...उन्‍होंने टोने-टोटकों, तंत्र-मंत्र और जादुई शक्तियों के द्वारा मुझे हजार बार नष्‍ट किया।

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50 साल से भी ज्‍यादा समय तक अनेक योगी, ऋषि, सिद्ध, ज्‍योतिषी, जादू टोने वाले एवं हस्‍त रेखा निपुणों से मिलने के बाद और भिन्‍न-भिन्‍न प्...

50 साल से भी ज्‍यादा समय तक अनेक योगी, ऋषि, सिद्ध, ज्‍योतिषी, जादू टोने वाले एवं हस्‍त रेखा निपुणों से मिलने के बाद और भिन्‍न-भिन्‍न प्रकार की आश्‍चर्यजनक घटनाओं और रहस्‍यपूर्ण व्‍यक्तियों के तथाकथित चमत्‍कारों की बड़ी गहराई से विश्‍लेषण करने के उपरांत मैं अपने बहुत से विश्‍वासों एवं भ्रमों से बचने में सफल हुआ हूँ। ये ऐसे भ्रम थे जो बचपन में, उपदेश द्वारा, मेरे दिमाग में भर दियेगये थे, और जिन से इस समाज में रहते हुए बचा नहीं जा सकता।

वे घटनाएं, वे सैकड़ों भूत घरों एवं प्रेत आत्‍माओं, जिनके बारे में मैंने खोज की, हर एक में मैंने किसी न किसी मनुष्‍य को ही इन आश्‍चर्यजनक घटनाओं को करने का जिम्‍मेदार पाया। ऐसे अजीबोगरीब काम वे या तो किसी मानसिक बीमारी के कारण या शरारत के कारण किया करते थे। 

मैंने बहुत से मानसिक रोगियों को, जिनमें प्रेत आता था, ठीक किया है। मैंने उनका इलाज उनमें से प्रेत निकाल कर नहीं किया बल्कि हिप्‍नोटाइज करके, उनके दिमाग से गलत विचारों को दूर करके किया है। मेरा अनुभव है कि कुछ पुजानियों या साधु सन्‍तों को संयोगवश जो सफलताऍं मिलती हैं, वे केवल पूजा, प्रार्थना या मंत्रों को रोगी के मन के ऊपर हिप्‍नोटिक प्रभाव के कारण ही होती हैं। भोले-भाले लोग इन इलाजों को भूत-प्रेत और देवी देवताओं के साथ जोड़ देते हैं।
मैं यह भी अनुभव करता हूँ कि इन्‍सान की बदली हुई आवाज में बातें करना न तो प्रेतों के कारण होता है और न ही पुनर्जन्‍म के कारण, बल्कि यह सब कुछ मन के गलत विचारों के कारण है।

मैं प्रेतघरों में सोया हूँ। मैं और मेरी पत्‍नी आधी रात को प्रेतों की खोज में कब्रिस्‍तान भी गए हैं। मैं रात को कनाटा के कब्रिस्‍तान से लंका रेडियो पर भी बोला हूँ। यद्यपि हमने वहां कभी भी भूत नहीं देखे, फिर भी यदि वहां हमें कुछ लोगों ने अजीब अजीब आवाजें निकाल कर डराया होता, तो हमें गम्‍भीर मानसिक आघात पहुंच सकते थे। क्‍योंकि भूतों की मौजूदगी के बारे में विचार हमारे सचेत मन से तो निकल गए हैं, लेकिन मारे अचेत मन में अभी तक छिपे हुए हैं। दूसरी तरफ हमारा पुत्र, जिसका प्रेत, शैतान और देवताओं के डर के बिना पालन पोषण किया गया है, हो सकता है कि वह ऐसे सदमों का शिकार न हो।

मेरी खोज ने मुझे इस सत्‍य का साक्षात्‍कार करवाया है कि अन्‍धानुकरण करने वाले व्‍यक्तियों में ऐसे वहम व विश्‍वासों की जड़ें रहस्‍यमयी व्‍यक्तियों और शैतानों ने अपनी आय के साधन को बनाने के लिए लगाई हैं। पूजा, प्रार्थना, भेंट और बलि का प्रभाव तो अन्‍ध विश्‍वासी लोगों पर मनोवैज्ञानिक ढ़ंग से होता है। ये सारी बातें मनुष्‍य के दिमाग पर नींद लाने वाली दवाई जैसा ही प्रभाव डालती हैं। ज्‍यादातर मानसिक बीमारियों का कारण तो देवताओं, शैतानों का अंधानुकरण करने वाले लोगों में तथाकथित पवित्र वस्‍तुओं की अपवित्रता और अतिक्रमण इत्‍यादि के बारे में पैदा किया डर ही है।

अपनी जवानी के समय से ही मैं मनुष्‍य के पैदा किए हुए वहम, भ्रमों का उल्‍लंघन कर रहा हूँ, ताकि उनके प्रभावों की जांच कर सकूँ। दो वर्ष तक हस्‍त विद्याज्‍योतिष सीखता रहा हूँ परन्‍तु मेरी इस पढ़ाई ने मुझे इसको व्‍यर्थ घोषित करने में ही सहायता प्रदान की है। मैंने अपनी जिंदगी के आवश्‍यक कार्यों को 'अशुभ दिनों' व 'बुरे शगुनों' के साथ शुरू किया है। मेरे माता पिता बहुत दिन इसलिए रोते रहे कि मैंने अपनी शादी के लिए चलते समय बायां पैर घर से पहले बाहर निकाला। कोलम्‍बो में मैंने अपनी कोठी तिरूवाला की नींव ठेकेदार और मजदूरों की मर्जी के विरूद्ध अशुभ दिन को रखा। 


मैं और मेरी चुनौतियॉं 
मैंने अपना पहला इनाम जून 1963 में रखा। यह सीलबंद लिफाफे में रखे नोट का क्रमांक पढने के बारे में था। इसके अनुसार एक हजार रूपये से लेकर पच्‍चीस हजार रूपये तक कोई भी रकम जमा करवा कर उतना ही इनाम जीत सकता था। यह उन व्‍यक्तियों के लाभार्थ था, जो अपने में टेलीपैथी की शक्ति का दावा करते थे। मैं एक जज को अपना नोट का नम्‍बर दिखाने के लिए भी तैयार था ताकि दूसरे कमरे में बैठा टेलीपैथी वाला व्‍यक्ति जज के मन को पढ सके। इसके ही अन्‍तर्गत डियूक विश्‍वविद्यालय के एक प्रसिद्ध टेलीपैथी डॉक्‍टर जे0 बी0 रहीन को भी निमंत्रण पत्र भेजा गया। 1965 मं मैंने इस शर्त को बढ़ा कर 75000 रूपये कर दिया ताकि अलौकिक शक्ति वाले लोग दूसरों देशों से कोलम्‍बो आकर हवाई जहाज के किराए के बिना भी और ज्‍यादा लाभ प्राप्‍त कर सकें।

1966 में लंका के आस्तिकों (कतादियों) ने कहा कि उनके पास सीलबंद नोट पढ़ने की शक्ति तो है, पर शर्त में रखी गयी जमानत की रकम ज्‍यादा है। इस मांग को ध्‍यान में रखते हुए मैंने इस रकम को 1000 रूपये से कम करके सिर्फ 75 रूपये कर दिया।ब्रह्मवादियों को मैंने चुनौती दी कि मैं उनको 5000 रूपये इनाम दूँगा यदि वे ऐसा प्रेत पैदा कर सकें, जिनकी फोटो ली जा सकती हो

