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भारत में पितृ सत्‍तात्‍मक परिवार होने तथा लगभग सभी धर्मों में पुत्र को विशेषाधिकार प्रदान किये जाने के कारण ज्‍यादातर मॉं-बाप की अभिलाषा रहती है कि उनके आंगन में लड़के की किलकारियां अवश्‍य गूंजे। इसी चाहत का फायदा उठाकर जहां बहुत से नीम-हकीम लोगों की जेबें ढीली करते रहते हैं, वही बाबा, स्‍वामी और तांत्रिकों को लोगों का शोषण करने का सौभाग्‍य प्राप्‍त होता रहा है। हालांकि बदलते समय के साथ लड़कियों ने अपनी योग्‍यता के द्वारा यह सिद्ध कर दिया है कि वे लड़कों से किसी मामले में कम नहीं होतीं, बावजूद इसके यह भेड़चाल जारी है।

पिछले दिनों मेरी एक मित्र से मुलाकात हुई। बातों-बातों में पता चला कि उनके घर में तीन लड़कियां हैं और वे लड़का पैदा न कर पाने के कारण बेहद दुखी रहते हैं। जब इस बारे में उनसे वार्ता आगे बढ़ी, तो उन्‍होंने मेरा ज्ञान बढ़ाते हुए कहा कि हमारे शास्‍त्रों में लड़का पैदा करने की स्‍पष्‍ट विधि लिखी हुइ है और उसी पर ट्राई कर रहा हूँ। मैंने जब ऐसी सामग्री दिखाने को कहा, तो वे अगले ही दिन वह परम ज्ञान लेकर हाजिर हो गये।

मित्र महोदय ने पहले पुत्र 'प्राप्ति का एक सिद्ध मंत्र' दिखाया (इसकी बातें बाद में), फिर बाद में एक मुद्रित लेख दिया। उक्‍त लेख की संक्षिप्‍त जानकारी यहॉं प्रस्‍तुत है:

स्त्री के मासिक धर्म के सोलह दिनों तक के समय को ऋतुकाल कहा जाता है। उस दौरान सम्‍भोग करने पर ही गर्भ धारण हो सकता है। लेकिन इसके साथ ही साथ विद्वानों का मानना है कि मासिक धर्म होने पर जो रक्‍त स्रावित होता है, वह दूषित होता है। इसलिए इस दौरान सेक्‍स से परहेज करना चाहिए। विद्वानों का विचार है कि इस दौरान सम्‍भोग करने पर उत्‍पन्‍न हुई संतानों में अनेक प्रकार के विकार उत्‍पन्‍न्‍ा हो जाते हैं।

मासिक धर्म के वर्जित चार दिनों के अतिरिक्‍त शेष बारह दिनों में सम्‍भोग करने से पैदा होने वाली संतानों में अलग-अलग प्रकार की पृत्ति बताई गयी है। जैसे चौथी रात को सम्‍भोग करने से कम आयु वाला पुत्र, पांचवी रात्रि से कम आयु वाली ह्रदय रोगी पुत्री, छठी रात से वंश वृद्धि करने वाला पुत्र, 7वीं रात से बांझ पुत्री, 8वीं रात से पिताहंता पुत्र, 9वीं रात से कुल का नाम रौशन करने वाली पुत्री, 10वीं रात से कुल का नाम रौशन करने वाला पुत्र, 11वीं रात से अति सुंदर पुत्री, 12वीं रात से गुणी पुत्र, 13वीं रात से परेशानी उत्‍पन्‍न करने वाली पुत्री, 14वीं रात से अत्‍यंत गुणी पुत्र, 15वीं रात से सौभाग्‍यशाली पुत्री और 16वीं रात से विद्वान पुत्र पैदा होता है।

