मंत्रों की अलौकिक शक्ति (Supernatural Power of Mantras)

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अभी 4 अगस्त की ही बात है। मैं एक राष्ट्रीय समाचार पत्र पढ़ रहा था। उसमें "गायत्री मंत्र " के बारे में लिखा गया था- ‘प्रत्येक ...

अभी 4 अगस्त की ही बात है। मैं एक राष्ट्रीय समाचार पत्र पढ़ रहा था। उसमें "गायत्री मंत्र" के बारे में लिखा गया था- ‘प्रत्येक दिन 1000 गायत्री का जप करने से आयु, आरोग्य, ऐश्वर्य और धन प्राप्त होते हैं।’ नेट पर खंगालने पर इस सम्बंध में एक आश्चर्यजकनक सामग्री मिली। डा0 अनुराग विजयवर्गीय के अनुसार तो जर्मन वैज्ञानिक इसके अलौकिक प्रभाव की खोज भी कर चुके हैं।

उक्त उद्धरण को पढ़ने के बाद मुझे इसके बारे में जानने की जिज्ञासा हुई। उसके बाद मुझे जो जानकारी हुई उसके अनुसार गायत्री मंत्र और उसका अर्थ इस प्रकार से है-
ॐ भूर्भुव स्वः । तत् सवितुर्वरेण्यं ।
भर्गो देवस्य धीमहि । धियो यो नः प्रचोदयात् ॥
(परमपिता परमेश्वर, जो धरती, आकाश और ब्रह्माण्ड के स्वामी हैं। जो दिव्यमान ज्योति हैं और नमन के योग्य हैं। उस शक्तिमान देव का मैं ध्यान करता हूँ और उनसे ज्ञान की याचना करता हूँ। )

इस प्रकार आप देख सकते हैं कि इस मंत्र केवल और केवल बुद्धि की मांग की गयी है। फिर भला यह कैसे सम्भव है कि ईश्वर से प्रार्थना तो आम के लिए की जाए और वह प्रसाद के रूप में हमें अमरूद प्रदान कर दे?

अंधविश्वास की बात की जाए तो कोइ किसी से कम नहीं है । हमारे एक मुस्लिम मित्र का मानना है कि “आयतलकुर्सी” पढ़ कर जिस व्यक्ति के ऊपर फूंक दिया जाए, उसके सभी रोग दूर हो जाते हैं। प्रतिदिन 1000 बार इसका पाठ करने से मनचाहा फल प्राप्त होता है आदि आदि...
आपकी जानकारी के लिए आयतलकुर्सी और उसका अर्थ निम्नवत हैः-

बिस्मिल्ला हिर्रहमानिर्रहीम। अल्लाहो ला-इलाहा इल्ला हुआ अल हययुल कययूम। लाताखुजूहो सेअनतूं वला नौंम। लहू माफिस्स-समावाते वमाफिल अरदे मन्‍ज़ल लज़ी यसफऊ इन्दहू इल्ला बेइज़नेही यअलमो मॉ बैंना ऐदीहिम वमा खलफहुम वला युहयी तूना बेसैइम मिन इलमेही इल्ला बेमा शाआ वसीआ कुर्सी यूहुस्स समावाते वल अरदा वला यऊ-दोहू हिफ ज़ोहुमा वहुवल अलीयुल अज़ीम।
(भावार्थ- अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक नहीं है। वही इस संसार रूपी कारखाने को कायम रखने वाला है। उसको कभी नींद नहीं आती है। उसी का है जो कुछ आसमान में है और जो कुछ जमीन में है। कौन है जो उसके अजान के बगैर उसकी जानिब में सिफारिश करे। वह जानता है जो कुछ उनके आगे और जो कुछ उनके पीछे है और लोग उसकी मालूमात में से किसी चीज पर एहतियात नहीं कर सकते मगर जितनी शै वो है, इसके कोई सी आसमानी उसको थकाती नहीं और वो आलीशान अजमत वाला है।)

मैं अपने जिस मित्र की बात कर रहा हूं, वे एम0बी0बी0एस0 डाक्टर हैं, दिन रात मोटी-मोटी किताबों का घोटा लगाने के बाद ही डाक्टर की डिग्री प्राप्त कर सके हैं। जब भी वे बीमार पड़ते हैं, तो स्वयं एलोपैथी की मोटी-मोटी टैबलेट का सेवन करते हैं और अपने मरीजों को भी उन्हीं की सलाह देते हैं। लेकिन इसके बावजूद वे इन चमत्कारिक/अलौकिक शक्तियों पर यकीन करते हैं।

अब आप ही बताएं की ऐसे लोगों को कैसे समझाया जाए की धर्म सिर्फ जीने की एक शैली है और मन्त्र आदि मनुष्य को संस्कारित और दीक्षित करने के एक साधन मात्र हैं। क्या उनसे किसी चमत्कार की आशा करना मानवीय बुद्धि की उपस्थिति पर प्रश्न चिन्ह नहीं लगाता?
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COMMENTS