यह बात सिद्ध करने के लिए कि ज्‍योतिष जुआ है, मैंने कहा- मैं दस व्‍यक्तियों की जन्‍म तारीख, जन्‍म समय व जन्‍म स्‍थान के अक्षांश व रेखांश भी दूँगा। उस ज्‍योतिषी को जो उन व्‍यक्तियों के सैक्‍स को व मौत की तारीख को (यदि वे मर चुके हों) ठीक ठीक बता देगा, मैं एक हजार रूपये का इनाम दूँगा। इनको 5 प्रतिशत गल्तियों की मुआफी होगी। हस्‍त रेखा निपुणों को मैंने चुनौती दी कि मैं उनको 10 हथेलियों के चित्र दूँगा। इन पाखण्डियों की भीड़ से बचने के लिए मैंने 75 रूपये की वापिस करने योग्‍य शर्त रख दी।

क्‍योंकि भारत में इन चीजों के बारे में ज्‍यादा गहरी धारणा है, इ‍सलिए दो भारतीय समाचार पत्रों ने मेरी तरफ से इन परीक्षण की जिम्‍मेदारी ले ली। उन्‍होंने प्रोफेसर वी वी रमन के अलावा सैकड़ों अन्‍य ज्‍योतिषियों को पत्र पत्रिकाओं से छपी चुनौती के समाचार काट कर भेजे, परंतु आज तक किसी भी ज्‍योतिषी ने 75 रूपये जमा करवा कर इस चुनौती को स्‍वीकार नहीं किया है।

सिंहली, तमिल और अंगेजी समाचार पत्रों के माध्‍यम से तीन अवसरों पर मैंने जादू टोने वालों को इस बात की चुनौती दी कि वे मुझे अपने जादू टोने से निश्चित समय के अन्‍तर्गत मार दें। तीनों ही अवसरों पर मुझे डाक से बहुत से जादू टोने प्राप्‍त हुए। अब तक मुझे लगभग 50 टोने जिनमें कुछ चॉंदी, तांबे की पत्तियां और कुछ कागजों के थे, प्राप्‍त हुए। लंका के लगभग सभी भागों के कतादियों द्वारा भेजे गये इन टोनों के बावजूद मैं आज तक बिलकुल तंदुरूस्‍त और ठीक हूँ और अन्‍य मनुष्‍यों की तरह जब मैं मर जाऊंगा तो ये टोने वाले यह अवश्‍य कहेंगे कि मैं उनके टोनों के देर से प्रभाव के कारण मरा हूँ।

1970 में मैंने कतारगामा के भक्‍तों की एक संस्‍था के प्रधान द्वारा लिखे एक पत्र के जवाब में लिखा कि मैं उस व्‍यक्ति को एक लाख रूपये दूंगा, जो जलती हुई आग के ऊपर 30 सकेण्‍ड के लिए सुरक्षित खड़ा रहेगा। चुनौती स्‍वीकार करने वाले को 1000 रू0 जमानत के तौर पर जमा करवाने होंगे। अलौकिक शक्तियों का एक भी दावेदान मेरी चुनौती को स्‍वीकार करने के लिए आगे नहीं आया। बहुत लोग ऐसे थे, जिन्‍होंने कहा कि उनके पास जमा करवाने के लिए पैसे नहीं हैं, परंतु उनमें अलौकिक शक्तियॉं विद्यमान हैं। बेशक मुझे ऐसे व्‍यक्तियों की बातों को गंभीरता से नहीं लेना चाहिए था। फिरभी मैंने उनमें से बहुतों को निमंत्रण दिया कि वे बिना धोखे के, जन समूह के सामने अपनी अलौकिक शक्ति का प्रदर्शन करें। अंत में दो मूर्खों के बिना और कोई भी मेरी परीक्षा का सामना करने के लिए तैयार नहीं हुआ।


नवीले डी सिल्‍वा नाम के एक व्‍यक्ति ने टाईम्‍ज ऑफ सीलोन में लिखा कि उसमें टेलीपैथी की शक्ति है और मेरे सामने इसको सिद्ध करके दिखा सकता है। 15 अगस्‍त 1967 को उसके दफ्तर में संपादकों के सामने उसका परीक्षण किया गया। उससे सात प्रश्‍न पूछे गये, जिसमें से वह एक का भी उत्‍तर नहीं दे सका।  

किस्‍मत बताने वाले सी डी अडैसूरीया नाम के एक व्‍यक्ति, जो बासकाडूवा का रहने वाला था और जिसमें अदृश्‍य वस्‍तुऍं देखने की शक्ति थी, का दावा था कि प्रधान मंत्री, मंत्री, संसद के सदस्‍य व अन्‍य प्रमुख लोग उसके श्रृद्धालु हैं। उसने डवासा पत्रिका के संपादक की सेफ में पड़े सीलबंद करेंसी नोट का क्रमांक मुफ्त में ही पढ़ने की सेवा प्रस्‍तुत की। उसने कई दिन ऐसे शुभ अवसर के इंतजार में व्‍यतीत किए, जिस दिन वह पूजा करके अदृश्‍य वस्‍तुओं को देखने की की शक्ति प्राप्‍त कर सके। अंत में जब उसने उस नोट का नम्‍बर बताया, तो उसका एक भी अंक ठीक नहीं था। 


भारत और श्रीलंका में बहुत से लोग सत्‍य श्री साईंबाबा, पादरीमलाई, स्‍वामीगल, नीलकांडा, दाताबल, दादाजी और आचार्य रजनीश जैसे जादूगरों को 'भगवान' समझ कर पूजते हैं, क्‍योंकि ये पाखण्‍डी दावा करते हैं कि वे पवित्र राख या लिंग को अपनी अलौकिक शक्ति से प्रकट करते हैं। समाचार पत्रों में भी उनकी बहुत सी अलौकिक शक्तियों के बारे में लेख छपते हैं, जो उनके अंधानुकरण करने वाले भक्‍तों द्वारा लिखे होते हैं। मैं उनको चुनौती देता हूँ कि वे मेरे द्वारा उनके शरीर की तलाशी लेने के उपरांत कोई वस्‍तु प्रकट करके दिखाएं। यदि उन्‍हें इस बात की आपत्ति है कि मुझ जैसा अपवित्र आदमी, उनके पवित्र शरीर को हाथ न लगाए, तो ऐसे नोट की नकल करके दिखाएं जो उनको दिखाया जाए। यद्यपि उनको ये चुनौतियां पत्र-पत्रिकाओं एवं डाक के माध्‍यम से भेजी गईं, परंतु अभी तक इन तथाकथित भगवानों में से किसी ने भी इसका उत्‍तर नहीं दिया।


कुछ लोग पुनर्जन्‍म को सिद्ध करने के लिए वैज्ञानिक ढ़ंग से प्रमाण देते हैं। उनके अनेक तर्कों में से एक तर्क यह भी है कि कुछ व्‍यक्ति हिप्‍नोटिज्‍म के प्रभाव के अन्‍तर्गत अपने पुनर्जन्‍म के बारे में बताते हैं। के एन ज्‍यतिलेके के अनुसार शारीरिक परिवर्तन हिप्‍नोटिज्‍म के प्रभाव से संभव है। ऊपर लिखे विचारों को व्‍यर्थ सिद्ध करने के लिए मैंने पुनर्जन्‍म में विश्‍वास करने वालों के लिए 15 रूपये से 75 हजार रूपये तक का इनाम समता के आधार पर रख दिया और उनको दो जुड़वा बच्‍चों की सांझी पहली जिंदगी के बारे में वर्णन करने के लिए कहा गया।