मासिक धर्म के 16 दिनों के बाद स्‍त्री का रज अत्‍यधिक गर्म हो जाता है और वह पुरूष के वीर्य को जला डालता है। इसलिए इस दौरान संभोग करने से या तो गर्भपात हो जाता है या संतान पैदा होते ही मर जाती है। उस तथाकथित शास्‍त्रीय जानकारी के अनुसार मासिक धर्म के चौथे दिन के संभोग से अल्पायु और दरिद्र पुत्र, पांचवे दिन से जन्‍मी सिर्फ लड़की पैदा करने वाली कन्‍या, छठे दिन से कम आयु का पुत्र, 7वें दिन से बांझ कन्‍या, 8वें दिन से ऐश्‍वर्यशाली पुत्र, 9वें दिन से ऐश्‍वर्यशालिनी पुत्री, 10वें दिन से चालाक पुत्र, 11वें दिन से चरित्रहीन पुत्री, 12वें दिन से सर्वगुण सम्‍पन्‍न पुत्र, 13वें दिन से वर्णशंकर पुत्री, 14वें दिन से श्रेष्‍ठ पुत्र, 15वें दिन से सौभाग्‍यवती पुत्री तथा 16वें दिन से सर्वगुण सम्‍पन्‍न पुत्र पैदा होता है।

 इसके अतिरिक्‍त 'जन भावनाओं' को दृष्टिगत रखते हुए कुछ टोटके टाइप जानकारी भी दी गयी थी। जैसे ताकतवर और गोरे पुत्र के लिए गर्भवती स्‍त्री को पलाश के एक पत्‍ते को लेकर पीसकर गाय के दूध के साथ रोज पीना चाहिए।

उक्‍त जानकारी को आयुर्वेद से प्राप्‍त बताया गया है, पर इसमें जरा भी सच्‍चाई नहीं है। क्‍योंकि बच्‍चे के लिंग का निर्धारण पुरूष के शुक्राणुओं द्वारा होता है। (गर्भाधान की क्रिया के दौरान जब पुरूष का एक्स शुक्राणु स्त्री के किसी अण्डाणु से निषेचन क्रिया करता है, तो जन्‍मने वाली संतान लड़की  होती है। लेकिन इस क्रिया में यदि वाई शुक्राणु बाजी मार ले जाए, तो पैदा होने वाली सन्तान लड़का होता है।) इसलिए मेरे विचार में मासिक धर्म के दिनों के द्वारा लिंग निर्धारण की बात कहना नितांत अवैज्ञानिक है। ऐसा कदापि संभव नहीं है।
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  1. तो क्या आपको लगता है ये जानकारियाँ सत्य भी हो सकती हैं ?

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  2. कुछ हद तक तो में सहमत हूँ,

    जैसे कि अगर किसी महिला का मासिक धर्म एक तारीख को खत्म होता हैं तो अगले सात दिन तक नए अंडे पैदा होते हैं और फिर अगले सात दिन तक वो पूरी तरह से मजबूत अवस्था में रहते हैं फिर अगले सात दिनों में वो अंडे मरने लगते हैं जैसे ही २१ वां दिन ख़त्म होता हैं वो अंडे मर कर के गंदे खून कि तरह बाहर आने लगे हैं. जिसकी किर्या अगले साथ दिन तक चलती हैं. ईस बात का प्रमाण आज के डॉ भी दे ते हैं.

    ईस तरह से दुसरे हफ्ते में किया गया सम्भोग अच्छी संतान पैदा कर सकता हैं.

    एक बात और अगर मासिक धर्म एक तारीख को खत्म हुआ हैं तो अगले ५ दिन तक सम्भोग करने के बाद भी महिला गर्भवती नहीं हो सकती क्योंकि अंडे बाल्य अवस्था में होते हैं और इसी तरह से आखिर दिनी में यानि कि २१ वें दिन के बाद भी सम्भोग करने से महिला गर्भवती नहीं हो सकती , क्योंकि अंडे मरने लगते हैं.

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  3. लड़का या लड़की पैदा होना ये कभी भी औरत के उपर निर्भर नहीं होता हैं, ये सिर्फ आदमी के शुक्राणु के उपर निर्भर होता हैं.

    क्योंकि औरत के अन्दर सिर्फ अंडाशय होता हैं, आदमी के शुक्राणु में नर और मादा दोनों तरह के शुक्राणु होते हैं. जो कि निर्भर करता हैं कि वो कितने मजबूत हैं.