BLOGGER: 67
  1. बेहतर विश्लेषण
    अन्धानुकरण और अतिशयता उचित नही है

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  2. कुछ लोग वैदिक ऋचाओं को चमत्कारी मन्त्र मानते हैं -ध्यान केन्द्रित करने के लिए ऐसे मंत्रों का उच्चारण किये जाने में कोई दोष नहीं है मगर इनसे बड़ी उम्मीद करना व्यर्थ ही है -हाँ इधर दवाओं के साथ दुआओं के असर पर भी कुछ शोध हुए हैं -आश्चर्यजनक तौर पर आस्थावान लोगों में मन्त्र -पूजा आदि का सकारात्मक प्रभाव पड़ता हुआ पाया गया है ! मगर यह मनुष्य की जीने की अदम्य लालसा -और किसी अलौकिक सत्ता में पूर्ण विश्वास से उपजे आत्मसंतोष का ही सकारात्मक पहलू है न की इन मंत्रों का प्रभाव !

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  3. अरविन्द जी से सहमत। मनुष्य की जिजीविषा ही सर्वोत्तम ऋचा है।
    जाने क्या क्या समाया है इस दो ग़ज की शरीर में ?

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  4. Apse 100% sahmat hoon ji.

    स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनायें. "शब्द सृजन की ओर" पर इस बार-"समग्र रूप में देखें स्वाधीनता को"

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  5. स्वतंत्रता दिवस की घणी रामराम.

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  6. यहाँ पर मेरे विचार आपसे मेल नहीं खा रहे |विस्वासम फल दायकं -यह सिद्ध है की शारीरिक रोगों में ८५ प्रतिशत रोग मानसिकता के कारण होते है और मन्त्र सीधे मस्तिष्क को प्रभावित करते है |महात्मा धुल की पुडिया दे देते है और मरीज़ अच्छा हो जाता है बडे बडे डाक्टर फेल हो जाते हैं |दूसरे इन मंत्रों या आयतों के पठन पठान में बुरी ही क्या है यदि मरीज़ गोली भी खा रहा है और मन्त्र भी जप कर रहा है तो किसका कहा नुकसान हो रहा है यह बात जुदागाना है की गंभीर बीमारी में भी लोग चबूतरों के चक्कर में बीमारी बड़ा लेते हैं \मानसिक चिकित्सक से मिलिए वह कहेगा टेंशन ,डेपरेशन तनाव आंतों पर बुरा असर डालते है |हम अच्छे बैठे है हंस रहे हैं अचानक कोई घटना बुरी से बुरी अपनों के प्रति सुनने में आती है तुंरत हाज़त हो ने लगती है किसी किसी के तो कपडे ख़राब हो जाते है मतलब मस्तिष्क की वजय से आंतों ने काम करना बंद कर दिया है =खैर विवाद का विषय है मैंने तो आपके ब्लॉग में से आयतलकुर्सी जो कुरआन मजीद से हो या हदीस से या बयाँ से हो सेव करली है ,नहा धोकर उसका पाठ किया करूंगा |इंशाल्लाह मुझे यकीन है जब भी होगा फायदा ही होगा नुकसान तो सवाल ही नहीं|मेरे पास हिन्दी में अनुवादित कुरान मजीद है मगर वह इतना वेस्सिल्सिले वार है की समझना भी मुश्किल है फिर भी पवित्र अवस्था में उसको पढता रहता हूँ खैर मन्त्र किसी भी मजहव उनको नकारिये मत जब तक स्वाम प्रयोग करके अनुभव न कर लें

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  7. मन्त्र आदि मनुष्य को संस्कारित और दीक्षित करने के एक साधन मात्र हैं।
    ------------
    सभी चमत्कार मानसिक ऊर्जा को चैनलाइज करने और एकाग्रता बढ़ाने से ही होते हैं।

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  8. आपकी कही बातों पर सहज ही यकीन करने को मन करता है।
    थोड़ी रौशनी इस तरह की चीज़ों पर भी डालियेगा
    जो मैने अक्सर किताबों में या टी वी पर देखी हैं जिनका सच होने का दावा किया जाता है

    1) सूक्ष्म शरीर जैसी कोई चीज़ होती है? क्या इंसान अपने शरीर से बाहर निकल कर अनुभव कर सक्ता है?
    2) कहते हैं इंसानी दिमाग में बहुत ताकत होती है, जो सात इंद्रियों की बात की जाती है, उन के बारे में भी बताइयेगा, कि असल में वो वैज्ञानिक दृष्टिकोण में हैं क्या?
    3) Einstein ने अपने दिमाग का 7-10% इस्तेमाल किया था, जब कि आम आदमी 3% से ज़्यादा इस्तेमाल नहीं कर सकता। ऐसा क्यो? और दिमाग का इस्तेमाल कैसे बढ़ाया जा सकता है?
    4) Hypnotism के बारे में बताइयेगा, कि वो क्या होता है, और mass hypnotism क्या चीज़ होती है
    5) जादू के शो में अक्सर देखा जाता है कि जादूगर लड़की को हवा में लटका देता है। ये कैसे सम्भव है? ये आंखों का धोखा है, तो इसका राज़ क्या है और सच क्या है?