जो व्‍यक्त यह दावा करते हैं कि वे हिप्‍नोटिज्‍म की सहायता से मनुष्‍य में शारीरिक परिवर्तन ला सकते हैं, उनको यह चुनौती दी गयी कि वे एक गर्भवती औरत को हिप्‍नोटिज्‍म से उसके पेट में पड़े बच्‍चे को अलोप करके उसे वापिस गर्भवती होने से पहले की हालत में लाकर दिखाएं। ऐसी ही एक चुनौती मैंने उन व्‍यक्तियों को दी जो दावा करते हैं कि वे हिप्‍नोटिज्‍म की सहायता से मनुष्‍य को अदृश्‍य वस्‍तुएं देखने की शक्ति प्रदान कर सकते हैं। लेकिन कोई मेरे सामने नहीं आया।


यद्यपि मेरी चुनोतियों में से बहुतों को किसी ने भी स्‍वीकार नहीं किया, फिरभी मुझे हर्ष है कि इन चुनोतियों ने, जो मेरी म़ृत्‍ु तक खुली रहेंगी, अनेक बुद्धिजीवियों को इस बात का अहसास कराया है कि इस ब्रह्माण्‍ड में कोई भी अलौकिक शक्ति नहीं है। जो कुछ भी होता है, वह सब प्राकृतिक है। कोई भी चमत्‍कार नहीं है, परंतु कुछ रहस्‍य हैं। हमारे पूर्वजों के बहुत से रहस्‍य हमने हल कर लिए हैं, और आज के बहुत से रहस्‍य कल के वैज्ञानिक हल कर देंगे। उस समय तक हल न होने वाले रहस्‍यों को चमत्‍कार कहना मूर्खता ही है। - अब्राहम टी0 कोवूर

'और देवपुरूष हार गये' पुस्‍तक से साभार।
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अब्राहम थॉमस कोवूर श्रीलंका के प्रख्‍यात विज्ञानवेत्‍ता और विश्‍व के प्रमुख रेशनलिस्‍ट के रूप में जाने जाते हैं। उन्‍होंने अंधविश्‍वास को मिटाने के लिए अथक प्रयास किये। उनका कहना था कि जो व्यक्ति चमत्कारी शक्तियों का दावा करते हैं, केवल पाखंडी या दिमागी तौर पर पागल व्यक्ति हैं। उनके जीवन की कुछ प्रमुख घटनाओं को आप यहॉं क्लिक करके पढ़ सकते हैं।
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COMMENTS

BLOGGER: 47
  1. जाकिर भैया आपके इसी अंदाज़ का मै मुरीद हूँ आज से नहीं पिछले कई वर्षों से अंधविश्वास के खात्मे के लिए आपका योगदान ऐतिहासिक है

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  2. जाकिर भैया आपके इसी अंदाज़ का मै मुरीद हूँ आज से नहीं पिछले कई वर्षों से अंधविश्वास के खात्मे के लिए आपका योगदान ऐतिहासिक है

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  3. Andhwiswass ko khatam karne mein is tarah ke lekh kargar sidh honghe...sukriya.

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  4. अन्धविश्वास को खतम करने में आपका योगदान सराहनीय है ...

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  5. बहुत अच्छी जानकारी प्रस्तुत की है आपने। आभार।

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  6. ये सब वहम अंधविश्वास है ....

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  7. ए.टी.कोवूर का जिक्र मैंने आपकी ‘चुड़ैल‘ वाली पोस्ट पर अपनी टिप्पणी में की थी। कोवूर के बारे में विस्तृत लेख देकर आपने बहुत अच्छा कार्य किया है। आज हमें ऐसे ही कुछ और कोवूरों की ज़रूरत है जो पाखंड को चुनौती दे सकें और लोगों का भ्रम दूर कर सकें।
    सार्थक प्रस्तुति के लिए बधाई, रजनीश जी।

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  8. अज्ञानियों के प्रवेश के कारण अनेक विद्याएं आडम्बर अथवा अंधविश्वास बन कर रह गईं। लेकिन,मैं स्वयं ऐसे कई प्रकरणों को जानता हूं जो चमत्कार ही हैं। विज्ञान ने बड़ी उपलब्धियां तो हासिल की हैं मगर वह स्वयं कई छोटे-छोटे सवालों का भी जवाब दे पाने की स्थिति में नहीं है। यह वैसा ही है,जैसे स्वयं वैज्ञानिक भी वर्षों पुराने नियमों का कालांतर में मखौल उड़ाते हैं।

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  9. बहुत ही सुंदर पोस्ट . मगर अन्धविश्वास लोंगों के रग़ रग़ में बसा है. ख़त्म होना इतना आसान नहीं है लेकिन इस पोस्ट ने बहुत से भ्रम दूर कर दिए होंगे.

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  10. .
    .
    .
    यह बात सिद्ध करने के लिए कि ज्‍योतिष जुआ है, मैंने कहा- मैं दस व्‍यक्तियों की जन्‍म तारीख, जन्‍म समय व जन्‍म स्‍थान के अक्षांश व रेखांश भी दूँगा। उस ज्‍योतिषी को जो उन व्‍यक्तियों के सैक्‍स को व मौत की तारीख को (यदि वे मर चुके हों) ठीक ठीक बता देगा, मैं एक हजार रूपये का इनाम दूँगा। इनको 5 प्रतिशत गल्तियों की मुआफी होगी। हस्‍त रेखा निपुणों को मैंने चुनौती दी कि मैं उनको 10 हथेलियों के चित्र दूँगा। इन पाखण्डियों की भीड़ से बचने के लिए मैंने 75 रूपये की वापिस करने योग्‍य शर्त रख दी।

    क्‍योंकि भारत में इन चीजों के बारे में ज्‍यादा गहरी धारणा है, इ‍सलिए दो भारतीय समाचार पत्रों ने मेरी तरफ से इन परीक्षण की जिम्‍मेदारी ले ली। उन्‍होंने प्रोफेसर वी वी रमन के अलावा सैकड़ों अन्‍य ज्‍योतिषियों को पत्र पत्रिकाओं से छपी चुनौती के समाचार काट कर भेजे, परंतु आज तक किसी भी ज्‍योतिषी ने 75 रूपये जमा करवा कर इस चुनौती को स्‍वीकार नहीं किया है।


    अपने ब्लॉगवुड में भी तो कई सारे ज्योतिष विद्मा के विद्वान हैं... जानना चाहूँगा कि वे इस चुनौती पर क्या कहते हैं?


    ...

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  11. रजनीश जी

    समस्या ये है की इन पर विश्वास करने वालो का विश्वास इन चीजो से डिगा पाना इतना आसान नहीं है आप एक भ्रम तोड़ेंगे ये दूसरा ले कर हाजिर हो जायेंगे | फिर भी आप का प्रयास सराहनीय है कुछ लोगों पर कुछ तो असर होगा ही |

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  12. सार्थक आलेख, जरूरी भी, साधुवाद...

