बलात्‍कार का मनोविज्ञान (Psychology of rape): एक परिचर्चा

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पिछले दिनों रचना जी की ‘नौकरानी से बलात्‍कार’ सम्‍बंधी पोस्‍ट पढ़ कर मन काफी व्‍यथित हुआ था। जैसे-जैसे समय बीतता गया, यह विषय मन में घुमड़...


पिछले दिनों रचना जी की ‘नौकरानी से बलात्‍कार’ सम्‍बंधी पोस्‍ट पढ़ कर मन काफी व्‍यथित हुआ था। जैसे-जैसे समय बीतता गया, यह विषय मन में घुमड़ता रहा और धीरे-धीरे मन इतना बेचैन हो गया कि इस पर एक लम्‍बी श्रृंखला लिखने का विचार बन गया।

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार बलात्‍कार एक मानसिक समस्‍या है, जिसके सूत्र उसके बचपन में छिपे हुए होते हैं। लेकिन सामाजिकों और विद्वानों की राय इससे इतर हो सकती है। इसलिए मैंने सोचा कि इस विषय पर कुछ भी लिखने से पहले क्‍यों न पाठकों की राय ली जाए। इसी उददेश्‍य से आयोजित है यह परिचर्चा।

आपकी नज़र में बलात्‍कार क्‍या है?
कोई इतना नीचे कैसे गिर जाता है कि बलात्‍कार जैसी घटना करने पर उतारू हो जाता है?
बलात्‍कार पीडित स्‍त्री समाज की प्रताडना का शिकार क्‍यों होती है?
जैसे-जैसे समाज आगे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे समाज में ऐसी घटनाएं क्‍यों बढ़ती जा रही हैं?
इस तरह की घटनाएं जितनी गांवों और कस्‍बों में होती हैं, उससे ज्‍यादा घटनाएं आज नगरों और महानगरों में क्‍यों हो रही हैं?
बलात्‍कार से निपटने के लिए सरकारी एवं सामाजिक स्‍तर पर क्‍या प्रयास होने चाहिए?
क्‍या बलात्‍कार पीडिता को किसी तरह का मुआवज़ा मिलना चाहिए?
बलात्‍कारी के लिए क्‍या सज़ा होनी चाहिए? इस सम्‍बंध में बलात्‍कारी के प्रति समाज की क्‍या भूमिका होनी चाहिए?

कृपया प्रतिक्रिया में ‘बहुत अच्‍छा प्रयास है’ अथवा ‘आपके इस प्रयास की जितनी प्रशंसा की जाए कम है’ जैसी टिप्‍पणियां न करें और खुले मन से अपने विचार बताने का कष्‍ट करें।

COMMENTS

BLOGGER: 27
  1. मेरे विचार से पहले तो समाज और न्यायालय को यह तय करना चाहिए कि किससे बलात्कार करना चाहिए और किससे नहीं।
    यहां तो हर वक्त हर किसी के मन के कोने में एक बलात्कारी छिपा बैठा रहता है। यह बलात्कारी छिपकर ही अपनी इच्छाओं की पूर्ति करता रहता है। अब देखते हैं यहां इस सच को कितने और कहां तक स्वीकार कर पाते हैं।

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  2. बेनामी7/10/2009 12:29 pm

    जाकिर बहुत शुक्रिया बात को यहाँ इस प्रकार से कहने
    के लिये . प्रक्रियाए क्या आयेगी जरुर पढना चाहुगी
    बस वो ना कहा जाए जो अब तक सुनते आ रहे हैं
    की बलात्कार के लिये औरत के कपडे जिम्मेदार हैं .
    और अंशुमाली की बात से भी सहमति हैं क्युकी
    "बलात्कार" का अर्थ बहुत व्यापक हैं . यहां तो हर वक्त हर किसी के मन के कोने में एक बलात्कारी छिपा बैठा रहता है। यह बलात्कारी छिपकर ही अपनी इच्छाओं की पूर्ति करता रहता है।

    पोस्ट का लिंक भी देते तो कुछ और लोग नारी ब्लॉग पर
    उस पोस्ट को पढ़ते . शुक्रिया जाकिर