    आपके जवाबों का और पोस्टस का इंतज़ार रहेगा

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  9. विश्वास की शक्ति के दम पर तो होमियोपैथी जैसी अवैज्ञानिक चिकित्सा पद्धति फलफूल रही है. यदा-कदा मन्त्र भी मानसिक स्तर पर ऊर्जा देकर शरीर को रोगमुक्त कर देते हैं.

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  10. Mujhe aapaka gayatri mantra ka artha adhura laga. Kripya aap iska artha punh khoje, yahan amarud hi manga gaya hain aam nahi.
    Meaning of Gaytri mantra is very long but in short it means "we embody supreme god in our soul and may he direct us in the righteous path."
    If you are walking on righteous path and have god in your soul you are going to obtain what ever you wish for, but ultimately you need to meditate on the meaning of mantra and not merely on sound of it.
    People walking on righteous path will not demand money without hard work, will not worship without completing duties will not procrastinate. People who have god in there soul will not differentiate between family member and a roadside rag picker. They will treat sorrow and happiness with equanimity. Needless to say it is very difficult for a common man.
    nilam

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  11. आस्था हमेशा विज्ञान की कसौटी पर खरी उतरे यह ज़रूरी नही.विज्ञान अभी आस्था से बहुत पीछे है.

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  12. भाई जाकिर जी, इस विषय में आपके सामने कुछ प्रश्न रखना चाहता हूँ,जिसके कि आप से ईमानदाराना उत्तर की अपेक्षा रखता हूँ। अब यदि आप स्वयं मेरे उन सवालों के जवाब दे सकें तो कहिए सवाल रखूँ, किन्तु जवाब आपको स्वयं देने होंगे, ये नहीं की लेख तो आप लिखें ओर पाठकों के सवालों के उत्तर देने के लिए अरविन्द मिश्रा जी को सामने कर दें।
    (वैसे उनसे भी कोन से सही जवाब मिलने की आशा है,ले देकर कुछ कुतर्क पेश किए जाएंगे ओर यदि जवाब न सूझें तो मौन साधन तो फिर है ही:)

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  13. मीनू जी,
    आस्था हमेशा विज्ञान की कसौटी पर खरी उतरे, ऐसा ज़रूरी क्यों नहीं?

    अगर किसी चीज़ को वैज्ञानिक प्रमाणक्ता चाहिये, तो उसको वैज्ञानिक कसौटी पर खरा तो उतरना ही पड़ेगा

    पंडित डी के शर्मा जी,
    आपके प्रश्न का उत्तर महत्वपूर्ण है, या उसका उत्तर कौन दे रहा है, ये महत्वपूर्ण है? आप प्रशन रखिये,मुझे जानने की उत्सुकता है, के आप क्या पूछने जा रहे हैं?

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  14. वैसे मेरे मन में भी बहुत से सवाल हैं, पर एक बात से डरता हूँ, के कहीं यहां पर वो सवाल रख कर मैं अंधविश्वास को बढ़ावा तो नहीं दूँगा

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  15. जाकिर भाई, आप ने सही कहा। कोई भी मंत्र दवा का काम नहीं करता। दवा का काम करता है, व्यक्ति का आत्मविश्वास। वह कैसे जाग्रत हो बात इतनी सी है।

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  16. तस्लीम भाई, आपने वो मुद्दा उठा लिया जिस पर मैं न जाने कितनों की दुश्मनी मोल ले चुका हूँ. अगर मन्त्र, आयतें, जादू-टोने वगैरह इतने ही कारगर हैं तो अस्पताल, दवाखाने, डॉक्टर आदि की क्या जरूरत है? लेकिन मामला सिर्फ एक जगह आ कर रुक जाता है--आस्था. मूर्तियों को दूध पिलाने का मामला गुज़रे बहुत ज्यादा दिन नहीं गुज़रे. पपीते, कटहल में गणेश जी की छवि दिखना, किसी बकरे पर अल्लाह जैसी चित्ती नजर आने पर उसकी कीमत सौ गुनी हो जाना, सिर्फ आस्था की ही देन हैं. मन्त्रों-आयतों पर इतना ही भरोसा है तो उन्हीं से काम चला लेना चाहिए. फिर "कर्मण्ये वाधिकारस्तु....." और "अमल से जिंदगी बनती है जन्नत भी जहन्नुम भी" को क्या ठंडे बस्ते में डाल दिया जाए. आप की इस हिम्मत को मैं सलाम करता हूँ.

    उत्तर देंहटाएं
  17. ॐ भूर्भुव स्वः । तत् सवितुर्वरेण्यं ।
    भर्गो देवस्य धीमहि । धियो यो नः प्रचोदयात् ॥


    जाकिर भाई आपका प्रश्न थोडा गड़बड़ है ! समझने में जल्बाजी कर दी !अगर इस मन्त्र को पढ़ने से ज्ञान मिल जाए तो बात ही क्या ?
    रहा सवाल बाकी दूसरी चीजें - आयु, आरोग्य, ऐश्वर्य और धन की -- तो यह सब
    ज्ञान से जुडी हुयी चीजें ही हैं !