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  13. इस सार्थक लेख के लिए बधाई स्वीकार करें

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  14. अन्धविश्वास को खतम करने में आपका योगदान सराहनीय है ...सार्थक आलेख।

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  15. ईश्वर , धर्म व विश्वास की अवधारणा एवं चमत्कार व --अन्धविश्वास में अन्तर है..
    -- ६वीं मन्जिल से गिरने पर भी बच्चे का बचजाना चमत्कार है जिसमे ईश्वर के सिवाय किसी व्यक्ति का हाथ नहीं..
    ..भभूत आदि निकालना हाथ की सफ़ाई है जो विग्यान का चमत्कार है.
    ...६ वर्ष के बच्चे या किसी बच्ची( अभी हाल की घटना है समाचार पत्र की सुर्खी में) द्वारा पुनर्जन्म का किस्सा बताना या कागज़ पर लिखे संख्याओं को सही सही बता देना व कठिनतम गुणा भाग आदि को तुरन्त बता देना मानव मन/ बुद्धि का चमत्कार है, अतीन्द्रिय शक्ति..
    अन्यथा तमाम बाबा लोग ढोंगी ही हैं---
    ---ज्योतिष--विग्यान की भांति अनुमान प्रमाण है...

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  16. बहुत ही अच्छा और प्रशंसनीय लेख.
    आपकी यही बात हमें बहुत अच्छी लगती है.

    मुझ में और मेरे दोस्त में ये बहस बहुत बार छिड़ जाती है, तो वो कहने लगता है, चल योगेश एक रात हम कब्रिस्तान में चल कर सोते हैं. :)
    हालाँकि मैं भी भूत प्रेत पर यकीन तो नहीं करता हूँ, मगर जाने क्यों, उसकी चुनौती को खुल कर नहीं accept कर पाता. सोचता हूँ, अगर घर पर बताया तो हंगामा हो जायेगा. :)

    वैसे जान कर बहुत खुशी हुई, कि आपने अंधविश्वासो को हर कदम पर चुनौती दी है. आज भी देखता हूँ तो शादी के लिए, मांगलिक लोग, मांगलिक साथी ही चाहते हैं.

    For this post of yours...

    I must say

    BEST POST OF TASLIIM...

    SUPER DUPER LIKE...

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  17. @जाकिर भाई

    अन्धविश्वास को खतम करने में आपका योगदान सराहनीय है ...सार्थक आलेख

    कुमार राधारमण जी का कमेन्ट मेरा भी कमेन्ट मान लीजियेगा

    देखिये दोस्तों , मुझे लगता है बात चल रही है आधुनिक काल की और इस काल में सारे सब्जेक्ट [विज्ञान , ज्योतिष ] संदिग्ध ही नजर आएँगे | हाँ ...अगर प्राचीन काल में जाएँ तो हर चीज कोम्बिनेशन में मिलेगी |
    भारतीय युवाओं की स्थिति तो अब हास्याद्पद ही है क्योंकि ना तो हमें हमारे छोटे मोटे रिचुअल्स के पीछे छिपा साइंस पता है ना हम अपने आप को विकसित विचारधारा का मानने से चूकना चाहते हैं उदाहरण के तौर पर मैंने एक पोस्ट लिखी थी, ये मुझे तब लिखनी पड़ी जब मुझे लगा की बड़ी संख्या में युवाओं को नाक छिदवाने के पीछे के सही कारण का भी पता नहीं .. गौर करें वे कारण भी जो साइंस सिद्द कर चुका है , तो हम युवा इतने बड़े कन्सेप्ट्स [पुनर्जन्म , सम्मोहन , ज्योतिष ] पर हम एक राय कैसे कायम कर सकते हैं ?

    ये पोस्ट आप यहाँ पढ़ सकते हैं

    http://my2010ideas.blogspot.com/2010/11/blog-post_25.html

    जवाब देंहटाएं
  18. @जाकिर भाई

    सभी सब्जेक्ट्स के कम्बीनेशन से मेरा इशारा इस तरह के रिचुअल्स की ओर है

    "शरद पूर्णिमा को आसमान से अमृत बरसता है"

    सुनने में एक दम से लगता है की इसका क्या मतलब है ? :)

    लेकिन इस बात से लगभग सभी पक्ष सहमत नजर आते हैं

    शरद पूर्णिमा के दिन सभी ग्रह की आवृत्ति एक हो जाती है। इससे पृथ्वी में आंतरिक कंपन होने से वृक्ष, पौधों और बीजों पर अनुकूल असर पड़ता है|

    ( पीपल्स फॉर एग्रीकल्चर एंड ग्लोबल एजुकेशन एंड इनवायरमेंट के डायरेक्टर समीर जी )

    शरद पूर्णिमा के वक्त कास्मेटिक ऊर्जा बढ़ जाती है, इसका प्रभाव, वनस्पति और कृषि पर सकारात्मक रहता है।

    (पर्यावरणविद् विनीत भटनागर)

    शरदपूर्णिमा के दिन मध्यरात्रि को चंद्रकिरणों से ‘अमृत’ बरसता है। वनस्पति में भी चंद्रकिरणों से अमृतरूपी वर्षा होती

    (डॉ. नारायणदत्त शास्त्री)

    अब ये बात अलग है की कोई इसे लेकर नयी अवधारणा बना दे और उसके गलत साबित होने पर हम इसे मानना भी छोड़ दें

    {विषयांतर लगे तो मेरे कमेंट्स हटा दीजियेगा }

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  19. सच में अच्छी पोस्ट है
    जिनका कमेन्ट मैं पढने आया था वो यहाँ आये ही नहीं
    निराशा हुयी

    जवाब देंहटाएं
  20. प्रवीण शाह जी .. चिकित्‍सा शास्‍त्र एक विज्ञान है , पर लाखों लोगों के अथक परिश्रम और खरबों डॉलर खर्च के बाद क्‍या वह सब सवालों का जबाब दे सकता है ?? क्‍या मैं खून के सैम्‍पल भेजूं , तो वह बता सकता है कि वह खून जिसका है , वह पुरूष है या महिला ?? मृत या जीवित ??


    एक जानकार के भरोसे यह बात छोड देनी चाहिए कि वह क्‍या बता सकता है। एक महीने पूर्व मैने 6 और 7 दिसंबर की तारीख को मौसम बदलने का जिम्‍मेदार बताया था और इन दोनो दिनों में बारिश , ठंड और मौसम की गडबडी देशभर में देखने को मिल रही है। तीन वर्षों के ब्‍लॉग लेखन के काल में किसी खास तिथि को मौसम की गडबडी की ऐसी भविष्‍यवाणी बीसेक बार सही हो चुकी है। क्‍या यह ज्‍योतिष को विज्ञान साबित करने के लिए काफी नहीं है ??

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  21. @संगीता पूरी जी,

    अगर ज्योतिष विज्ञान है, तो इसकी भविष्यवाणियों कि पुष्टि होनी चाहिए, और इसे हर बार बिलकुल सटीक भविष्यवाणी करनी चाहिए. अगर कोई १० में से १ सही हो भी जाती है, तो हम उसे विज्ञान नहीं मानते. उसे मात्र एक संयोग कहा जायेगा.

    रही बात आपके द्वारा बीसियों भविष्यवाणियों की, तो हमने तो आज तक आपके द्वारा की गयी भविष्यवाणी, उस घटना के होने से पूर्व नहीं सुनी. हमेशा घटना घटने के बाद ही ये सब बातें प्रकाश में क्यों आती हैं.

