपने ब्लॉग में माडरेशन लगाना पड़ा
    :(

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  35. bhai logon is anavashyak vivaad ka koi arth nahi hai. shisht aur sansadiy shabdon k istemaal se blog jagat ki hi prashasha hogi jiska ham sab ek hissa hain. baap baap hi rahega. baap ko salaa ghoshit karne ka prayas hi nirarthak hota hai.

    sadar
    suman

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  36. आदरणीय अरविन्द जी
    बहुत अफ़सोस की बात है कि मेरा नाम उस्ताद जी से जोड़ के देखा जा रहा है ! यह गलतफहमी क्यूँ और कैसे उत्पन्न हुयी, यह समझ पाने में पूर्णतयः असमर्थ हूँ ! इस आरोप के सम्बन्ध में महज इतना ही कहना चाहूँगा कि मेरा नाम किसी भी अन्य से जोड़कर न देखा जाए ! उस्ताद जी हों या बंटी अथवा किलर झपाटा .. यह सब बहुत बड़े लोग हैं, मैं निहायत मामूली इंसान हूँ !

    विवाद जिस बात से शुरू हुआ पहेली प्रकरण से ... वहां मुद्दा था पहेली आयोजन की सार्थकता का ! उस विषय पर मेरा यही कहना था कि पहेली आयोजन के साथ बहुत सी अन्य सार्थक बातें भी जुडी रहती हैं ! उस सम्बन्ध में मैंने मेल द्वारा और पोस्ट पर प्रतिक्रिया द्वारा अपनी बात कही भी थी !

    यहाँ इस पोस्ट पर भी मैंने सिर्फ यही कहा कि जिस वेबसाईट का जिक्र किया जा रहा है उसकी सहायता से कोई प्रतियोगी उत्तर नहीं बता सकता ! मैंने उदाहरण के तौर पर 'ताऊ-पहेली' की ढेर सारी पहेलियों का जिक्र किया ! बस इतनी सी बात है ! मैंने कहीं भी यह जिक्र नहीं किया कि मैं कोई इंटेलिजेंट हूँ ... इंटेलिजेंट होता तो यहाँ ब्लागिंग की पहेलियों में क्यूँ सिर फोड़ता :)

    मेरे मन में किसी के भी प्रति कोई द्वेष नहीं है ! ओशो को मानने वाला किसी के प्रति द्वेष रख ही नहीं सकता !

    सादर

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  37. अली सा ,
    पहेलियों के बारे में मेरे स्टैंड को और भी स्पष्ट किया है आपने ,आभारी हूँ !
    अग्रेतर ,अब चूंकि प्रकाश गोविन्द जी ने यह स्वयं कह दिया है कि वे कथित उस्ताद जी नहीं हैं -एक व्यक्ति की निजी गरिमा और वाणी की कद्र करते हुए विनयावनत होते हुये मैं उनका क्षमाप्रार्थी हूँ की संवाद हीनता की ऐसी स्थिति उपजती गयी और यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति आ गयी -और इस स्थिति के निवारण के लिए मुझे न चाहते हुए भी यह अप्रिय प्रसंग यहाँ छेड़ना पड़ गया -
    मैं उनका सम्मान करता हुआ क्षमा मांगते हुए अपने आरोपण को वापस लेता है ..
    मामला फिर चौराहे पर आ खड़ा हुआ कि आखिर ये उस्ताद जी कौन हैं ?
    प्र्ककाश गोविन्द जी ,
    आपका इतना कहना ही काफी है .....आईये नयी शुरुआत करें ....अपने आचरण के प्रति मैं खेद प्रगट करता हूँ और क्षमाप्रार्थी हूँ !

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  38. इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.

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  39. इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.

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  40. मैं डॉ अरविन्द मिश्र द्वारा प्रकाश गोविन्द को लिखी टिप्पणी देख कर अभिवादन करता हूँ !