    इंसान के पास सही ज्ञान होगा तो वह कर्म करेगा .. दिग्भ्रमित नहीं होगा ... मेहनत करेगा ! मेहनत करेगा तो शरीर भी स्वस्थ रहेगा और सफलता भी मिलेगी ! सफलता मिलेगी तो धन भी आएगा ! धन आएगा तो ऐश्वर्य भी भोगेगा ! इसमें गलत क्या है ? बशर्ते मन्त्र फलीभूत हो बस !

    प्रिय वत्स जी आपको सिर्फ अपने प्रश्नों के उत्तर से दिलचस्पी होनी चाहिए ...... वो उत्तर कहाँ से आ रहा है ..... इस बात से क्या फर्क पड़ता है ?

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  18. समाधान इन्हीं प्रश्नों से निकलेंगे ये तय है. कोरी आस्था सिर्फ़ रूढियों का निर्माण करती है. बनी-बनायी रूढियों पर चलते तो न हज़रत मुहम्मद होते, न बुद्ध होते, न ईसा होते न महावीर. आपने बिल्कुल सही कहा धर्म स्वयं को संस्कारित करने के लिये है. चमत्कारों के लिये नहीं.

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  19. ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey ने कहा…

    मन्त्र आदि मनुष्य को संस्कारित और दीक्षित करने के एक साधन मात्र हैं।....is baat se main sahamat hoon....isase jyada is baabat main kuch jaantaa bhi nahin.. !!

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  20. बेनामी8/16/2009 2:23 pm

    महामंत्री-तस्लीम जी,
    किसी भी मन्त्र या आयत का शाब्दिक-अर्थ मेरे विचार से नहीं होता, हाँ उनका भावार्थ शायद जान सकें। लेकिन यह भी व्यक्तिशः भिन्न हो सकता है। इसका अर्थ यह नहीं की वह मन्त्र किसी काम का नहीं हैं।
    यहाँ मेरा अनुरोध विश्वास या अन्धविश्वास का नहीं हैं। यह व्यक्ति के स्वयं के ऊपर निर्भर करता है। सभी धर्म के धार्मिक ग्रन्थों के अनुसार ईश्वर एक है, केवल उसके भिन्न-भिन्न रुप हैं। आस्तिक व्यक्ति केवल उसके विभिन्न रुपों को अंगीकार करता है। इसका यह अर्थ नहीं की अन्य रुप अप्रयोजनीय हैं। जल ही जीवन है, तो जल में इन्सान डूबकर भी मरता है। आप जल का कौनसा चेहरा देखेंगे-रचनात्मक या संहारात्मक।
    इतना लम्बा-चौड़ा लिखने का मेरा तात्त्पर्य यह है की आपने (उद्धरण को पढ़ने के बाद मुझे इसके बारे में जानने की जिज्ञासा हुई। उसके बाद मुझे जो जानकारी हुई उसके अनुसार गायत्री मंत्र और उसका अर्थ इस प्रकार से है-
    ॐ भूर्भुव स्वः । तत् सवितुर्वरेण्यं ।
    भर्गो देवस्य धीमहि । धियो यो नः प्रचोदयात् ॥
    (परमपिता परमेश्वर, जो धरती, आकाश और ब्रह्माण्ड के स्वामी हैं। जो दिव्यमान ज्योति हैं और नमन के योग्य हैं। उस शक्तिमान देव का मैं ध्यान करता हूँ और उनसे ज्ञान की याचना करता हूँ। )) अपनी जानकारी के एकमात्र स्त्रोत को यहाँ प्रकट किया। मेरे विचार से केवल उक्त एक स्त्रोत को पढ़कर ही गायत्री-मन्त्र का जप या इसके प्रति आस्था अन्य आस्थावान व्यक्ति नहीं करते होंगे। कृपया एक भावार्थ यह भी देखें। क्षमा चाहूँगा की मैं भी केवल एक ही स्त्रोत बता रहा हूँ, लेकिन ये उक्त से काफी अधिक उपयुक्त है। १००० मन्त्र का जप करने पर आपने समाचार पत्र के हवाले से दिये गये समाचार पर भी आपत्ति उठाई है। क्या आपने यह करके देखा है, यदि नहीं तो आप इसको अन्ध-विश्वास का तमगा क्यों देना चाहते हैं? अन्ध-विश्वासी आप हुए या उक्त समाचार देने वाला? किसी तथ्य की वैज्ञानिकता उसको परखे बगैर कैसे प्रमाणित होगी?
    वैसे शास्त्रों के अनुसार इस गायत्री मन्त्र का पुरश्चरण ही २४ लाख जप का है, तथा जातक (व्यक्ति) के पुर्व-जन्म व इस जन्म में किये गये कार्यों (पाप-पुण्य) के अनुसार पुरश्चरण एक से अधिक भी करने पड़ सकते हैं। प्रयोग में लेने की स्थिति तो उसके बाद की है। परिणाम तो उसके बाद आयेगा। प्रमाणिकता तो उसके बाद ही सिद्ध की जा सकेगी। मेरे कहने का तात्त्पर्य है की आपने अन्धविश्वास के खिलाफ आवाज बुलन्द करके सराहनीय कार्य किया है, लेकिन यदि उसी आवाज के साथ आप निष्पक्ष खोज, विश्लेषण, परिणाम बतलाते तो आपका आवाज उठाना सार्थक होता।

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  21. Aastha aur Vigyan ka yeh sangharsh kisi nirnanyak mor par kabhii pahunchega kaha nahin ja sakta.

