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सन 1866 ईसवी में जब ग्रेगर जॉन मेण्‍डल ने मटर के पौधों की वंशागति की प्रकृति से सम्‍बंधित शोधकार्य को प्रकाशित किया था, तब किसने सोचा था क...



सन 1866 ईसवी में जब ग्रेगर जॉन मेण्‍डल ने मटर के पौधों की वंशागति की प्रकृति से सम्‍बंधित शोधकार्य को प्रकाशित किया था, तब किसने सोचा था कि 1997 तक पहुँचते-पहुँचते मनुष्‍य जीवों का क्‍लोन बनाने में सफल हो जाएगा?

हम जानते हैं कि हमारा शरीर अत्‍यंत सूक्ष्‍म कोशिकाओं (जिन्‍हें सूक्ष्‍मदर्शी के बिना देखना संभव नहीं है) से मिलकर बना है। इन कोशिकाओं के भीतर एक न्‍यूक्लियस (केन्‍द्रक) पाया जाता है। प्रत्‍येक न्‍यूक्लियस के भीतर धागेनुमा संरचनाएँ पाई जाती है, जिन्‍हें क्रोमोसोम (गुणसूत्र) कहा जाता है। मानव कोशिकाओं के प्रत्‍येक न्‍यूक्लियस में 46 क्रोमोसोम होते हैं। इसमें से 23 क्रोमोसोम माता से तथा 23 पिता से आते हैं। क्रोमोसोम प्रोटीन तथा न्‍यूक्लिक एसिड (डीएनए) से मिल कर बनते हैं। डीएनए एक दोहरी सर्पिल आकार की कुडली होती है, जिसमें जीवन खंड के रूप में जींस (वंशाणु) जुड़े रहते हैं।

यह एक ज्ञात तथ्‍य है कि प्रत्‍येक जीवधारी कैसा दिखेगा अथवा कैसा व्‍यवहार करेगा, यह उसके जीन द्वारा निर्धारित होता है। इसके अतिरिक्‍त जीन के अध्‍ययन से मानव इतिहास के बारे में जाना जा सकता है। जीन वैज्ञानिकों का यहाँ तक मानना है कि यदि मानव के समस्‍त जीनों को पढ़ लिया जाए, तो उसकी जीन कुण्‍डली के आधार पर उसके शारीरिक लक्षणों की भविष्‍यवाणी करना भी सम्‍भव हो सकेगा। इसके लिए वैश्विक स्‍तर पर मानव जीनोम परियोजना का संचालन किया जा रहा है, जिससे 18 देशों की 250 प्रयोगशालाएँ जुड़ी हुई हैं।

डीएनए क्‍या है, इसका इतिहास क्‍या है, इसकी सम्‍भावनाएँ क्‍या है, यह प्रश्‍न अक्‍सर लोगों के दिमाग में कौंधते रहते हैं। इन प्रश्‍नों के समाधान के उद्देश्‍य से विज्ञान प्रसार ने डीएनए की महागाथा नामक पुस्‍तक का प्रकाशन किया है। यह पुस्‍तक बिमान बसु द्वारा मूल रूप में अंग्रेजी में लिखी गयी पुस्‍तक ‘The DNA Saga’ का हिन्‍दी अनुवाद है, जिसे चर्चित विज्ञान लेखक डॉ0 रमेश दत्‍त शर्मा द्वारा सम्‍पन्‍न किया गया है।