    अगर सच में ज्योतिष विज्ञान है, तो आप या और कोई ज्योतिष, इनके challenge को accept करने के लिए क्यों नहीं आगे आता ?

    जवाब देंहटाएं
  22. योगेश जी .. मौसम , शेयर बाजार , भूकम्‍प आदि से संबंधित आनेवाली सूचना मेरे ब्‍लॉग में हर वक्‍त दी गयी होती है .. आप या अपने को वैज्ञानिक मानने वाले मेरे ब्‍लॉग को नहीं पढा करते तो इसमें मेरा क्‍या दोष ??

    जवाब देंहटाएं
  23. @Sangeeta ji,

    यहाँ मैं आपसे २ बातें कहना चाहूँगा. यदि ऐसी बात है, कि आप ज्योतिष से शेयर बाजार को पहले ही भांप सकती हैं, तो आप तो अब तो एक मश'हूर हस्ती बन चुकी होती.

    चलिए आप एक संख्या बताइए, ३-४ दिन तक, जिस पर सेंसेक्स बंद होगा. और वो बिलकुल सटीक होनी चाहिए. और उसे इस ब्लॉग पर पोस्ट करवाइए.
    ताकि यहाँ के पाठक भी उस भविष्यवाणी को देख सकें.

    और दूसरी बात का जवाब नहीं दिया आपने, कि आप अब्राहम टी कोवुर की चुनौती क्यों क़ुबूल नहीं करती ?

    जवाब देंहटाएं
  24. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  25. योगेश जी, आपकी तरह ही भारतवर्ष के सारे लोग इंतजार कर रहे होंगे कि .. मैं मशहूर हस्‍ती बन जाऊं .. तब ही वे मेरे ज्ञान को मानेंगे .. पैसे जमा कर रही हूं .. पासपोर्ट भी तैयार करवा रही हूं .. कोई विदेशी संस्‍था मान्‍यता दे दे .. तो शायद भारत में मशहूर हस्‍ती बन जाऊं।

    रहा सवाल अब्राहम टी कोवूर की चुनौती स्‍वीकार करने का .. तो मैं पहले ही स्‍पष्‍ट कर चूकी हूं .. वे प्रश्‍न मेरे अनुकूल नहीं है .. और आपका प्रश्‍न भी वैसा ही है .. आप एक संख्या बताइए, ३-४ दिन तक, जिस पर सेंसेक्स बंद होगा. और वो बिलकुल सटीक होनी चाहिए.. जबकि शेयर बाजार के बारे में मेरी भविष्‍यवाणी यह है .. कि यह 20 दिसंबर 2010 तक लगातार कमजोर होता जाएगा .. 13 दिसंबर तक तक मेटल सेक्‍टर के शेयरों में .. 16 दिसंबर तक बैंकिंग के शेयरों में .. तथा 20 दिसंबर तक सभी शेयरों में बडी घटत दिखाई पडेगी .. पर उसके बाद शेयर बाजार में कुछ सुधार आरंभ होगा .. 28 दिसंबर से 5 जनवरी 2011 के मध्‍य बाजार में बडी तेजी देखने को मिलेगी .. अब 5 जनवरी के बाद ही आपकी बातों का जबाब दूंगी।

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  26. @Sangeeta ji,

    वैसे इस तरह तो सेंसेक्स को आंकना, analysts भी कर लिया करते हैं, आपने अलग किया किया.

    इस तरह की broad भविष्यवाणी, subject की अच्छी knowledge रखने वाला कोई भी कर सकता है. पर फिर भी, आपकी भविष्यवाणी को चेक किया जाएगा. और २ तारिख के बाद ही बात की जायेगी :)

    जवाब देंहटाएं
  27. योगेश जी .. मुझे अबतक शेयर बाजार जैसे सब्‍जेक्‍ट के बारे में कोई जानकारी नहीं .. मैने पूरी व्‍याख्‍या मात्र ज्‍योतिषीय आधार पर की है .. यहां तक कि मेरी रूचि भी शेयर बाजार में तब हुई जब इसपर ग्रहों का प्रभाव पडते देखा .. धन्‍यवाद !!

    जवाब देंहटाएं
  28. "आधुनिक विज्ञान" अपनी योग्यता साबित कर पाए या ना कर पाए .... फिलहाल "ज्योतिष" का पलड़ा भारी नजर आ रहा है :)

    वैसे बाकी की बची बातों पर मेरी एक पोस्ट प्रकाशित होगी ... पढना मत भूलियेगा :)

    जवाब देंहटाएं
  29. बहुत ही अच्छा और प्रशंसनीय लेख.

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  30. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  31. Sangeeta ji,
    ab kahiye aap kya kehti hain apni prediction ke baare mein

    9-dec=-454
    10-dec=+266.53
    11-dec=SATURDAY
    12-DEC=SUNDAY
    13-dec=+182
    14-dec=+107
    15-dec=-151
    16-dec=+217
    17-dec=Moharram
    18-dec=Saturday
    19-dec=Sunday
    20-dec=+24

    Sensex closed on 19242 on 9th Dec 2010

    and it closed on 19888 on 20th Dec 2010.

    So there is a net increase also.

    आपकी भविष्यवाणी गलत साबित हुई.
    क्या अब भी आप कहेंगी कि जिस तरीके से आपने ये गणना की थी, वो तरीका सेंसेक्स की सटीक भविष्यवाणी कर सकता है ??

    आपकी टिपण्णी का इंतज़ार है.

    जवाब देंहटाएं
  32. मैने पहले ही कहा था .. अब 5 जनवरी के बाद ही आपकी बातों का जबाब दूंगी !!

    जवाब देंहटाएं
  33. sangeeta ji,

    Leejiye, 5 tareek bhi aa gayii..
    aur ye raha data...
    ab aap khud hi dekh leejiye,


    date change closed at
    6-dec 19981
    7-dec -47 19934
    8-dec -238 19696
    9-dec -454 19242
    10-dec 266.53 19508
    11-dec
    12-dec
    13-dec 182 19691
    14-dec 107 19799
    15-dec -151 19647
    16-dec 217 19864
    17-dec moharram
    18-dec sat
    19-dec sun
    20-dec 24 19888
    21-dec 171 20060
    22-dec -44 20015
    23-dec -32.92 19982
    24-dec 90 20073
    25-dec saturday
    26-dec sunday
    27-dec -45 20028
    28-dec -3.5 20025
    29-dec 230 20256
    30-dec 133 20389
    31-dec 120 20509
    1-jan sat
    2-jan sun
    3-jan 51 20561
    4-jan -62 20498
    5-jan -197 20301


    I hope, i don't need to clarify now.

    जवाब देंहटाएं
  34. जाकिर जी .. आप मेरी टिप्‍पणी क्‍यूं नहीं प्रकाशित कर रहे हैं .. योगेश जी की टिप्‍पणी के जबाब में मैने कल ही आपको यह टिप्‍पणी भेजी थी ....