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  22. aspundir ji,

    आप जो इस बात के सच होने का खोखला दावा कर रहे हैं कि इन्होंने इस मंत्र को 1000 बार पढ़ कर कोशिश नहीं कि, के ये मंत्र वाकई में काम करता है या नहीं
    आपकी जानकारी में बता दूँ, विज्ञान में ऐसी बहुत सी चीज़ें हैं जो कर के नहीं देखी जाती पर उनको वैज्ञानिक मान्यता मिलती है।
    अब कल को कोई समाचार पत्र लिख देगा के कोई फ्लां फलां मंत्र को 1 लाख बार पढ़ने से कुछ भी चमत्कारिक रूप से घटित हो जायेगा, तो क्या हम मूर्खों की तरह इसको 1 लाख बार पढने बैठ जायेंगें

    जब कि हमें पता है, ऐसा कुछ नहीं होने वाला

    आप माने या ना माने, लेकिन इस दुनिया में कभी चमत्कार नहीं होते। हर चीज़ और event के पीछे एक कारण होता है, भले उसे विज्ञान साबित कर पाये या नहीं

    अगर गायत्री मंत्र के पीछे भी ऐसा कोई वैज्ञानिक रहस्य छुपा है तो कृप्या उसे उजागर कीजिये।

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  23. कृपया इस गायत्री मन्त्र से जोड़ कर न देखें. प्रत्येक धर्म और धार्मिक व्यवस्था में ऐसी बातें मिलती हैं.
    सालों पहले मैंने श्रीमाली की पुस्तक में दिए गए ऐसे ढेरों मंत्रों के बारे में पढ़ा था जिक्सो सिद्ध करके व्यक्ति अजर-अमर हो जाता है. वे सभी मन्त्र हजारों साल पुराने बताये गए थे.
    क्या किसी ने कोई अजर-अमर व्यक्ति कभी देखा है?

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  24. मैं पहले टिप्पणी कर चुका हूँ -यह पुनः टिप्पणी तत्पश्चात उत्पन्न विचार मंथन को सादर -
    पहले योगेश के सटीक प्रश्नों का जवाब -
    1) सूक्ष्म शरीर जैसी कोई चीज़ होती है? क्या इंसान अपने शरीर से बाहर निकल कर अनुभव कर सक्ता है?
    उत्तर : नियर डेथ एक्सपेरिएंस (NDE) से गूगल में सर्च कर शरीर के बाहर के अनुभव और वैज्ञानिक व्याख्याओं को आत्मसात करें ! मेरे विचार से यह इंसानी मष्तिष्क की चुहलबाजी ,लीला ,परिहास मात्र है -चार्वाक कहते भये हैं -भास्माविभूतास्य शरीरस्य पुनारागमनं कुतः ?
    2) कहते हैं इंसानी दिमाग में बहुत ताकत होती है, जो सात इंद्रियों की बात की जाती है, उन के बारे में भी बताइयेगा, कि असल में वो वैज्ञानिक दृष्टिकोण में हैं क्या?
    उत्तर : मनुष्य में कुछ अतीन्द्रिय क्षमताये होती तो हैं जैसे घटनाओं का पूर्वाभास आदि जिसे वैज्ञानिक एक्स्ट्रा सेंसोरी परसेप्शन (ESP) कहते हैं -इसे भी गूगल में सर्च कर विशद जानकारी ले लें .वैसे दस इन्द्रियों की बात हमारे यहाँ हुयी है !
    3) Einstein ने अपने दिमाग का 7-10% इस्तेमाल किया था, जब कि आम आदमी 3% से ज़्यादा इस्तेमाल नहीं कर सकता। ऐसा क्यो? और दिमाग का इस्तेमाल कैसे बढ़ाया जा सकता है?
    सच है पर कैसे बढाया जा सकता है -पता होता तो मैं भी बढा लेता -अभी इसका राज ढूंढते रहिये -मिलेगा ही !
    4) Hypnotism के बारे में बताइयेगा, कि वो क्या होता है, और mass hypnotism क्या चीज़ होती है
    हाँ ,सम्मोहन के कुछ स्वरूपों को वैज्ञानिक जगत ने मान्यता दी है -यह भी मनुष्य के मस्तिष्क की ही उपज है और मनुष्य के मानसिक कमजोरियों की भी -सम्मोहक मनुष्य की मानसिक कमजोरियों को ही EXPLOIT करता है !
    5) जादू के शो में अक्सर देखा जाता है कि जादूगर लड़की को हवा में लटका देता है। ये कैसे सम्भव है? ये आंखों का धोखा है, तो इसका राज़ क्या है और सच क्या है?
    यह मनुष्य के मस्तिष्क को झांसा देना ही है -इसे भी -गूगल पर "मैजिक एंड ह्यूमन ब्रेन -SCIENTIFIC aMERICAN " सर्च कर विस्तार से पढ़ सकते हैं
    और अब पंडित वत्स जी अपने प्रश्न करें -उत्तर कौन दे यह महत्वपूर्ण नहीं है !
    गायत्री मन्त्र तीन -चार हजार सालों से हमारे साथ है -ऋग्वेद में सविता (सूर्य जैसे आराध्य ) को समर्पित है -आराधक का यह आहवान है की सविता (savitr) उसकी बुद्धि को उत्प्रेरित करे की वह यानी आराधक सविता की महिमा को पूर्णतः आत्मसात कर सके ! यह बुद्धि को बढाने का मन्त्र है -विद्यार्थी गण इसे पूरी एकाग्रता से पढ़ते जायं तो कम से कम उन्हें मस्तिष्क को एकाग्र करने की युक्ति समझ आ जायेगी ! मैं इस "मन्त्र" की सिफारिश केवल इस संदर्भ में करता हूँ ! पोंगा पंथी लोग और पता नहीं क्या क्या फायदे इसके बताते हैं !
    अभी इतना ही -डॉ अमर कुमार जी ने अपने ब्लॉग पर इसे उठाया है !