बिमान बसु एक कुशल विज्ञान संचारक है, जो तीन दशकों से भी अधिक समय से विज्ञान लेखन कर रहे हैं। वे साइंस रिपोर्टर के कुशल सम्‍पादक के रूप में भी जाने जाते हैं। उन्‍होंने मुद्रण एवं इलेक्ट्रिक माध्‍यमों के लिए प्रभूत मात्रा में विज्ञान साहित्‍य की रचना की है। इसके अलावा रेडियो एवं दूरदर्शन के लिए भी अनके स्क्रिप्‍ट लिखे हैं। उनकी चर्चित पुस्‍तके हैं- इनसाइड स्‍टार्स, द स्‍टोरी ऑफ मैन, जॉय ऑफ स्‍टार वाचिंग, फन विथ द सन, मार्चिंग अहेड विथ साइंस एवं कॉस्मिक विटास। वे 1994 में जन माध्‍यमों में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के सर्वश्रेष्‍ठ कार्य के लिए राष्‍ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद, नई दिल्‍ली के राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार से भी सम्‍मानित किये जा चुके हैं।

डीएनए की महागाथा डीएनए पर लिखी गयी एक पठनीय एवं संग्रहणीय पुस्‍तक है, जिसे 11 अध्‍यायों में विभक्‍त किया गया है। ये अध्‍याय हैं: 1. वंशागति के कारक, 2. यह वंशाणुओं में हैं, 3. दोहरी कुंडली, 4. पुराने की नकल, 5. जब कूट का भेद खुला, 6. सम्‍बंधन-वंशाणु, 7. फुदकने वाला वंशाणु, 8. डीएनए जासूस, मानव-जीनोम का मानचित्रण, 10. जीवन की प्रतियाँ बनाना, 11. डीएनए अनुसंधान के मील के पत्‍थर।

विज्ञान संचार के दृष्टिकोण से रची गयी यह एक उत्‍कृष्‍ट पुस्‍तक है, जिसका प्रोडक्‍शन सराहनीय है। पुस्‍तक में यथा स्‍थान रंगीन चित्रों का समावेश किया गया है, जिससे यह उपयोगी के साथ-साथ आकर्षक भी हो गयी है। इस शानदार पुस्‍तक के प्रकाशन के लिए विज्ञान प्रसार निश्‍चय ही बधाई का पात्र है।

पुस्‍तक: डीएनए की महागाथा
लेखक: बिमान बसु
अनुवाद: डॉ0 रमेश दत्‍त शर्मा 
प्रकाशक: विज्ञान प्रसार, ए-50, इंस्‍टीट्यूशनल एरिया, सेक्‍टर-62, नोएडा-201307 दूरभाष-0120-2104430-35, ईमेल- info@vigyanprasar.gov.in

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COMMENTS

BLOGGER: 29
  1. आप का बलाँग मूझे पढ कर अच्छा लगा , मैं भी एक बलाँग खोली हू
    लिकं हैhttp://sarapyar.blogspot.com/

    आपको मेरी हार्दिक शुभकामनायें.

    अगर आपको love everbody का यह प्रयास पसंद आया हो, तो कृपया फॉलोअर बन कर हमारा उत्साह अवश्य बढ़ाएँ।

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  2. बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

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  3. इतनी सहज सरल हिंदी में आप बातों को समझाते हैं कि पढ़कर मज़ा आ जाता है। इस पुस्तक को पढ़ने रुचि जग गई।
    बहुत अच्छी प्रस्तुति।

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  4. Man Plays God , .... Creates SYNTHETIC LIFE, .... Where is the place for GOD now.............where is the place for soul now..... where is the place for good , virtues , righteousness now....???????????????????​??????????????????
    Existence n self preservation at any cost seems to be tha ultimate Goal & to this end
    every act is justified ... Nothing is good or bad...
    But science is science.. we should know the facts and new inventions.. So I hope this book will be very useful in this regard.. Thank You

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  5. बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

    जवाब देंहटाएं
  6. जानकारी देने के लिए आपको धन्यवाद. आपकी सरल भाषा लुभाती है.