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  4. आपके मित्र के ये फार्मूले कहीं पढे तो मैंने भी हैं लेकिन अलग-अलग दिन के अलग-अलग परिणाम देने वाले पुत्र या पुत्री के ज्ञान से मैं अनभिज्ञ हूँ । ज्यादा बडे वैज्ञानिक तथ्य के रुप में ये जरुर जाना हुआ है कि पुत्र या पुत्री के जन्म का दारोमदार पुरुष के शुक्राणुओं में ही मौजूद रहता है ।

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  5. जो भी हो लैगिक विभेदीकरण के कुतर्को द्वारा सामाजिक विखंडन ही बढ़ता है और मानवाधिकारों क़ा हनन होता है

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  6. शर्तिया पुत्र प्राप्ति अथवा मनचाही संतान के बारे में कुछ आध्यात्मिक पुरुषों ने भी अपने विचार रखे हैं। वह फार्मूला आपके रखे फार्मूलों में से नहीं है। चूंकि यह सोच लिंगभेद पर आधारित है,मैं इस पर कुछ नहीं कहना चाहूंगा।

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  7. छः लड़कियों के बाप ने,
    नुस्ख़ा ये जिस दिन पढ़ लिया,
    चौथे ब्याह को चल दिया.....

    -- mansoorali हाश्मी
    http://aatm-manthan.com

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  8. तारकेश्वर गिरी जी कि पहली टिप्पणी से असहमत हूँ और दूसरी सही है।
    यदि ये सूत्र ठीक भी हों तो इन की जाँच कैसे हो सकती है? पहले तो इतने सारे प्रयोग करने के लिए पीढि़याँ चाहिए। फिर हर बार परिणाम बिलकुल एक ही आए तो उसे सही माना जाए। यह सब खाने कमाने के धंधे हैं। जब गर्भ का लिंग परीक्षण प्रतिबंधित है और करना दंडनीय अपराध है। तो इस तरह की चिकित्सा को भी प्रतिबंधित और दंडनीय अपराध बना देना चाहिए।

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  9. अनुभवी जनों के कमेंट्स का ही इंतजार करूँगा.

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  10. रोचक परिचर्चा.आगे पढ़ती रहूंगी.

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  11. जहा तक मेरी जानकारी कई मासिक धर्म के पहले से दसवे दिन तक कोई महिला गर्भवती नहीं हो सकती क्योकि तब तक अंडे बाहर आते ही नहीं है फिर ख़राब और अच्छे बच्चे का सवाल ही नहीं उठता है | वैसे विज्ञानं के पास कई उपाय है जो पहले ही बता सकता है की पुत्र होने की कितनी संभावनाए है पुरुष के वाई स्पर्म की गिनती करके और उनकी सेहत देख कर और दूसरे उपाय है जो पुत्र होने की संभावना को पढ़ा सकता है मतलब ५० -५० की जगह ६०-४० का बन सकता है | और निवेदन है की इस तरह की जानकारिया ना दिया करे आप तो किसी और मकसद से बताते है और यहाँ तो लोग उसे ही सच मान बैठते है या हो सके तो साथ में ये जानकारी भी जोड़ते चले की विज्ञानं की सुने तो ये सब संभव नहीं है |

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  12. @ अरविन्द जी ,
    जानकारियाँ काम की भी हों तो अपनी उम्र ? :)

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  13. आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार (12.02.2011) को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at http://charchamanch.uchcharan.com/
    चर्चाकार:Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)