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  3. इस विषय पर किये गये अपराध के बारे में मैं यह कहूंगा कि कुछ अपराध एक अलग श्रेणी में आते हैं और उनका निर्धारित दण्‍ड बहुत ही कम है क्‍योंकि उनका वर्तमान परिद़श्‍य में आंकलन नहीं करिये, उनके दूरस्‍थ परिणाम देखिये। बची हुई जिन्‍दगी, मौत से बदतर जीने पर मजबूर कर देता है यह क़त्‍य उस औरत को जिसके साथ यह किया गया हो। इसलिये इस तरह के जो भी अपराध हैं उनकी पुन- व्‍याख्‍या कर इनके निर्धारित दण्‍ड को कई गुना बढा देना चाहिये। जहां तक बलात्‍कार का सवाल है तो इसके लिये मत्‍युदण्‍ड का निर्धारण किया जाना चाहिये। कुछ मामलों में यह स्थितिवश भी हो जाता है पर अगर उसके लिये कोई अलग प्राविधान कर शिथिलता दी गयी तो प्रत्‍येक प्रभावी व्‍यक्ति उस शिथिलता(कमजोरी) का फायदा उठाकर बच निकलेगा। अब समय आ गया है कि कुछ बोल्‍ड व कडे कदम उठाये जायें क्‍योंकि मानवतावादी द़ष्टिकोण अपनाते हुये अगर बलात्‍कार में स्थितियों को देखा गया तो कोई न कोई कडी बलात्‍कारी के पक्ष में जरूर निकल आयेगी और बलात्‍कारी बच निकलेगा। पीडित औरत को समाज किस तरह स्‍वीकारता है यह आप और हम बखूबी जानते हैं, इसलिये दण्‍ड का भय ही इस अपराध को रोक सकता है और कुछ नहीं।

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  4. आपकी नज़र में बलात्कार क्या है?
    - किसी की इच्छा के विपरीत उससे जबरिया कोई काम लेना बलात्कार है.

    कोई इतना .नीचे कैसे गिर जाता है कि बलात्कार जैसी घटना करने पर उतारू हो जाता है?
    -- यह मनुष्य की पृष्ठ भूमि के आधार पर निर्मित उसके चरित्र और मानसिकता पर निर्भर है.

    बलात्कार पीडित स्त्री समाज की प्रताडना का शिकार क्यों होती है?
    - यह पुरुष प्रधान समाज की मानसिकता के कारण होता है. वास्तव में ऐसी स्त्री सहानुभूति की पात्र है.

    जैसे-जैसे समाज आगे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे समाज में ऐसी घटनाएं क्यों बढ़ती जा रही हैं?
    -अनेक कारणों से आज का समाज अधिक हिंसक हो गया है. बलात्कार भी हिंसा का एक रूप है.

    इस तरह की घटनाएं जितनी गांवों और कस्बों में होती हैं, उससे ज्यादा घटनाएं आज नगरों और महानगरों में क्यों हो रही हैं?
    - नगरों और महानगरों में गावों और कस्बों की अपेक्षा अधिक कारक मौजूद हैं, जिनमें से उच्छ्रिन्खालता और स्वच्छंदता भी एक कारक है.

    बलात्कार से निपटने के लिए सरकारी एवं सामाजिक स्तर पर क्या प्रयास होने चाहिए?
    - सरकार तो केवल कानून बनाना, उसे पालन करवाना और बलात्कारी को दंड दिलाने का कार्य कर सकती है.लेकिन सरकार का अपने तंत्र पर नियंत्रण नहीं है.इसी कारण थाने में भी महिला पर बलात्कार होने की सम्भावना बनी रहती है. समाज बहुत कुछ कर सकता है, लेकिन आज समाज में समाज सुधारक नेतृत्व का अभाव है.इस लिए अधिक उम्मीद नहीं की जा सकती.

    क्या बलात्कार पीडिता को किसी तरह का मुआवज़ा मिलना चाहिए?
    - मेरी समझ में इस तरह हुई हानि की पूर्ति किसी मुआवजे से नहीं की जा सकती.