    योगेश जी, जैसा कि पहली टिप्‍पणी में मैने 20 दिसंबर से बाजार के सुधरने और 28 दिसंबर से 2 जनवरी के मध्‍य सेंसेक्‍स के महत्‍वपूर्ण जगह में होने के बारे में कहा था और बाजार में वैसा ही माहौल देखने को मिला , 28 दिसंबर से 2 जनवरी क्‍या , 3 जनवरी तक किसी भी दिन और किसी भी समय बाजार पिछले दिन के स्‍तर से नीचे नहीं गया , सेंसेक्‍स 673 प्‍वाइंट सुधरा। शेयर बाजार पर ग्रहों का प्रभाव स्‍वयं सिद्ध हो जाता है। पूरे महीने में कहीं भी लगातार 12 दिन तक इतने प्‍वाइंट्स का सुधार आप नहीं दिखा सकते। ताज्‍जुब है कि इसके बाद भी आप मुझसे जबाब मांग रहे हैं।
    हां , 3 से 5 के मध्‍य भी कुछ ग्रहों की ठीक ठाक स्थिति को देखते हुए मैने बाद की टिप्‍पणी में 5 दिसंबर तक सेंसेक्‍स के मजबूत बने होने की बात करते हुए पिछली टिप्‍पणी को मिटा भी दिया था। वह योग उतना काम न कर सका , जिसका मुझे खेद भी है। पर जिस तरह विज्ञान को मानने वाले जीएसएलवी-एफ06 राकेट में एक तकनीकी खराबी आ जाने के कारण प्रक्षेपण के तत्काल बाद इस अभियान के विफल होने पर उसकी पा्रमाणिकता पर प्रश्‍न चिन्‍ह नहीं लगाएंगे , वैसे ही यदि मस्तिष्‍क पूर्वाग्रह से ग्रस्‍त न हो तो ज्‍योतिष की इस छोटी सी भूल को महत्‍व नहीं दिया जा सकता । यहां तक कि मोल तोल के इस आलेख में मैने 29 दिसंबर को मेटल सेक्‍टर और 31 दिसंबर को बैंकिंग सेक्‍टर में बढत का दावा किया था और ताज्‍जुब की बात है कि वैसा ही देखने को मिला।

    रही बात 20 दिसंबर के पहले के बाजार की , जो आपकी नजर में सकारात्‍मक इसलिए लगी , क्‍यूंकि आपने 9 दिसंबर के अंत के बाजार से इसकी तुलना की , जबकि ग्रहों के हिसाब से बाजार में गिरावट 7 दिसंबर से ही शुरू हो चुकी थी । 6 दिसंबर के बाजार से 20 दिसंबर के बाजार की तुलना करें , तो बाजार कमजोर दिखेगा। दूसरी बात यह कि आप जो भी आंकडे लेकर हमारे सामने आए , वो बाजार बंद होने के समय के आंकडे थे। 7 दिसंबर से 20 दिसंबर तक शेयर बाजार दिनभर ऋणात्‍मक हुआ करता था , अधिकांश दिन अंत भी ऋणात्‍मक हुआ करता था , पर किसी किसी दिन शेयर के सस्‍ते होने के कारण अंत में कुछ खरीदारी हो जाने से बाजार का स्‍तर बढ जाया करता था , पर 20 दिसंबर तक वैसी ही अनिश्चितता बरकरार थी , जैसा इधर दो तीन दिनों से दिखाई दे रही है। आप शेयर बाजार से अच्‍छी तरह जुडे किसी भी सज्‍जन से बात करके देख लें।

    अंत में एक खास बात यह कहना चाहूंगी कि किसी व्‍यक्ति के स्‍वास्‍थ्‍य में आयी गडबडी को देखने के लिए एक डॉक्‍टर शरीर का तापमान , हृदय की धडकन , रक्‍त चाप या अन्‍य तरह के आंकडों को देखता है , पर एक अच्‍छे मनोचिकित्‍सक का इन आंकडों से अधिक संबंध नहीं होता , वह किसी मरीज के दिल से जुडकर ही उसका इलाज कर सकता है। ज्‍योतिषी का कार्यक्षेत्र भी एक मनोचिकित्‍सक की हर क्षेत्र के लोगों के मनोभाव को समझना और उसका समाधान निकालना है । करोडों का बैलेंस रखनेवाला व्‍यक्ति भी धन की कमी महसूस कर सकता है और सामान्‍य खाते पीते घर का व्‍यक्ति भी धन के मामले में सुखी हो सकता है। किसी परीक्षा को थर्ड डिवीजन पास करनेवाला बच्‍चा भी दोस्‍तों को पार्टी दे सकता है और फर्स्‍ट डिवीजन पास करनेवाला व्‍यक्ति भी प्रतिशत कम आने को सोंचकर मातम मना सकता है। इसलिए ज्‍योतिष को इस प्रकार के बेमतलब सवालों में मत उलझाइए।

    जवाब देंहटाएं
  35. जाकिर जी .. आप मेरी टिप्‍पणी क्‍यूं नहीं प्रकाशित कर रहे हैं .. योगेश जी की टिप्‍पणी के जबाब में मैने कल ही आपको यह टिप्‍पणी भेजी थी ....

    योगेश जी, जैसा कि पहली टिप्‍पणी में मैने 20 दिसंबर से बाजार के सुधरने और 28 दिसंबर से 2 जनवरी के मध्‍य सेंसेक्‍स के महत्‍वपूर्ण जगह में होने के बारे में कहा था और बाजार में वैसा ही माहौल देखने को मिला , 28 दिसंबर से 2 जनवरी क्‍या , 3 जनवरी तक किसी भी दिन और किसी भी समय बाजार पिछले दिन के स्‍तर से नीचे नहीं गया , सेंसेक्‍स 673 प्‍वाइंट सुधरा। शेयर बाजार पर ग्रहों का प्रभाव स्‍वयं सिद्ध हो जाता है। पूरे महीने में कहीं भी लगातार 12 दिन तक इतने प्‍वाइंट्स का सुधार आप नहीं दिखा सकते। ताज्‍जुब है कि इसके बाद भी आप मुझसे जबाब मांग रहे हैं।
    हां , 3 से 5 के मध्‍य भी कुछ ग्रहों की ठीक ठाक स्थिति को देखते हुए मैने बाद की टिप्‍पणी में 5 दिसंबर तक सेंसेक्‍स के मजबूत बने होने की बात करते हुए पिछली टिप्‍पणी को मिटा भी दिया था। वह योग उतना काम न कर सका , जिसका मुझे खेद भी है। पर जिस तरह विज्ञान को मानने वाले जीएसएलवी-एफ06 राकेट में एक तकनीकी खराबी आ जाने के कारण प्रक्षेपण के तत्काल बाद इस अभियान के विफल होने पर उसकी पा्रमाणिकता पर प्रश्‍न चिन्‍ह नहीं लगाएंगे , वैसे ही यदि मस्तिष्‍क पूर्वाग्रह से ग्रस्‍त न हो तो ज्‍योतिष की इस छोटी सी भूल को महत्‍व नहीं दिया जा सकता । यहां तक कि मोल तोल के इस आलेख में मैने 29 दिसंबर को मेटल सेक्‍टर और 31 दिसंबर को बैंकिंग सेक्‍टर में बढत का दावा किया था और ताज्‍जुब की बात है कि वैसा ही देखने को मिला।