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  14. ज़ाकिर भाई, वास्तव में आप लोग तथ्य को सही ढंग से विश्ळेषित नहीं करते....आपके दोस्त द्वारा दिये गये शास्त्रीय-ग्यान में यह कहां लिखा है कि लिन्ग निर्धारण स्त्री के अन्ड से होता है---इस जानकारी के अनुसार भी लिन्ग निर्धारण तो शुक्राणु ही करेंगे..जो xy(male)X(Female)XX--> X+x=girl..X+y=boy
    ---परन्तु...कब , कैसे, क्यों..xX या Xy होगा यह अभी विग्यान नहीं जानता....यही stipulation यह शास्त्रीय ग्यान करता है,हज़ारों वर्षों के अनुभव के साथ...तो क्यों न प्रयोग किये जायं? यह आधुनिक ग्यान/विग्यान से बहुत आगे की वस्तु है....
    ---तारकेश्वर जी ने सही कहा है ..हां गिरि जी शुक्राणु में स्त्री-पुरुश दोनों के शुक्राणु नहीं--दोनों प्रकार के क्रोमोसोम--x व y होते हैं जो लिन्ग निर्धारण करते हैं..
    ---वास्तव में विग्यान के अन्धविश्वास में हम बिना सोचे-समझे अपने शास्त्रीय ग्यान पर अविश्वास करने लगते हैं जो इस देश का बहुत बडा दुर्भाग्य है....

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  15. ---लिन्ग परीक्षण भी अपने देश में सामाजिक कारणों से प्रतिबन्धित है अन्य उन्नत देशों में नहीं, न चिकित्सकीय कारणों से...अत: इस चिकित्सा को क्यों बन्द करेंगे...क्या भारतीय है इसलिये ...???

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  16. आप का यह लेख मुझे तो अच्छा लगा और यह जानकारी हमने तो स्त्री शिक्षा नामक किताब में पढ़ा है | हमने तो इसको अपनाया भी है और ऐसा करने पर लड़का ही हुआ .......

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  17. लिंग परीक्षण और लिंग भेद से दूर रहें...।

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  18. भ्रूण परीक्षण नैतिकता एवम् मानवता के विरुद्ध है तथा आने वाली पीढ़ियों के प्रतिकिया गया गोर अपराध है.........अक्षम्य अपराध.............



    आपका एक कदम हमारे अस्तित्व के लिये संजीवनी सिद्ध होगा।
    एक निवेदन-

    मैं वृक्ष हूँ। वही वृक्ष, जो मार्ग की शोभा बढ़ाता है, पथिकों को गर्मी से राहत देता है तथा सभी प्राणियों के लिये प्राणवायु का संचार करता है। वर्तमान में हमारे समक्ष अस्तित्व का संकट उपस्थित है। हमारी अनेक प्रजातियाँ लुप्त हो चुकी हैं तथा अनेक लुप्त होने के कगार पर हैं। दैनंदिन हमारी संख्या घटती जा रही है। हम मानवता के अभिन्न मित्र हैं। मात्र मानव ही नहीं अपितु समस्त पर्यावरण प्रत्यक्षतः अथवा परोक्षतः मुझसे सम्बद्ध है। चूंकि आप मानव हैं, इस धरा पर अवस्थित सबसे बुद्धिमान् प्राणी हैं, अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि हमारी रक्षा के लिये, हमारी प्रजातियों के संवर्द्धन, पुष्पन, पल्लवन एवं संरक्षण के लिये एक कदम बढ़ायें। वृक्षारोपण करें। प्रत्येक मांगलिक अवसर यथा जन्मदिन, विवाह, सन्तानप्राप्ति आदि पर एक वृक्ष अवश्य रोपें तथा उसकी देखभाल करें। एक-एक पग से मार्ग बनता है, एक-एक वृक्ष से वन, एक-एक बिन्दु से सागर, अतः आपका एक कदम हमारे संरक्षण के लिये अति महत्त्वपूर्ण है।

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  19. आपने तो बहुत बड़ा फ़ंडा लीक कर दिया.
    :)

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  20. बेनामी6/23/2012 11:49 am

    तर्क बिल्कुल सही है

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं
  21. बेनामी6/23/2012 11:49 am

    तर्क बिल्कुल सही है

    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं
  22. इतने वर्षों से प्रचलित मार्गदर्शक जानकारी के बावजूद ९९% लोगों का जन्म एक दुर्घटना मात्र हो कर रह गया है | भारत के हुक्मरान एवं दुर्घटना समानार्थी शब्द हैं |

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वैज्ञानिक चेतना को समर्पित इस यज्ञ में आपकी आहुति (टिप्पणी) के लिए अग्रिम धन्यवाद। आशा है आपका यह स्नेहभाव सदैव बना रहेगा।

 
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