    बलात्कारी के लिए क्या सज़ा होनी चाहिए? इस सम्बंध में बलात्कारी के प्रति समाज की क्या भूमिका होनी चाहिए?
    - सजा तो कड़ी से कड़ी होनी चाहिए. मैं तो मृत्यु दंड तक की अनुशंसा करूंगा.लेकिन वर्तमान व्यवस्था में यह भी संभव है कि कोई निर्दोष सजा पा जाये और दोषी मुक्त हो जाए. इस लिय सजा के निर्धारण का कार्य विशेषज्ञों द्वारा किया जाना चाहिए.समाज में ऐसे बलात्कारी का ही नहीं वरन सारे ही अपराधियों का बहिष्कार किया जाना चाहिए,लेकिन व्यवहार में ऐसा है नहीं.असरदार अपराधी का कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता.

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  5. ।)मेरी नजर में बलात्‍कार कि‍सी स्‍त्री की मर्जी के बि‍ना कि‍या गया यौन शोषण है।
    2)कोई पुरूष बलात्‍कार के लि‍ए इसलि‍ए सोच लेता है कि‍ उस समाज में, उस देश में इस कुकृत्‍य के लि‍ए जो सजा है,वह कारगर नहीं है और सजा दि‍लाने की प्रक्रि‍या भी काफी लंबी है।
    3) बलात्‍कारपीडित स्‍त्री समाज की प्रताडना का शिकार इसलि‍ए होती है क्‍योंकि क्‍योंकि‍ हमारे समाज में यौन शुचि‍ता को धर्म का दर्जा दि‍या गया है और इसी की आड़ में स्‍त्री को सदि‍यों से प्रताडि‍त कि‍या गया है।
    4) जैसे-जैसे समाज आगे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे समाज में ऐसी घटनाएं इसलि‍ए बढ़ती जा रही हैं, क्‍योंकि‍ स्‍वाधीन होती स्‍त्रि‍यों को रोकने का कोई उपाय पुरूषों को नजर नहीं आ रहा है।
    5) चूँकि‍ शहरों में स्‍त्रि‍यॉं अधि‍क स्‍वतंत्र नजर आती है इसलि‍ए वहॉं ये घटनाऍं ज्‍यादा नजर आ रही हैं।
    6) बलात्‍कार से निपटने के लिए फास्‍ट ट्रैक अदालत होने चाहि‍ए।
    7)वैसे तो कि‍सी मुआवज़े से उसकी खोई अस्‍मत को लौटाई नहीं जा सकती, फि‍र भी बलात्‍कार पीडि‍ता को सरकारी नौकरी देकर उसे सामाजि‍क नि‍र्वासन से बचाने के उपाय ढ़ूँढ़ने चाहि‍ए।
    8) अगर बलात्‍कार साबि‍त हो जाए(जो काफी जटि‍ल प्रक्रि‍या है) तो उसे नि‍संदेह फॉंसी की सजा या उम्रकैद होनी चाहि‍ए।

    8.1) बलात्‍कारी के प्रति पुरूष-समाज की क्‍या भूमिका होनी चाहिए, यह उतना महत्‍वपूर्ण प्रश्‍न नहीं है, यह प्रश्‍न न्‍यायालय के लि‍ए है। अगर पुरूष-समाज को अपनी भूमि‍का तलाशनी है तो वह सबसे पहले अपने घर की स्‍त्रि‍यों की इज्‍जत करना सीखे। अगर घर में इज्‍जत देगा तो बाहर कि‍सी दूसरी स्‍त्री की इज्‍जत से खि‍लवाड़ नहीं करेगा।

    साथ ही स्‍त्रि‍यों को भी बलात्‍कार पीड़ि‍ता को कोसने के बजाए साथ खड़े होकर अन्‍याय का प्रति‍कार करना चाहि‍ए।

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  6. सभी सजा देने पर ऊतारू है किसी ने भी अभी तक कारण नही लिखा ? बलात्कार होते क्यो है, क्या कारण है....अगर हम ने कुछ लिखा तो लोग अनामी बन कर आना शुरु हो जायेगे, ओर अपने घर पर मोटा सा ताला लगा देगे,

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  7. @रचना जी, आपकी उस पोस्ट को खोज नहीं पाने के कारण उसका लिंक नहीं दिया जा सका।
    @राज जी, आप खुलकर अपने विचार लिखें। "तस्लीम" पर बेनामी टिप्पणियों की अनुमति नहीं है। जिसे जो कहना हो, अपनी पहचान के साथ ही कह सकता है।

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  8. जो कपडों और लड़कियों के व्यवहार को दोष देते हैं वो तो सरासर गलत है. एक गलत काम का गलत कारण. अनुरागजी ने कुछ दिनों पहले कहीं एक टिपण्णी की थी 'आज सुबह से मैंने जींस पहना है मुझे तो किसी ने नहीं छेडा?'