    जवाब देंहटाएं
  7. बहुत आसान तरीके से सब बताते हैं आप,
    साभार,
    विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

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  8. आदरणीय जाकिर भाई ,"डीएनए सागा"के लेखक श्री बिमान बासु साहब और अनुवादक रमेश दत्त शर्मा जी और आपको विशेष बधाई .इस कसाव दार संक्षिप्त और सुन्दर समीक्षा के लिए .हमें नहीं पता गलती किस स्तर पर हुई है फंडामेंटल्स या ए बी सी डी ..आनुवंशिकी की बताने में बहर-सूरत हो ही गई तो सुधार की गुंजाइश तो किसीभी विज्ञान प्रेमी की तरफ से रहती ही है .समीक्षा से एक पैराग्राफ को ले रहा हूँ -
    'प्रत्‍येक न्‍यूक्लियस के भीतर धागेनुमा संरचनाएँ पाई जाती है, जिन्‍हें क्रोमोसोम (गुणसूत्र) कहा जाता है। मानव कोशिकाओं के प्रत्‍येक न्‍यूक्लियस में 46 क्रोमोसोम होते हैं। इसमें से 23 क्रोमोसोम माता से तथा 23 पिता से आते हैं। क्रोमोसोम प्रोटीन तथा न्‍यूक्लिक एसिड (डीएनए) से मिल कर बनते हैं। इसे जीन (वंशाणु) भी कहते हैं। '
    आखिरी पंक्ति लें -क्रोमोसोम प्रोटीन तथा न्यूक्लिक एसिड से मिलकर बनते हैं ".इसे जीन भी (वन्शाणु)भी कहतें हैं .
    जाकिर भाई जीवनइकाइयां या जीवन खंड या वन्शाणु गुणसूत्रों (क्रोमोज़ोम्स )को नहीं कह सकते हैं .निर्धारित स्थानों पर बैठे रहतें हैं दोहरी सर्पिल आकार की कुंडल- नियों ,सीढ़ी दार संरचनाओं (डीएनए)पर जीवन खंड यानी जींस यानी जीवन इकाइयां यानी क्वांटम ऑफ़ लाइफ .माइक्रो -सोफ्ट एनकार्टा के अनुसार -

    Gene :It is the basic unit capable of transmitting characteristics from one generation to the next .It consists of a specific sequence of DNA or RNA that occupies a fixed position (locus,locality )on a chromosome .(source :Encarta concise English dictionary ,@Bloomsbury Publishing Plc 2001. ).
    chromosome :It is a rod shaped structure ,usually found in pairs in a cell nucleus ,that carries the genes that determine sex and the characteristics an organism inherits from its nucleus .Nucleic acid :It is an acid of high molecular weight ,e.g .DNA and RNA.,consisting of nucleotide chains that convey genetic information and are found in all living cells .

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  9. जाकिर भाई !जानकारी मुहैया करवाने के लिए आभार .जीनोम यानी जीवन इकाइयों का चिठ्ठा ही आज शादी विवाह में मिलवाना चाहिए -बाबूजी बड़े धोखे हैं इस राह में .लोग शादी ब्याह के मामले में जानकारी छिपातें हैं .खासकर मानसिक और परिवार में चलने वाली बीमारियाँ इसी लिए आज जीनोम प्रोजेक्ट की प्रासंगिकता और भी बढ़ गई है .खासकर बीमा कम्पनियों के लिए .
    फिर भी न जाने ये अपने अनिवासी भारतीय भाई भारत से दुल्हन लाने की फिराक में रहतें हैं .जहां इस राह में धोखे और जोखिम ज्यादा है .और फिर भारत में पहले ही लडका लड़की अनुपात अति विषम बना हुआ है .जन्म पत्री सिर्फ सीरियल्स में मिलाई जातीं हैं जीन -पत्रा मिलाने का दौर है ये .बधाई इस समीक्षा के लिए .

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  10. "N.D." ने DNA से तो इनकार कर दिया !
    अब किस तरह लगाए पता कौन है पिता ?
    'बेटा' यतीम क्यों बने ज़िन्दा हो अगर 'बाप' !
    'तेईस क्रोमोसोम' में, है राज़ ये छिपा,
    सीढ़ी घुमाऊँ दार है, चक्कर भी बहुत है,
    'कुण्डली' से 'कचहरी' तलक, दफ्तर भी बहुत है.