    रही बात 20 दिसंबर के पहले के बाजार की , जो आपकी नजर में सकारात्‍मक इसलिए लगी , क्‍यूंकि आपने 9 दिसंबर के अंत के बाजार से इसकी तुलना की , जबकि ग्रहों के हिसाब से बाजार में गिरावट 7 दिसंबर से ही शुरू हो चुकी थी । 6 दिसंबर के बाजार से 20 दिसंबर के बाजार की तुलना करें , तो बाजार कमजोर दिखेगा। दूसरी बात यह कि आप जो भी आंकडे लेकर हमारे सामने आए , वो बाजार बंद होने के समय के आंकडे थे। 7 दिसंबर से 20 दिसंबर तक शेयर बाजार दिनभर ऋणात्‍मक हुआ करता था , अधिकांश दिन अंत भी ऋणात्‍मक हुआ करता था , पर किसी किसी दिन शेयर के सस्‍ते होने के कारण अंत में कुछ खरीदारी हो जाने से बाजार का स्‍तर बढ जाया करता था , पर 20 दिसंबर तक वैसी ही अनिश्चितता बरकरार थी , जैसा इधर दो तीन दिनों से दिखाई दे रही है। आप शेयर बाजार से अच्‍छी तरह जुडे किसी भी सज्‍जन से बात करके देख लें।

    अंत में एक खास बात यह कहना चाहूंगी कि किसी व्‍यक्ति के स्‍वास्‍थ्‍य में आयी गडबडी को देखने के लिए एक डॉक्‍टर शरीर का तापमान , हृदय की धडकन , रक्‍त चाप या अन्‍य तरह के आंकडों को देखता है , पर एक अच्‍छे मनोचिकित्‍सक का इन आंकडों से अधिक संबंध नहीं होता , वह किसी मरीज के दिल से जुडकर ही उसका इलाज कर सकता है। ज्‍योतिषी का कार्यक्षेत्र भी एक मनोचिकित्‍सक की हर क्षेत्र के लोगों के मनोभाव को समझना और उसका समाधान निकालना है । करोडों का बैलेंस रखनेवाला व्‍यक्ति भी धन की कमी महसूस कर सकता है और सामान्‍य खाते पीते घर का व्‍यक्ति भी धन के मामले में सुखी हो सकता है। किसी परीक्षा को थर्ड डिवीजन पास करनेवाला बच्‍चा भी दोस्‍तों को पार्टी दे सकता है और फर्स्‍ट डिवीजन पास करनेवाला व्‍यक्ति भी प्रतिशत कम आने को सोंचकर मातम मना सकता है। इसलिए ज्‍योतिष को इस प्रकार के बेमतलब सवालों में मत उलझाइए।

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  36. मेरी टिप्‍पणी कहां गयी ??

    जवाब देंहटाएं
  37. संगीता जी, एक सप्‍ताह से बाहर होने के कारण (एक सप्‍ताह से पुरानी पोस्‍ट पर मॉडरेशन लगा होने के कारण) आपकी टिप्‍पणियां प्रकाशित नहीं हो सकी थीं।

    जवाब देंहटाएं
  38. आपने कहा था : यह 20 दिसंबर 2010 तक लगातार कमजोर होता जाएगा

    हुआ ये : 10-dec को बाजार 266 पॉइंट ऊपर गया, 13-dec को बाजार 182 पॉइंट ऊपर गया, 14-dec को बाजार 107 पॉइंट ऊपर गया, 16-dec को बाजार 217 पॉइंट ऊपर गया.

    इस पर तो आपकी भविष्यवाणी, मुझे सही नहीं लगती....

    आपने कहा था : 28 दिसंबर से 5 जनवरी 2011 के मध्‍य बाजार में बडी तेजी देखने को मिलेगी

    मुझे नहीं लगता के ३ दिनों में 600 पॉइंट बढ़ना कोई बहुत बड़ी तेज़ी है.

    जवाब देंहटाएं
  39. 8-dec se lekar 31-dec tak sensex lagatar badhta rhaa,

    you can verify that at the following links..

    and just fill in the dates and see the graphs.

    http://www.moneycontrol.com/sensex/bse/sensex-live

    जवाब देंहटाएं
  40. योगेश जी,
    मैं ऐसा नहीं मानती कि दुनिया के हर जड चेतन पर सिर्फ ग्रहों का ही प्रभाव पडता है .. मैं मानती हूं कि दुनिया के हर जड चेतन में ग्रहों का भी प्रभाव पडता है .. 5 जनवरी से मात्र 6 दिनों में सेंसेक्‍स में 1340 प्‍वाइंट्स की कमजोरी आयी .. दुनियाभर के शेयर , सोने और चांदी के भाव इस दौरान भरपूर गिरें .. विश्‍वभर की अर्थव्‍यवस्‍था में एक दबाब था .. पर वह वातावरण मेरे दिए गए बढत की तिथियों यानि लगभग 20 दिसंबर 2010 से लेकर 5 जनवरी 2011 तक उपस्थित नहीं हुआ .. भले ही मेरे कहे अनुरूप बहुत बडी बढत नहीं हुई .. पर खीचंतान कर भी सेंसेक्‍स 600 प्‍वाइंट्स के लगभग बढता ही रहा .. क्‍यूंकि उस वक्‍त की ग्रहस्थिति शेयर बाजार की ऋणात्‍मकता दिखाने के मूड में नहीं थी .. आप माने या न माने मुझे कोई फर्क नहीं पडता .. मैं ज्‍योतिष के क्षेत्र में किए जानेवाले अपने रिसर्च को नहीं रोक सकती !!

    जवाब देंहटाएं
  41. rajnish ji, very very incredible post, andhvishwas per apka yeh lekh bahut hi lajvaab hai. jakir ji apki is prastuti ka main murid hun.Iss dumdaar post ke liye abhaar!!

    जवाब देंहटाएं
  42. किसी भी विषय पर आलोचना वही कर सकता है, जो उस विषय को बहुत गहरे तह तक जानता हो, अगर आपको ईश्वर के विषय पर पूर्ण ज्ञान है तभी उनके वजूद के विषय में अपना विचार/तर्क व्यक्त कर सकते हैं, अगर आप कहते हैं ईश्वर नहीं है, चमत्कार नहीं होता है, तो इसका मतलब यह है की आप ब्रह्माण्ड के रहस्य को पूर्णतः जानते हैं, जैसे एक सब्जी खाने वाले और बनाने वाले को पूर्ण ज्ञान होता है की सब्जी में नमक तत्त्व पाया जाता है, जिसने जीवन में कभी सब्जी खाया ही नहीं वह तो कहेगा की सब्जी में नमक पाया ही नहीं जाता,
    अतः किसी भी विषय पर आलोचना करना मूर्खता पूर्ण कार्य है, अपने कमजोर मानसिकता को अपने नजर में दूर करने के कार्य को आलोचना करना कहते हैं, ईश्वर है की नहीं, ज्योतिष की सच्चाई क्या है, इसके विषय पर आलोचनात्मक विचार व्यक्त करने के लिए इस विषय पर गहन चिंतन करें, अगर इस जन्म में संभव ना हो तो १००० बार जन्म लें, आपकी समस्या का समाधान हो जाएगा, संभवतः मेरे लेख आपलोगों को आपतिजनक लगा हो अतः मैं तहे दिल से क्षमा चाहता हूँ, जिस तरह आपलोगों को मेरे लेख तकलीफदेह लगे ठीक उसी तरह धर्म, चमत्कार, ईश्वर के विषय में आपके विचार मुझे लगे, रही बात खुद को चमत्कारी पुरुष कहलाने वालों के विषय में आपके विचार है उसपर मेरे विचार आपसे सहमत है, क्योंकि अद्जल गगरी छलकत जाए