    बाकी मनोवैज्ञानिक कारण तो कहीं न कहीं होंगे ही. और जरूर इस पर विस्तृत अध्ययन भी हुए होंगे. कुछ जर्नल खंगालने होंगे इसके लिए.

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  9. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  10. मैं इस विषय पर ज्यादा विशेषज्ञता की बातें तो नहीं करूँगा मगर समस्या के मूल की ओर इशारा करने का प्रयास जरुर करूँगा. पहले ग्रामीण, छोटे मोहल्लों या संयुक्त परिवारों में हम - आप स्त्री के कई रूपों से परिचित होते थे. एक ही महिला पूरे सोसाइटी की बहन, बेटी, मौसी और भी पता नहीं क्या-क्या होती थी. मगर धीरे-धीरे एकल परिवारों के प्रचलन, बच्चों के व्यक्तित्व विकास में समयाभाव में अभिभावकों की घटती भूमिका, और इस अभाव की पूर्ति करता आक्रामक उपभोक्तावाद, जिसने नारी के कुछ करीबी रिश्तों को छोड़ (वो भी यदि ध्यान रहे!) उसे मात्र एक शरीर और उपभोक्ता सामग्री के रूप में ला खडा किया, जिसे यह नई जेनरेशन उपभोग में लाने को सदा तत्पर है. इस समस्या को समाजशास्त्रीय और पारिवारिक परिप्रेक्ष्य में देखते हुए यदि बच्चों को शुरू से ही नारी के प्रति सम्मान की किताबी नहीं (शास्त्रों में तो नारी का देवी रूप आदि तो सभी को रटा हुआ है) व्यावहारिक शिक्षा दी जाये तो इस समस्या के मूल पर ही; आंशिक ही सही मगर रोकथाम संभव है.

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  11. आपकी नज़र में बलात्कार क्या है? // कोई इतना नीचे कैसे गिर जाता है कि बलात्कार जैसी घटना करने पर उतारू हो जाता है?

    -बलात्कार एक ऐसा जघन्य अपराध है जो मुख्यतः स्त्रियों के साथ पुरुषों द्वारा अपने बल का दुरुपयोग करके अपनी हवस को मिटाना या अपनी उच्च जाति, उच्च स्तर का दुरुपयोग करके निम्न स्तर-निम्न जाति की महिला के साथ जबरन यौन सम्बन्ध बनाना और एक आम बात समझ कर की यह कुछ कर नहीं पायेगी और मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ पायेगा या अपने ही परिवार की किसी बच्ची, महिला के साथ बहलाकर-फुसलाकर, जबरन यौन सम्बन्ध बनाना और उसे डरना धमकाना और ये सोचना की बात परिवार की है तो मैं बच जाऊंगा..या की मनोविकृति वाले व्यक्ति द्वारा किसी महिला के साथ जबरन यौन सम्बन्ध बनाना, या ऐसा व्यक्ति जिसने कबी किसी के साथ यौन सम्बन्ध न बनाये हों और वो मानसिक रूप से इतना दूषित हो जाये की ये किसी महिला के साथ जबरन यौन सम्बन्ध बना ले, इत्यादि ...इन सबको बलात्कार की श्रेणी में रखा जाता है

    बलात्कार पीडित स्त्री समाज की प्रताडना का शिकार क्यों होती है?
    -
    क्योंकि वर्षों से इस समाज का निर्माण पुरुषों द्वारा अपने हक़ में किया गया है और वही मानसिकता विकसित करते गए कि अगर बलात्कार हुआ है तो चलो गलत बात है लेकिन फिर ये गलत लांछन लगाना कि स्त्री कि गलती होगी और वो अपवित्र हो गयी ....