    ======================================
    "वीरू" की सोच- 'मेम' तो गोरी भी चलेगी ! "veeru bhai"
    आबादी देश की भी तो आधी ही बढ़ेगी !!
    ================================
    http://aatm-manthan.com

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  11. वीरेन्‍द्र जी, असावधानी और थोडा जल्‍दबाजी में हुई इस त्रुटि की ओर ध्‍यान दिलाने का शुक्रिया।

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  12. मियाँ मंसूर अली साहब तेइसवां जोड़ा ही क्रोमोसोमों का सेक्स क्रोमोसोम्स है .एन डी तिवारी के पैर के निशाँ लो .वह भी संतानों से मिलतें हैं .बाईस जोड़े सोमातो -सोम्स -हैं देह से सम्बन्ध रखतें हैं .मर्द एक्स -वाई शख्शियत है और औरत एक्स -एक्स .लड़का होगा या लडकी इसमें खातूनों का कोई हाथ नहीं मर्द की तरफ से एक्स या वाई गुणसूत्र (क्रोमोसोम )जाकर फिमेल एग से इश्क करता है मिलन मनाता है निषेचित होता है .तब पीड़ा होती है लड़की या लड़का .और हाँ मर्द भी बाँझ होतें हैं तमगा औरत पर लगाना गुनाह है .कभी स्पर्म काउंट कम कभी मुरदार शुक्राणु .ताना कशी औरत झेले कुसूर मर्दुए का ,करे जुम्मा पिटे मुल्ला .

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  13. किताब के बारे में आप ने अच्छी जानकारी दी किन्तु हम जैसे कम पढ़ने वालो के लिए ये मुश्किल काम है | वैसे डिस्कवरी चैनल पर इस बारे में कई अच्छे कार्यक्रम आते है हम जैसा का थोडा बहुत ज्ञान वहा से ही बढ़ जाता है |

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  14. इस विषय पर पुस्तक प्रकाशन एक अच्छा प्रयास है . जानकारी के लिए आभार .

    जवाब देंहटाएं
  15. बहुत अच्छी जानकारी देने के लिए आपको धन्यवाद!

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  16. The basic objective of science communication is to develop scientific temper i.e. rational thinking among the common mass. And scientific temper does not have any relation with science itself. This only involves method of science (experiment, observation and deduction) while decision making in daily life. Today, many of the developments are closely associated with science e.g. BT brinjal, nuclear reactors, climate change. If we don't know the roots of such scientific issues, then we can't argue or make any decision for the sake of our environment, society and country.

    Choices are of yours- you want to cling with the unscientific rituals, superstitions or you need to be aware through scientific/rational/logical spirit.

    Pt. Nehru first of all used the term 'scientific temper' regarding the advancements of S & T in our country. He dreamed of an India where every citizen will have scientific temper. Later on, India became the first nation to declare Scientific Policy Resolution (SPR) in 1958 by its parliament. As per our Constitution's Article 51 A (h), we have to develop the inquiry spirit, scientific temper, humanism and reform in our citizens. In S & T Policy-2003 again the popuarisation of science among the youth and common man is emphasised.

    NCSTC and Vigyan Prasar (VP) are the two major government bodies to popularise the science and inculcating scientific temper among the mass. To conduct training, sensitization programmes for the sake of science communication, producing popular science books, activity kits, innovative experiment CDs for the students etc. are some major works of such organisations. Science can be communicated to people through every possible medium (print, electronic, ICT, social networking like new media, digital media, folk media etc.).

    Vigyan rail (science exhibition on wheels) was an innovative expedition done by Vigyan Prasar in 2004-2005. In this Rail, S & T developments after independence were exhibited in 12 coaches. This train visited about 60 places of India during 8 months. Almost a crore people were visited this train during its journey.