    यही बड़प्पन होता है काश हम सब यही आचरण कर सकें !

    खुद प्रकाश गोविन्द का आचरण यहाँ आशा के बिपरीत, बेहतरीन और अनुकरणीय रहा है !

    बहादुर और सम्मानित व्यक्ति हमेशा झुकते अच्छे लगते है ! डॉ अरविन्द मिश्र के प्रति मेरे मन में सम्मान आज से और बढ़ा है ....

    ऐसे उदाहरण ब्लाग जगत की गन्दगी साफ़ रखने में सहायक होंगे !

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  41. इस अनापेक्षित प्रकरण पर मैं बस इतना ही कहूंगा कि गल्तियां हर किसी से होती हैं। पर बडा वही होता है, जो उन्‍हें स्‍वीकारने का साहस दिखाता है। मुझे प्रसन्‍नता है कि अरविंद जी और प्रकाश गोविंद जी ने सामने आकर न सिर्फ खुलकर सारी बातें रखीं, वरन अपनी गल्तियों को भी स्‍वीकार किया। इसके लिए आप प्रशंसा के पात्र हैं।
    मैं आशा करता हूँ कि चूंकि हम लोग एक ही मंजिल(वैज्ञानिक सोच को बढाने) के राही हैं, इसलिए आगे से किसी भी प्रकार की कड़ुवाहट को जन्‍म नहीं लेने देंगे और पूरे मन के साथ अपने लक्ष्‍य की प्राप्ति के लिए कार्य करेंगे।

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  42. इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.

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  43. यदि ईमानदारी नहीं बरती जा रही है तो चित्र पहेली बंद करने का फैसला स्वागत योग्य है

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  44. चलिए भई... अंत भला तो सब भला... सबको बधाई...

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  45. पहेलियों के जवाब इतनी जल्दी और विस्तार से मिलने पर मुझे भी हैरत होती थी. नेट से इसमें मदद जरुर मिलती रही होगी, मगर सभी ब्लौगर्स तो इसमें इन्वोल्व नहीं रहते होंगे न !

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  46. यहाँ जो बहस चल रही है...उससे मुझे उतना कोई सरोकार नहीं है...
    लेकिन यहाँ की गई महफूज़ साहब की टिप्पणी पर कुछ कहना चाहूँगी...
    आपकी टिप्पणी अपने आप में ही अटेस्टेशन है...और आपने ही कहा है कि जो क़ाबिल होता है उसे किसी अटेस्टेशन की आवश्यकता नहीं है...फिर इसकी ज़रुरत यहाँ क्यूँ आन पड़ी...?
    जहाँ तक विद्वान के चेहरे का सवाल है तो...albert einstein बहुत करूप इन्सान था, हमारे भूतपूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम भी ऐसे खूबसूरत नहीं थे न ही चाणक्य ऐसी श्रेणी में आते हैं...किसी की विद्वता का लेखा जोखा उसकी पोस्ट भी नहीं दे सकती...हज़ारों ऐसे लोगों से मिल चुकी हूँ जिनकी पोस्ट तो बहुत ऊंची होती है लेकिन अपना काम वो बिल्कुल नहीं जानते...कारण कुछ भी हो सकता है नौकरी पाने का....जब इस देश में ४०% पाकर कोई डॉक्टर, इंजीनियर या फिर आई ए एस बन सकता है तो फिर उसकी काबिलियत की कसम कौन खायेगा भला... और जहाँ तक बोली-बचन का सवाल है...नितांत अनपढ़ इन्सान भी इस बात की काबिलियत रख सकता है....
    इस हेतू...मुझे आपके इस कमेन्ट से बिल्कुल भी इत्तेफाक नहीं है...

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वैज्ञानिक चेतना को समर्पित इस यज्ञ में आपकी आहुति (टिप्पणी) के लिए अग्रिम धन्यवाद। आशा है आपका यह स्नेहभाव सदैव बना रहेगा।

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