    जैसे-जैसे समाज आगे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे समाज में ऐसी घटनाएं क्यों बढ़ती जा रही हैं?
    -क्योंकि पुरुषों कि मानसिकता और समाज के विकसित होने के साथ साथ जैसे जैसे खुलापन आया तो पुरुषों कि मानसिकता और दूषित होती गयी...साथ ही साथ..पॉर्न विडियो, फिल्में और ऐसे काम करने के बाद सजा ना मिल पाना और दोषी का समाज में खुले घूमना और उसे सामान्य तौर पर स्वीकार कर लेना ...जबकि स्त्री को दोषी ठहरा देना

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  12. इस तरह की घटनाएं जितनी गांवों और कस्बों में होती हैं, उससे ज्यादा घटनाएं आज नगरों और महानगरों में क्यों हो रही हैं?
    -अगर मानकर भी चलें कि गाँव में घटनाएं कम हैं तो उसका कारण ये हो सकता है कि वहाँ ऐसी मानसिकता वालों को मौका कम मिलता है ...और स्त्रियों को स्वतंत्रता पूर्वक इतना नहीं घूमने दिया जाता...लेकिन वहां भी अगर ऐसी मानसिकता वालों को मौका मिलता है तो वो ये अपराध करने से नहीं चूकते ...और गाँव के लोगों को न्याय मिलने में बहुत देर होती है या न्याय मिलता ही नहीं ...अगर किसी के परिवार में ऐसा होता है तो ज्यादातर वारदातें छुपा ली जाति हैं ....शहर में खुलापन...ऐसी मानसिकता वालों को मौका मिल जाता है..या वो अपने कार्यालय में अपने पद का या अपने बल का दुरुपयोग करने का मौका मिल जाता है...तो वो इससे चूकते नहीं या घर के सदस्य द्वारा भी ऐसा गलत काम कर दिया जाता है...

    बलात्कार से निपटने के लिए सरकारी एवं सामाजिक स्तर पर क्या प्रयास होने चाहिए?
    -सरकारी स्तर पर पुलिस व्यवस्था दुरुस्त हो, ऐसी सजा दी जाए कि दोषी की हालत देखकर किसी अन्य ऐसी मानसिकता वाले व्यक्ति की रूह तक काँप जाए.....विद्यालयों में एक ठीक आयु से सही और गलत काम के बारे में बताया जाए ...और उनके साथ ऐसा कुछ न हो पाए इस बारे में भी समझाया जाए....परिवार के लोग अपने बच्चों पर ध्यान दें ...अच्छी मानसिकता विकसित की जाए ...पुरुष और महिलाओं को बराबर समझा जाए...ऐसी मानसिकता विकसित हो

    क्या बलात्कार पीडिता को किसी तरह का मुआवज़ा मिलना चाहिए?
    - ये कोई आगजनी, लूटमार, सूखा, बाढ़ जैसी बात नहीं जो कि मुआवजे की बात की जाए....हाँ बस एक ही बात है कि अगर मान लो कि किसी के साथ ये हादसा होता है तो उसे दोषी न समझा जाये..उससे भद्र व्यवहार किया जाए... और अच्छी नज़रों से देखा जाए

    बलात्कारी के लिए क्या सज़ा होनी चाहिए? इस सम्बंध में बलात्कारी के प्रति समाज की क्या भूमिका होनी चाहिए?
    -वैसे ऐसा होता नहीं लेकिन फिर भी अगर कोई बलात्कार के दोष में पकडा जाता है और दोषी पाया जाता है तो उसे ऐसी सजा देनी चाहिए कि वो तो जिंदगी भर उसे भुगते ही, याद रखे...साथ ही साथ उसकी हालत देखकर किसी अन्य ऐसी मानसिकता वाले व्यक्ति कि ऐसा करने की हिम्मत न हो ...

    उसे समाज में जिस तरह से सामान्य रूप में लिया जाता है वो न लिया जाये ...जैसे कि उसकी तो धूम धड़के से शादी होती है ...वो ऐश करता है वगैरह वगैरह ....