    The reviewed book (DNA Ki Mahagatha) is one of Vigyan Prasar's 250 popular science books. VP publications are rather cheaper, more attractive and having long lasting production quality. No one can buy a book with such a wonderful content and in such a low price other than Vigyan Prasar. VP tries its best to reach to the target audience through low cost-no cost media.

    Zakir ji is communicating science through science blog. This medium is very effective and interactive. This medium works well.

    I admire Zakirji and all the valuable readers and supporters of TSALIIM. I will request you all here to make your support/contributions in the development of scientific temper. By doing so, you will directly/indirectly help Vigyan Prasar and NCSTC.

    You may also search Vigyan Prasar website- www.vigyanprasar.gov.in for any further inquiry/suggestions/inputs.

    All the best.

    Manish Maohan Gore
    Vigyan Prasar
    A-50, Institutional Area,
    Sector-62,
    NOIDA-201309 (U.P.)

    Email: mmgore@vigyanprasar.gov.in

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  17. Manish Mohan Gore7/19/2011 5:32 am

    The basic objective of science communication is to develop scientific temper i.e. rational thinking among the common mass. And scientific temper does not have any relation with science itself. This only involves method of science (experiment, observation and deduction) while decision making in daily life.

    जवाब देंहटाएं
  18. Manish Mohan Gore7/19/2011 5:34 am

    (Part 2)
    Today, many of the developments are closely associated with science e.g. BT brinjal, nuclear reactors, climate change. If we don't know the roots of such scientific issues, then we can't argue or make any decision for the sake of our environment, society and country.
    Choices are of yours- you want to cling with the unscientific rituals, superstitions or you need to be aware through scientific/rational/logical spirit.

    जवाब देंहटाएं
  19. Manish Mohan Gore7/19/2011 5:35 am

    (Part 3)
    NCSTC and Vigyan Prasar (VP) are the two major government bodies to popularise the science and inculcating scientific temper among the mass. To conduct training, sensitization programmes for the sake of science communication, producing popular science books, activity kits, innovative experiment CDs for the students etc. are some major works of such organisations. Science can be communicated to people through every ossible medium (print, electronic, ICT, social networking like new media, digital media, folk media etc.).

    जवाब देंहटाएं
  20. Manish Mohan Gore7/19/2011 5:36 am

    (Part 4)
    Vigyan rail (science exhibition on wheels) was an innovative expedition done by Vigyan Prasar in 2004-2005. In this Rail, S & T developments after independence were exhibited in 12 coaches. This train visited about 60 places of India during 8 months. Almost a crore people were visited this train during its journey.

    जवाब देंहटाएं
  21. बेनामी7/19/2011 5:47 am

    (Part 5) The reviewed book (DNA Ki Mahagatha) is one of Vigyan Prasar's 250 popular science books.

    जवाब देंहटाएं
  22. बेनामी7/19/2011 5:48 am

    (Part 6) VP publications are rather cheaper, more attractive and having long lasting production quality. No one can buy a book with such a wonderful content and in such a low price other than Vigyan Prasar. VP tries its best to reach to the target audience through low cost-no cost media

    जवाब देंहटाएं
  23. बेनामी7/19/2011 5:49 am

    (Part 7)
    Zakir ji is communicating science through science blog. This medium is very effective and interactive. This medium works well.
    I admire Zakir ji and all the valuable readers and supporters of TSALIIM. I will request you all here to make your upport/ contributions in the development of scientific temper. By doing so, you will directly /indirectly help Vigyan Prasar and NCSTC.

    जवाब देंहटाएं
  24. बेनामी7/19/2011 5:50 am

    (Part 8)
    You may also search Vigyan Prasar website- www.vigyanprasar.gov.in for any further inquiry/suggestions/inputs.
    All the best.
    Manish Maohan Gore
    VIGYAN PRASAR

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  25. महत्वपूर्ण पुस्तक पर उल्लेखनीय जानकारी दी आपने, धन्यवाद.