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  25. आज़ादी की 62वीं सालगिरह की हार्दिक शुभकामनाएं। इस सुअवसर पर मेरे ब्लोग की प्रथम वर्षगांठ है। आप लोगों के प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष मिले सहयोग एवं प्रोत्साहन के लिए मैं आपकी आभारी हूं। प्रथम वर्षगांठ पर मेरे ब्लोग पर पधार मुझे कृतार्थ करें। शुभ कामनाओं के साथ-
    रचना गौड़ ‘भारती’

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  26. yahan aakar bahut gyaan praapt hua.

    aapne atyant mahatvpurn charcha kee hai.
    badhayi.

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  27. ॐ भूर्भुव स्वः । तत् सवितुर्वरेण्यं ।
    भर्गो देवस्य धीमहि । धियो यो नः प्रचोदयात् ॥
    वैज्ञानिको द्वारा इस मन्त्र को विश्व का सर्वाधिक शक्तिशाली मन्त्र माना गया है . यह मन्त्र उर्जा प्रदान करता है . बढ़िया पोस्ट आभार.

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  28. महेन्द्र मिश्र जी कृपया आप अपनी धारणा को विज्ञानिकों पर न थोपिए !

    क्या आप उन विज्ञानिकों के नाम बताएँगे जिन्होंने इस मन्त्र को विश्व का सर्वाधिक शक्तिशाली मन्त्र माना है

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  29. मित्र प्रकाश गोविन्द जी
    मै इस बारे में अपनी धारणा थोप नहीं रहा हूँ . मै अखंड ज्योति पत्रिका युग निर्माण पढ़ता हूँ जिसमे प्राय इस बात का जिक्र किया जाता है और मैंने अपनी जानकारी के अनुसार अपने विचार व्यक्त किये है. भविष्य में इस मन्त्र के बारे में जल्दी ही जानकारी एकत्रित कर एक पोस्ट लिखूंगा . विचार व्यक्त करने को विचार थोपना न माने .

    उत्तर देंहटाएं
  30. mere hisab se aapne ye behtarin jankari di hai, andhvishwas aur uske nam par tamasha har jagah ho raha hai, jise hum kabhi thik karna nahi chahte, kewl tamasha khada karna chahte hai use religion se jorkar

    उत्तर देंहटाएं
  31. कुछ लोग वैदिक ऋचाओं को चमत्कारी मन्त्र मानते हैं -ध्यान केन्द्रित करने के लिए ऐसे मंत्रों का उच्चारण किये जाने में कोई दोष नहीं है मगर इनसे बड़ी उम्मीद करना व्यर्थ ही है -हाँ इधर दवाओं के साथ दुआओं के असर पर भी कुछ शोध हुए हैं -आश्चर्यजनक तौर पर आस्थावान लोगों में मन्त्र -पूजा आदि का सकारात्मक प्रभाव पड़ता हुआ पाया गया है ! मगर यह मनुष्य की जीने की अदम्य लालसा -और किसी अलौकिक सत्ता में पूर्ण विश्वास से उपजे आत्मसंतोष का ही सकारात्मक पहलू है न की इन मंत्रों का प्रभाव ! mai Arvind Mishra ji ki baat se sahmat hu...

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  32. Doston, is post ke publish hone ke baad mera lagaataar net se judaav nahee ho paa rahaa tha, iske liye chhamaa praarthee hoon.

    Arvind jee, Yogesh jee aur Govind jee aapne meree anupasthiti ki kamee mahsoos nahee hone dee, iske liye haardik aabhaar.

    Vats ji, aapke sawalaaon kee prateechha rahegee.

    उत्तर देंहटाएं
  33. विश्लेषण और परिचर्चा अच्छी रही....

    उत्तर देंहटाएं
  34. बेनामी9/23/2010 9:41 am

    bhai sahib,namaskar - mantra koi bhi ho shaktishali hota hai,gayatri mantra,mahamritunjaye mantra aadi to prchlit han,par in mantron ko sidhdh kar usme urja bharne se hi karya karte han,kripya pura vidhi vidhan bataya karen. rupendra singh-rajnandgaon(c.g) 09827958380

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  35. बेनामी12/04/2011 9:46 pm

    इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.