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  13. वैसे तो रस्तोगी जी और हेम पान्डे जी की बात ने काफी कुछ स्पष्ट कर दिया है फिर भी हम बहुत बडी बडी बाते न कह्कर इतना ही कहेगे कि बलात्‍कारी की बलात्‍कार करने की तीन तरह की मन:स्थिती होती है
    1 . बलात्‍कारी असामाजिक है सामाजिक मुल्यो ,कर्तव्य से वह हमेशा बहुत दूर रहा है और बलात्‍कार या क्रुरता उसका स्वभाव बन गया है
    2. बलात्‍कारी सामाजिक है दबंग है और् पद ,धन या शक्ति के बल पर अपनी इच्छापूर्ती करता है
    3.बलात्‍कारी वास्तव मे बलात्‍कारी नही है बलात्‍कार करना उसके मेनू मे नही था लेकिन अवचेतन मे पडी इच्छा और मानसिक संतुलन और आत्म नियंत्रण का छणिक आभाव बलात्‍कारी बना रहे है

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  14. बहुत ही उत्तम पोस्ट की है यह आपने...
    मीत

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  15. यह मनो रोग ,अतृप्त यौन कुंठा ,जबरदस्ती पौरुष साबित करने का पागलपन है .इसमें कोई शक नहीं कि यह एक पाशविक कृत्य है,मानवीय कतई नहीं .

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  16. nishchay hi apne jwalant vishay par charcha shuru ki hai - purush manas main naari jati ke prati bhogya bhav he is paap pravrati ko uksaata hai. ab to rishton ka maryada bhi nahin rah gayee hai. meri nazar main balatkaari to daya ka patra ho nahin sakta. saare balatkar manasik vikrati kee shreni main nahin aate. Takat ka khel jyaada hai bhale wah takat
    paise ki pad ki shareerik bal ke
    ya vishesh paristhiti kee heekyon
    na ho. Mrityu dand bhi
    saarvajanik ho to bhale kuch baat bane.

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  17. nishchay hi apne jwalant vishay par charcha shuru ki hai - purush manas main naari jati ke prati bhogya bhav he is paap pravrati ko uksaata hai. ab to rishton ka maryada bhi nahin rah gayee hai. meri nazar main balatkaari to daya ka patra ho nahin sakta. saare balatkar manasik vikrati kee shreni main nahin aate. Takat ka khel jyaada hai bhale wah takat
    paise ki pad ki shareerik bal ke
    ya vishesh paristhiti kee heekyon
    na ho. Mrityu dand bhi
    saarvajanik ho to bhale kuch baat bane.

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  18. आप बलात्कार को ही विषय क्यों बनाया,इस पर चर्चा भी करना मानवता के साथ अपराध है ,मेरा बस चले तो मैं बलात्कारी को जिन्दा न रहने दूं .

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  19. आपकी पोस्ट ने मुझे उस स्त्री की याद दिला दी जो कुछ दिन पहले मुझे अपनी कहानी सुना के गयी थी ....न जाने कितनी देर मेरा दिमाग संज्ञाशुन्य हो गया था ...पत्नी की इच्छा के विरूद्व पति का अमानुषिक संबंध भी बलात्कार कहलाता है ....वह स्त्री २० वर्षों से उसका अत्याचार ko सह रही है ....मैंने जब सुना तो रोंगटे खडे हो गए ...वह उसे कपडे उतरवा कर हाथ ऊपर कर नंगी खडा करवा देता है ....हाथ अगर नीचे करे तो मार पड़ती है ....इससे भी असहनीय अत्राचार जो लिखने योग्य नहीं ....मेरी आखो में आंसू छलक आये हैं ....उस स्त्री को यह भी डर है उसकी जवान होती बेटी कहीं उसका शिकार न बन जाये ....लेकिन दुभाग्य देखिये ....वह स्त्री मेरे लाख समझाने पर भी अपने पति के खिलाफ थाने में रिपोर्ट लिखाने के लिए तैयार नहीं हुई ....शायद अब उसमें साहस ही नहीं बचा था ...वह आधी तो मर ही चुकी थी ...

    अब आपका सवाल की पुरुष ऐसा क्यों करता है ....? इस कहानी से क्या लगता है ...एक तो उसे परिवेश वैसा मिला ...दुसरे नशा ...कुछ पीछे का पारिवारिक माहौल भी वैसा था ....इन सब का शिकार हुई स्त्री ....!