    जवाब देंहटाएं
  26. बेनामी5/05/2012 10:02 pm

    आप वहाँ कुछ अच्छे अंक पूरा किया. मैं विषय पर एक खोज किया और पाया व्यक्तियों के बहुमत अपने ब्लॉग के साथ एक ही राय है.

    जवाब देंहटाएं
  27. बेनामी5/06/2012 3:54 am

    नमस्ते और आप अपनी जानकारी के लिए धन्यवाद - मैं निश्चित रूप से यहीं से कुछ नया है लेकिन मैं कुछ तकनीकी मुद्दों विशेषज्ञता इस वेब साइट का उपयोग किया उठाया है, क्योंकि मैं मैं करने के लिए पिछले समय की वेब साइट बहुत पुनः लोड अनुभवी यह मिल सकता है लोड ठीक से मैं सोच रहा था अगर आपके होस्टिंग ठीक है? मैं ऐसा नहीं है कि शिकायत कर रहा हूँ, लेकिन आलसी लोड हो रहा है समय की आवृत्तियाँ अक्सर गूगल में अपने स्थान को प्रभावित करेगा और अपने गुणवत्ता स्कोर को नुकसान अगर और ऐडवर्ड्स के साथ विज्ञापन, विपणन वैसे भी मैं इस आरएसएस मेरा ईमेल जोड़ रहा हूँ और अपने बहुत अधिक के लिए बाहर देखो सकता है सकते हैं संबंधित रोमांचक सामग्री सुनिश्चित करें कि आप इस फिर से जल्द ही अद्यतन

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वैज्ञानिक चेतना को समर्पित इस यज्ञ में आपकी आहुति (टिप्पणी) के लिए अग्रिम धन्यवाद। आशा है आपका यह स्नेहभाव सदैव बना रहेगा।