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  36. बेनामी1/26/2012 8:53 am

    I have the same type of blog myself so I will come back back to read again.

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  37. बेनामी1/26/2012 11:09 am

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  39. बेनामी1/26/2012 2:56 pm

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  40. बेनामी1/28/2012 6:44 am

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  41. बेनामी1/28/2012 6:44 am

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  53. बेनामी1/30/2012 8:04 pm

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  54. बेनामी1/31/2012 4:30 pm

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  57. बेनामी2/01/2012 12:06 am

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  58. बेनामी2/01/2012 12:06 am

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  59. बेनामी4/15/2012 9:06 am

    devoir si je ne rappelais le nom de quelquesuns d:)

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  60. बेनामी4/16/2012 3:21 am

    nom de legentes de mane)

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  61. GAYATRI MANTRA MEANING


    OM = Sabki raksha karne wala.

    BHU = Jo sab jagat ke jiwan ka aadhar, pran se bhi priya aur swayam bhu hai

    BHUV: = Jo sab dukhon se rahit, jiske sang se jeev sab dukhon se mukt ho jate hain

    SWA: = Jo nana (vibhinn) vidh jagat mein vyapak hoke sabka dharan karta hai.

    TAT, = Usi parmatma ke roop ko hum log.

    SAVITU: = Jo sab jagat ka utpadak aur sab eshvarya ka data hai.

    VARENYAM, = Jo sweekar karne yogya ati shresth hai.

    BHARG: = Shudh swaroop aur pavitra karne wala chetan brahm swaroop hai.

    DEVASYA: = Jo sab dukhon nivaran hara hai jiski prapti ke kamna sab karte hain.

    DHIMAHI: = Dharan karen, kis prayojan ke liye ki

    DHIYA: = Budhiyon ko.

    YAH: = Jo savita dev parmatam

    NAH: = Hamari

    PRACHODAYAT = Prerna karen artharth bure kamon se mukt hokar achhe kamon mein pravat hon/ karen.
    yahan hum ishwar se prathana kar rahe hain ki ishwar hum ko sat marag per lagaye na ki gaytri manatar k jaap se dhan aata ........aisa kisi ved me nahi likha hain na kisi sastar me adhura gyan khatarnak hota hain ....hum gaytari k dawara ishwar ki upasana karte hain ....acche karam karne ki shakti ishwar se mangte gain ....karamshil bane rahne k liye ishwar ka aashirwad mangte hain .......ishme andhwishwas jaisi koi chiz nahi hain ..na ish manat se koi jhada fuki hoti hain ....

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  62. बेनामी4/27/2016 11:59 am

    गायत्री मंत्र का भावार्थ : उस सर्वरक्षक प्राणों से प्यारे, दु:खनाशक, सुखस्वरूप श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देवस्वरूप परमात्मा को हम अंतरात्मा में धारण करें... तथा वह परमात्मा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करें...

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  63. बेनामी11/30/2016 4:50 pm

    Aaj ke yug me humare sath chaahe jo bhi ho rah hai(mantra se ya karm se) o sab sirf ek hi sidhant pr kary karte hai Sirf ek sidhant "Aakarshan ka sidhant". (Law of attraction )
    Humare jivan Ki sari ghatnaye Isi ke aage pichhe ghumti hai....

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  64. गायत्री मंत्र के प्रत्येक शब्द की व्याख्या (Gayatri Mantra Meaning by words in Hindi)
    ॐ = प्रणव
    भूर = मनुष्य को प्राण प्रदाण करने वाला
    भुवः = दुख़ों का नाश करने वाला
    स्वः = सुख़ प्रदाण करने वाला
    तत = वह
    सवितुर = सूर्य की भांति उज्जवल
    वरेण- ्यं = सबसे उत्तम
    भर्गो- = कर्मों का उद्धार करने वाला
    देवस्य- = प्रभु
    धीमहि- = आत्म चिंतन के योग्य (ध्यान)
    धियो = बुद्धि
    यो = जो
    नः = हमारी
    प्रचो- दयात् = हमें शक्ति दें (प्रार्थना)

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वैज्ञानिक चेतना को समर्पित इस यज्ञ में आपकी आहुति (टिप्पणी) के लिए अग्रिम धन्यवाद। आशा है आपका यह स्नेहभाव सदैव बना रहेगा।