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  20. जब तक हमारा समाज मे कुटुंब निवास करते थे जब तक ये समस्या बहुत ही कम थी ,और जो भी थी वो सिर्फ मन मे दंड के भय न होने के कारन थी , अब ये कुटुंब क्या है , मतलब जब एक नव सर्जित जीवन लड़के के रूप मे इस धरा पर आता था तो उसे अपने पास हर वक़्त दादा दादी , ताऊ ताई , चाचा चची , बुआ , मौसी , बहन , और न जाने कितने रिस्तो का बंधन मिलता था , जिस से उसे जीवन के हर मोडे पर हर जरूरी बात किसी न किसी रिश्ते से जानकारी के रूप मे मिल जाती थी , सभी के द्वारा मिला ममत्व भरा वातावरण उसे नारी के सब रूपों से परिचित करा देती थी , वो नारी का सम्मान करना सिख जाता था , बचपन मे मिला ये वक्तित्व निर्माण उस के आगामी जीवन पर बहुत ही गहरा परभाव छोड़ता था , लकिन अब जमाना बदल रहा है जहा पर हम दो और सिर्फ हमारे दो का नारा है , साथ मे हर कमरे में एक बुधु बक्सा भी है , जिस के पीछे सरकारी नियंतार्ण मुक्त केबल नाम का तार लगा हुआ है , जहा पर स्त्री को सिर्फ और सिर्फ एक भोग की वस्तु के रूप मे २३ घंटे पेश किया जा रहा है , जो हमारे अवचेतन मन मे कही न कही ये बिठा रही है की स्त्री को सिर्फ भोगा जाना चाहए , अब जब भी उस व्यक्ति को अपने अनुकूल माहौल मिलता है तो वो अवचेतन मन अचानक ही चेतना से भरपूर हो कर सिर्फ अपनी हवस को पूरा करना चाहता है , और मौके के साथ पूरा भी कर लेता है , इस मे कमी हमारे न्याय व्यवस्था की भी है , जह इंसाफ मिलना चाँद तोड़ कर लाने जैसा है

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  21. बलात्कार एक मानसिक विकृति के आलावा और क्या हो सकता है .

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  22. इसका ज्ञान तो मनुष्य को स्वयम् होता है की क्या अच्छा है और क्या बुरा हम अधिक से अधिक आने वाली पीढ़ियों को सुधार सकते है.परन्तु जो विकृत हो चुके है उनके लिए तो बस सज़ा और मनोवैज्ञानिक सलाह ही है.

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  23. बहुत अच्‍छा प्रयास है, आपके इस प्रयास की जितनी प्रशंसा की जाए कम है!

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  24. विशद क्षेत्र, ज्वलँत विषय और सीमित स्थान
    फिर भी.. यह तो निर्विवादित है कि,
    यह एक मनोविकार है, जो दबी हुई कुँठा दँभ और हिंसा एवँ प्रतिशोध के मिले जुले ब्लेन्ड से उपजती है !
    परिवेश इसका ईधन और परिस्थितियाँ इसकी उत्प्रेरक हैं !
    ( एबनार्मल साइकोलोज़ी इन मार्डन लाइफ़ - जेम्स कोलमैन )


    गौरतलब है कि, यह शब्द केवल लैंगिक सँदर्भों तक सिमट कर रह गया है !
    बलात = बलपूर्वक, ऽकार = उपयोग किये जाना
    इसी परिभाषा को लेकर कानून यह प्राविधान देता है कि, यदि पत्नी के सहमति के बिना सँभोग किया जाता है,
    तो वह भी दँडनीय अपराध है, पर ऎसा होता है क्या ? यही कृत्य यदि परस्त्री के सँग राजी खुशी चलता रहे, तो ?
    बलात्कार नये सिरे से परिभाषित किये जाने की आवश्यकता है !

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  25. आपने एक बहुत ही एहम मुद्दे को लेकर लिखा है! बलात्कार आख़िर क्यूँ होता है? मैं तो ये समझती हूँ कि ये एक मानसिक रोग है जो कभी ख़त्म न होने की सम्भावना है! बलात्कारी को सिर्फ़ और सिर्फ़ एक ही सज़ा मिलनी चाहिए और वो है फांसी कि सज़ा तब जाकर कुछ तबदीली आयेगी!