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अंतरिक्ष युद्ध,1,अंतर्राष्‍ट्रीय ब्‍लॉगर सम्‍मेलन,1,अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी ब्लॉगर सम्मेलन-2012,1,अतिथि लेखक,2,अन्‍तर्राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन,1,आजीवन सदस्यता विजेता,1,आटिज्‍म,1,आदिम जनजाति,1,इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी,1,इग्‍नू,1,इच्छा मृत्यु,1,इलेक्ट्रानिकी आपके लिए,1,इलैक्ट्रिक करेंट,1,ईको फ्रैंडली पटाखे,1,एंटी वेनम,2,एक्सोलोटल लार्वा,1,एड्स अनुदान,1,एड्स का खेल,1,एन सी एस टी सी,1,कवक,1,किंग जार्ज मेडिकल कॉलेज,1,कृत्रिम मांस,1,कृत्रिम वर्षा,1,कैलाश वाजपेयी,1,कोबरा,1,कौमार्य की चाहत,1,क्‍लाउड सीडिंग,1,क्षेत्रीय भाषाओं में विज्ञान कथा लेखन,9,खगोल विज्ञान,2,खाद्य पदार्थों की तासीर,1,खाप पंचायत,1,गुफा मानव,1,ग्रीन हाउस गैस,1,चित्र पहेली,201,चीतल,1,चोलानाईकल,1,जन भागीदारी,4,जनसंख्‍या और खाद्यान्‍न समस्‍या,1,जहाँ डॉक्टर न हो,1,जादुई गणित,1,जितेन्‍द्र चौधरी जीतू,1,जी0 एम0 फ़सलें,1,जीवन की खोज,1,जेनेटिक फसलों के दुष्‍प्रभाव,1,जॉय एडम्सन,1,ज्योतिर्विज्ञान,1,ज्योतिष,1,ज्योतिष और विज्ञान,1,ठण्‍ड का आनंद,1,डॉ0 मनोज पटैरिया,1,तस्‍लीम विज्ञान गौरव सम्‍मान,1,द लिविंग फ्लेम,1,दकियानूसी सोच,1,दि इंटरप्रिटेशन ऑफ ड्रीम्स,1,दिल और दिमाग,1,दिव्य शक्ति,1,दुआ-तावीज,2,दैनिक जागरण,1,धुम्रपान निषेध,1,नई पहल,1,नारायण बारेठ,1,नारीवाद,3,निस्‍केयर,1,पटाखों से जलने पर क्‍या करें,1,पर्यावरण और हम,8,पीपुल्‍स समाचार,1,पुनर्जन्म,1,पृथ्‍वी दिवस,1,प्‍यार और मस्तिष्‍क,1,प्रकृति और हम,12,प्रदूषण,1,प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड,1,प्‍लांट हेल्‍थ क्‍लीनिक,1,प्लाज्मा,1,प्लेटलेटस,1,बचपन,1,बलात्‍कार और समाज,1,बाल साहित्‍य में नवलेखन,2,बाल सुरक्षा,1,बी0 प्रेमानन्‍द,5,बीबीसी,1,बैक्‍टीरिया,1,बॉडी स्कैनर,1,ब्रह्माण्‍ड में जीवन,1,ब्लॉग चर्चा,4,ब्‍लॉग्‍स इन मीडिया,1,भारत के महान वैज्ञानिक हरगोविंद खुराना,1,भारत डोगरा,1,भारत सरकार छात्रवृत्ति योजना,1,मंत्रों की अलौकिक शक्ति,1,मनु स्मृति,1,मनोज कुमार पाण्‍डेय,1,मलेरिया की औषधि,1,महाभारत,1,महामहिम राज्‍यपाल जी श्री राम नरेश यादव,1,महाविस्फोट,1,मानवजनित प्रदूषण,1,मिलावटी खून,1,मेरा पन्‍ना,1,युग दधीचि,1,यौन उत्पीड़न,1,यौन शिक्षा,1,यौन शोषण,1,रंगों की फुहार,1,रक्त,1,राष्ट्रीय पक्षी मोर,1,रूहानी ताकत,1,रेड-व्हाइट ब्लड सेल्स,1,लाइट हाउस,1,लोकार्पण समारोह,1,विज्ञान कथा,1,विज्ञान दिवस,2,विज्ञान संचार,1,विश्व एड्स दिवस,1,विषाणु,1,वैज्ञानिक मनोवृत्ति,1,शाकाहार/मांसाहार,1,शिवम मिश्र,1,संदीप,1,सगोत्र विवाह के फायदे,1,सत्य साईं बाबा,1,समगोत्री विवाह,1,समाचार पत्रों में ब्‍लॉगर सम्‍मेलन,1,समाज और हम,14,समुद्र मंथन,1,सर्प दंश,2,सर्प संसार,1,सर्वबाधा निवारण यंत्र,1,सर्वाधिक प्रदूशित शहर,1,सल्फाइड,1,सांप,1,सांप झाड़ने का मंत्र,1,साइंस ब्‍लॉगिंग कार्यशाला,10,साइक्लिंग का महत्‍व,1,सामाजिक चेतना,1,सुपर ह्यूमन,1,सुरक्षित दीपावली,1,सूत्रकृमि,1,सूर्य ग्रहण,1,स्‍कूल,1,स्टार वार,1,स्टीरॉयड,1,स्‍वाइन फ्लू,2,स्वास्थ्य चेतना,15,हठयोग,1,होलिका दहन,1,‍होली की मस्‍ती,1,Abhishap,4,abraham t kovoor,7,Agriculture,7,AISECT,11,Ank Vidhya,1,antibiotics,1,antivenom,3,apj,1,arshia science fiction,2,AS,26,ASDR,8,B. 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Scientific World: आदमी को आदमी बनाने वाला सूत्र।
आदमी को आदमी बनाने वाला सूत्र।
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