    जवाब देंहटाएं
  43. किसी भी विषय पर आलोचना वही कर सकता है, जो उस विषय को बहुत गहरे तह तक जानता हो, अगर आपको ईश्वर के विषय पर पूर्ण ज्ञान है तभी उनके वजूद के विषय में अपना विचार/तर्क व्यक्त कर सकते हैं, अगर आप कहते हैं ईश्वर नहीं है, चमत्कार नहीं होता है, तो इसका मतलब यह है की आप ब्रह्माण्ड के रहस्य को पूर्णतः जानते हैं, जैसे एक सब्जी खाने वाले और बनाने वाले को पूर्ण ज्ञान होता है की सब्जी में नमक तत्त्व पाया जाता है, जिसने जीवन में कभी सब्जी खाया ही नहीं वह तो कहेगा की सब्जी में नमक पाया ही नहीं जाता,
    अतः किसी भी विषय पर आलोचना करना मूर्खता पूर्ण कार्य है, अपने कमजोर मानसिकता को अपने नजर में दूर करने के कार्य को आलोचना करना कहते हैं,

    जवाब देंहटाएं
वैज्ञानिक चेतना को समर्पित इस यज्ञ में आपकी आहुति (टिप्पणी) के लिए अग्रिम धन्यवाद। आशा है आपका यह स्नेहभाव सदैव बना रहेगा।

नाम

अंतरिक्ष युद्ध,1,अंतर्राष्‍ट्रीय ब्‍लॉगर सम्‍मेलन,1,अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी ब्लॉगर सम्मेलन-2012,1,अतिथि लेखक,2,अन्‍तर्राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन,1,आजीवन सदस्यता विजेता,1,आटिज्‍म,1,आदिम जनजाति,1,इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी,1,इग्‍नू,1,इच्छा मृत्यु,1,इलेक्ट्रानिकी आपके लिए,1,इलैक्ट्रिक करेंट,1,ईको फ्रैंडली पटाखे,1,एंटी वेनम,2,एक्सोलोटल लार्वा,1,एड्स अनुदान,1,एड्स का खेल,1,एन सी एस टी सी,1,कवक,1,किंग जार्ज मेडिकल कॉलेज,1,कृत्रिम मांस,1,कृत्रिम वर्षा,1,कैलाश वाजपेयी,1,कोबरा,1,कौमार्य की चाहत,1,क्‍लाउड सीडिंग,1,क्षेत्रीय भाषाओं में विज्ञान कथा लेखन,9,खगोल विज्ञान,2,खाद्य पदार्थों की तासीर,1,खाप पंचायत,1,गुफा मानव,1,ग्रीन हाउस गैस,1,चित्र पहेली,201,चीतल,1,चोलानाईकल,1,जन भागीदारी,4,जनसंख्‍या और खाद्यान्‍न समस्‍या,1,जहाँ डॉक्टर न हो,1,जादुई गणित,1,जितेन्‍द्र चौधरी जीतू,1,जी0 एम0 फ़सलें,1,जीवन की खोज,1,जेनेटिक फसलों के दुष्‍प्रभाव,1,जॉय एडम्सन,1,ज्योतिर्विज्ञान,1,ज्योतिष,1,ज्योतिष और विज्ञान,1,ठण्‍ड का आनंद,1,डॉ0 मनोज पटैरिया,1,तस्‍लीम विज्ञान गौरव सम्‍मान,1,द लिविंग फ्लेम,1,दकियानूसी सोच,1,दि इंटरप्रिटेशन ऑफ ड्रीम्स,1,दिल और दिमाग,1,दिव्य शक्ति,1,दुआ-तावीज,2,दैनिक जागरण,1,धुम्रपान निषेध,1,नई पहल,1,नारायण बारेठ,1,नारीवाद,3,निस्‍केयर,1,पटाखों से जलने पर क्‍या करें,1,पर्यावरण और हम,8,पीपुल्‍स समाचार,1,पुनर्जन्म,1,पृथ्‍वी दिवस,1,प्‍यार और मस्तिष्‍क,1,प्रकृति और हम,12,प्रदूषण,1,प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड,1,प्‍लांट हेल्‍थ क्‍लीनिक,1,प्लाज्मा,1,प्लेटलेटस,1,बचपन,1,बलात्‍कार और समाज,1,बाल साहित्‍य में नवलेखन,2,बाल सुरक्षा,1,बी0 प्रेमानन्‍द,5,बीबीसी,1,बैक्‍टीरिया,1,बॉडी स्कैनर,1,ब्रह्माण्‍ड में जीवन,1,ब्लॉग चर्चा,4,ब्‍लॉग्‍स इन मीडिया,1,भारत के महान वैज्ञानिक हरगोविंद खुराना,1,भारत डोगरा,1,भारत सरकार छात्रवृत्ति योजना,1,मंत्रों की अलौकिक शक्ति,1,मनु स्मृति,1,मनोज कुमार पाण्‍डेय,1,मलेरिया की औषधि,1,महाभारत,1,महामहिम राज्‍यपाल जी श्री राम नरेश यादव,1,महाविस्फोट,1,मानवजनित प्रदूषण,1,मिलावटी खून,1,मेरा पन्‍ना,1,युग दधीचि,1,यौन उत्पीड़न,1,यौन शिक्षा,1,यौन शोषण,1,रंगों की फुहार,1,रक्त,1,राष्ट्रीय पक्षी मोर,1,रूहानी ताकत,1,रेड-व्हाइट ब्लड सेल्स,1,लाइट हाउस,1,लोकार्पण समारोह,1,विज्ञान कथा,1,विज्ञान दिवस,2,विज्ञान संचार,1,विश्व एड्स दिवस,1,विषाणु,1,वैज्ञानिक मनोवृत्ति,1,शाकाहार/मांसाहार,1,शिवम मिश्र,1,संदीप,1,सगोत्र विवाह के फायदे,1,सत्य साईं बाबा,1,समगोत्री विवाह,1,समाचार पत्रों में ब्‍लॉगर सम्‍मेलन,1,समाज और हम,14,समुद्र मंथन,1,सर्प दंश,2,सर्प संसार,1,सर्वबाधा निवारण यंत्र,1,सर्वाधिक प्रदूशित शहर,1,सल्फाइड,1,सांप,1,सांप झाड़ने का मंत्र,1,साइंस ब्‍लॉगिंग कार्यशाला,10,साइक्लिंग का महत्‍व,1,सामाजिक चेतना,1,सुपर ह्यूमन,1,सुरक्षित दीपावली,1,सूत्रकृमि,1,सूर्य ग्रहण,1,स्‍कूल,1,स्टार वार,1,स्टीरॉयड,1,स्‍वाइन फ्लू,2,स्वास्थ्य चेतना,15,हठयोग,1,होलिका दहन,1,‍होली की मस्‍ती,1,Abhishap,4,abraham t kovoor,7,Agriculture,7,AISECT,11,Ank Vidhya,1,antibiotics,1,antivenom,3,apj,1,arshia science fiction,2,AS,26,ASDR,8,B. 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Scientific World: ...उन्‍होंने टोने-टोटकों, तंत्र-मंत्र और जादुई शक्तियों के द्वारा मुझे हजार बार नष्‍ट किया।
...उन्‍होंने टोने-टोटकों, तंत्र-मंत्र और जादुई शक्तियों के द्वारा मुझे हजार बार नष्‍ट किया।
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