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  26. बेनामी12/14/2011 5:40 pm

    आपकी नज़र में बलात्‍कार क्‍या है?
    किसी भी स्‍त्री की इच्‍छा के विरूद्ध किसी पुरूष के द्वारा आपराधिक बल का प्रयोग कर संभोग का किया जाना बलात्‍कार की श्रेणी में आता है।
    कोई इतना नीचे कैसे गिर जाता है कि बलात्‍कार जैसी घटना करने पर उतारू हो जाता है?
    उस समय की देश-काल-परिस्थितियां और पुरूष की विकृत मानसिकता बलात्‍कार जैसी घिनौनी घटना के लिए बाध्‍य कर देती है।

    बलात्‍कार पीडित स्‍त्री समाज की प्रताडना का शिकार क्‍यों होती है?
    अपनी बात स्‍पष्‍ट रूप से समाज के सामने सही मंच पर नहीं रख पाती है यदि स्‍त्री सही फोरम पर अपनी बात को रखेगी तो देश के कानून स्‍त्री के पक्ष में ही रहेगा।

    जैसे-जैसे समाज आगे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे समाज में ऐसी घटनाएं क्‍यों बढ़ती जा रही हैं?
    काल्‍पनिक लोक में विचरण करने वाले पुरूषों की संख्‍या बहुत ज्‍यादा हो गई है, वे यह समझते हैं कि जिस स्‍त्री पर बलात शक्ति का प्रयोग किया जा रहा है वह उसके अनैतिक कार्य में सहयोग कर सकती है।

    इस तरह की घटनाएं जितनी गांवों और कस्‍बों में होती हैं, उससे ज्‍यादा घटनाएं आज नगरों और महानगरों में क्‍यों हो रही हैं?
    यह सत्‍य नहीं है मानसिक रूग्‍णता बहुत बढ गई है सभी ओर इसका बोलबाला है ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं स्‍त्रीयों के प्रकरण न्‍यायालय के समक्ष नहीं पहुंचते हैं। अन्‍यथा नगरों और ग्रामांे की स्थिति एक समान है।
    बलात्‍कार से निपटने के लिए सरकारी एवं सामाजिक स्‍तर पर क्‍या प्रयास होने चाहिए?
    बलात्‍कार की शिकार महिला को किसी अलग द़ष्टि से नहीं देखा जाना चाहिये अन्‍यथा समाज के सभी वर्ग के लोगों को तिरस्‍कार सहना पड सकता है। देश के कानून इतने अधिक सक्षम है कि उसमें किसी भी त्रुटि को छांटना मुश्किल है। जिस स्‍त्री के साथ बलात्‍कार हुआ है यदि वह चाहे तो केवल स्‍वयं की साक्ष्‍य के आधार पर ही अपराधी को दोष सिद्ध करवा सकती है।
    क्‍या बलात्‍कार पीडिता को किसी तरह का मुआवज़ा मिलना चाहिए?
    नहीं इससे नकली प्रकरणों की बाढ आ सकती है। हां यदि ऐसी परिस्थ्‍ितियां निर्मित होती हैं कि पीडित महिला को धन की आवश्‍यकता न्‍याय पाने के लिए है तो उसे उपलब्‍ध करवाया जाना चाहिये।
    बलात्‍कारी के लिए क्‍या सज़ा होनी चाहिए? इस सम्‍बंध में बलात्‍कारी के प्रति समाज की क्‍या भूमिका होनी चाहिए?
    प्रत्‍येक प्रकरण में यह अलग अलग हो सकती है यदि किसी बलात्‍कारी पुरूष ने किसी महिला के साथ बलात्‍कार किया और वह उसके साथ जीवन व्‍यतीत करना या विवाह करना चाहता है तो पीडिता की सहमति से उभय पक्ष के मध्‍य राजीनामा किया जा सकता है। यदि किसी प्रकरण की स्थिति ऐसी है कि पीडिता उसे व्‍यक्ति को कठोर सजा दिये जाने के पक्ष में अपनी राय प्रकट करती है तो न्‍यायालय को कठोर सजा दिये जाने के बारे में मन बना लेना चाहिये ताकि वह निर्णय एक नजीर बन सके।

    अनिल कुमार मिश्र, मनोवैज्ञानिक

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  27. बेनामी10/04/2017 10:41 pm

    balatkar ka mukhya karan hamari purush pradhan sanskruti.jo mahilao ko kamjor samajati hai

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वैज्ञानिक चेतना को समर्पित इस यज्ञ में आपकी आहुति (टिप्पणी) के लिए अग्रिम धन्यवाद। आशा है आपका यह स्नेहभाव सदैव बना रहेगा।

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Scientific World: बलात्‍कार का मनोविज्ञान (Psychology of rape): एक परिचर्चा
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