नाम

अंतरिक्ष युद्ध,1,अंतर्राष्‍ट्रीय ब्‍लॉगर सम्‍मेलन,1,अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी ब्लॉगर सम्मेलन-2012,1,अतिथि लेखक,2,अन्‍तर्राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन,1,आजीवन सदस्यता विजेता,1,आटिज्‍म,1,आदिम जनजाति,1,इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी,1,इग्‍नू,1,इच्छा मृत्यु,1,इलेक्ट्रानिकी आपके लिए,1,इलैक्ट्रिक करेंट,1,ईको फ्रैंडली पटाखे,1,एंटी वेनम,2,एक्सोलोटल लार्वा,1,एड्स अनुदान,1,एड्स का खेल,1,एन सी एस टी सी,1,कवक,1,किंग जार्ज मेडिकल कॉलेज,1,कृत्रिम मांस,1,कृत्रिम वर्षा,1,कैलाश वाजपेयी,1,कोबरा,1,कौमार्य की चाहत,1,क्‍लाउड सीडिंग,1,क्षेत्रीय भाषाओं में विज्ञान कथा लेखन,9,खगोल विज्ञान,2,खाद्य पदार्थों की तासीर,1,खाप पंचायत,1,गुफा मानव,1,ग्रीन हाउस गैस,1,चित्र पहेली,201,चीतल,1,चोलानाईकल,1,जन भागीदारी,4,जनसंख्‍या और खाद्यान्‍न समस्‍या,1,जहाँ डॉक्टर न हो,1,जादुई गणित,1,जितेन्‍द्र चौधरी जीतू,1,जी0 एम0 फ़सलें,1,जीवन की खोज,1,जेनेटिक फसलों के दुष्‍प्रभाव,1,जॉय एडम्सन,1,ज्योतिर्विज्ञान,1,ज्योतिष,1,ज्योतिष और विज्ञान,1,ठण्‍ड का आनंद,1,डॉ0 मनोज पटैरिया,1,तस्‍लीम विज्ञान गौरव सम्‍मान,1,द लिविंग फ्लेम,1,दकियानूसी सोच,1,दि इंटरप्रिटेशन ऑफ ड्रीम्स,1,दिल और दिमाग,1,दिव्य शक्ति,1,दुआ-तावीज,2,दैनिक जागरण,1,धुम्रपान निषेध,1,नई पहल,1,नारायण बारेठ,1,नारीवाद,3,निस्‍केयर,1,पटाखों से जलने पर क्‍या करें,1,पर्यावरण और हम,8,पीपुल्‍स समाचार,1,पुनर्जन्म,1,पृथ्‍वी दिवस,1,प्‍यार और मस्तिष्‍क,1,प्रकृति और हम,12,प्रदूषण,1,प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड,1,प्‍लांट हेल्‍थ क्‍लीनिक,1,प्लाज्मा,1,प्लेटलेटस,1,बचपन,1,बलात्‍कार और समाज,1,बाल साहित्‍य में नवलेखन,2,बाल सुरक्षा,1,बी0 प्रेमानन्‍द,5,बीबीसी,1,बैक्‍टीरिया,1,बॉडी स्कैनर,1,ब्रह्माण्‍ड में जीवन,1,ब्लॉग चर्चा,4,ब्‍लॉग्‍स इन मीडिया,1,भारत के महान वैज्ञानिक हरगोविंद खुराना,1,भारत डोगरा,1,भारत सरकार छात्रवृत्ति योजना,1,मंत्रों की अलौकिक शक्ति,1,मनु स्मृति,1,मनोज कुमार पाण्‍डेय,1,मलेरिया की औषधि,1,महाभारत,1,महामहिम राज्‍यपाल जी श्री राम नरेश यादव,1,महाविस्फोट,1,मानवजनित प्रदूषण,1,मिलावटी खून,1,मेरा पन्‍ना,1,युग दधीचि,1,यौन उत्पीड़न,1,यौन शिक्षा,1,यौन शोषण,1,रंगों की फुहार,1,रक्त,1,राष्ट्रीय पक्षी मोर,1,रूहानी ताकत,1,रेड-व्हाइट ब्लड सेल्स,1,लाइट हाउस,1,लोकार्पण समारोह,1,विज्ञान कथा,1,विज्ञान दिवस,2,विज्ञान संचार,1,विश्व एड्स दिवस,1,विषाणु,1,वैज्ञानिक मनोवृत्ति,1,शाकाहार/मांसाहार,1,शिवम मिश्र,1,संदीप,1,सगोत्र विवाह के फायदे,1,सत्य साईं बाबा,1,समगोत्री विवाह,1,समाचार पत्रों में ब्‍लॉगर सम्‍मेलन,1,समाज और हम,14,समुद्र मंथन,1,सर्प दंश,2,सर्प संसार,1,सर्वबाधा निवारण यंत्र,1,सर्वाधिक प्रदूशित शहर,1,सल्फाइड,1,सांप,1,सांप झाड़ने का मंत्र,1,साइंस ब्‍लॉगिंग कार्यशाला,10,साइक्लिंग का महत्‍व,1,सामाजिक चेतना,1,सुपर ह्यूमन,1,सुरक्षित दीपावली,1,सूत्रकृमि,1,सूर्य ग्रहण,1,स्‍कूल,1,स्टार वार,1,स्टीरॉयड,1,स्‍वाइन फ्लू,2,स्वास्थ्य चेतना,15,हठयोग,1,होलिका दहन,1,‍होली की मस्‍ती,1,Abhishap,4,abraham t kovoor,7,Agriculture,7,AISECT,11,Ank Vidhya,1,antibiotics,1,antivenom,3,apj,1,arshia science fiction,2,AS,26,ASDR,8,B. 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Scientific World: मंत्रों की अलौकिक शक्ति (Supernatural Power of Mantras)
मंत्रों की अलौकिक शक्ति (Supernatural Power of Mantras)
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