विज्ञान कथा-सुपरनोवा का रहस्य (लेखिका-अर्शिया अली)

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Supernova ka Rahasya : A Popular Hindi Science Fiction

यह कहानी सद्य प्रकाश‍ित विज्ञान कथा संग्रह 'सुपरनोवा का रहस्य' की शीर्षक रचना है, जोकि आइसेक्ट यूनिवर्सिटी, भोपाल द्वारा संचालित आईसेक्ट पब्लिकेशन से प्रकाश‍ित हुआ है। संग्रह में समकालीन विज्ञान कथाकारों की 18 श्रेष्ठ विज्ञान कथाएं संकलित हैं। संग्रह का मूल्य रू0 200 है। इसे प्राप्त करने के लिए आईसेक्ट पब्लिकेशन, स्कोप कैम्पस, एन एच-12, होशंगाबाद रोड, मिसरोड से आगे, भोपाल-462047 से सम्पर्क किया जा सकता है।

सुपरनोवा का रहस्य

अर्शिया अली

नियॉन अपनी पत्नी कैट के साथ रात का डिनर कर रहा था। उसकी पत्नी ने आज उसका मनपसंद खाना छोले भटूरे और बिरयानी बनायी थी। आज पूरे बीस दिनों बाद वह नासा प्रयोगशाला से एक दिन की छुट्टी पर अपने घर आया था। नियॉन के आगे उसका मनपसंद खाना था, लेकिन उसका दिमाग अब भी नासा में चल रहे शोध में लगा हुआ था। यह देख कर कैट ने उसे टोक दिया, ‘आप इतने दिनों के बाद घर आए हैं और ठीक से खाना भी नहीं खा रहे। प्लीज़, खाना तो आराम से खा लीजिए, ...फिर मुझे आपसे ढ़ेर सारी बातें करनी हैं।’

यह सुनकर नियॉन एकदम से चौंक पड़ा। वह अपनी पत्नी की ओर देख कर मुस्कराया।

कैट पुन: बड़बड़ाई, ‘एक दिन का तो रेस्ट है। परसों से फिर आप होंगे और आप की प्रयोगशाला...।’

नियॉन इस बार भी कुछ नहीं बोला। उसने अपनी प्लेट थोड़ा पास सरकाया और फिर चुपचाप खाना खाने लगा। 

Supernova ka Rahasya : Hindi Science Fiction Collection
नियॉन नासा का एक प्रसिद्ध खगोल वैज्ञानिक है। वह पिछले काफी समय से स्पित्जर दूरबीन और व्यापक अवरक्त सर्वे अन्वेषक (डब्यूआइएसई) द्वारा 2000 साल पुराने सुपरनोवा के रहस्य को ढ़ूँढने की कोशिश में लगा हुआ है। इस दिशा में नियॉन और उसके साथियों ने दिन-रात एक कर दिया है। वे किसी भी कीमत पर इस रहस्य का पर्दाफाश करना चाहते हैं। इसी से आजकल नियॉन थोड़ा चिंतित रहने लगा था। लेकिन उसे यकीन था वह और उसका ग्रुप जल्दी ही कामयाब होंगे। इस दिशा में बस थोड़े से और परिश्रम की ज़रूरत है।

अगले दिन सुबह 8 बजे कैट ने नियॉन को गरम-गरम चाय के साथ जगाया। वह इस वक्त काफी ताज़गी महसूस कर रहा था। वह गुड मार्निंग कहता हुआ उठा और ब्रश करने के लिए कमरे से सटे बाथरूम की ओर बढ़ गया। 

ब्रश करने के बाद जैसे ही नियॉन ने चाय का कप हाथ में लिया, उसका बेटा जॉन दौड़ता हुआ आ गया। वह अधिकारपूर्वक अपने पिता की गोद में घुस कर बैठ गया।
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जॉन अभी 3 साल का है। वह अपने घर पर पिता को बहुत मिस करता है। इसीलिए जब भी उसके पिता आते हैं, वह एक क्षण भी उनसे दूर नहीं रहता।

‘डैड, आप कैसे हैं?’ जॉन ने मुस्करराकर पूछा। लेकिन बिना जवाब की प्रतीक्षा किए वह फिर बोल उठा, ‘आप हमारे साथ सारे दिन रहिएगा, मुझे आपके साथ बहुत सारे गेम खेलने हैं।’

यह सुनकर नियॉन मुस्करा उठा। उसने जल्दी से अपनी चाय खत्म की और जॉन से बोला, ‘चलो, अभी से खेलने चलते हैं। ..आज हम लोग दिन भर मस्तीे करेंगे।’

खेल-खेल में दिन कब बीत गया, कुछ पता नहीं चला। नियॉन के जाने का समय हो आया। उसे विदा करते समय जॉन उदास हो गया और कैट की आँखें भर आईं। लेकिन उन लोगों ने अपने जज्बातों पर नियंत्रण किया और नियॉन को मुस्कराकर विदा किया।

कैट और जॉन को प्यार करने के बाद नियॉन नासा मुख्याालय की ओर चल पड़ा। इस एक दिन की छुट्टी ने उसके भीतर इतना जोश भर दिया था कि वह महीनों तक बिना थके हुए अपना काम कर सकता था, अपने शोध कार्य को सम्पन्न कर सकता था। 

नियॉन के पहुँचते ही उसके साथी वैज्ञानिकों ने उसे विश किया और खुशखबरी सुनाई कि सुपरनोवा के बारे में कुछ और बातें पता चली हैं, जिससे हम लक्ष्य के काफी करीब पहुँच गये हैं। यह सुनकर नियॉन बहुत खुश हुआ और अपने कक्ष की ओर चल दिया।

185 ईस्वी में चीन के खगोलविदों ने आसमान में एक मेहमान सितारे को देखा था, जो रहस्यमयी तरीके से दिखाई दिया और लगभग 8 माह तक चमकता रहा। वैज्ञानिकों ने अपने अध्ययन के द्वारा सन 1960 तक यह जान लिया था कि वह रहस्मयी पिण्ड और कुछ नहीं इंसान द्वारा पहली बार दर्ज किया गया सुपरनोवा था।

हम जानते हैं कि सभी तारे एक प्रकार के सूर्य होते हैं, जिनके भीतर परमाणु ईंधन लगातार जलता रहता है। उनके भीतर मौजूद द्रव्यराशि बहुत ज्यादा होती है, जिसके दाब से तारों का आंतरिक ताममान बहुत अधिक बढ़ जाता है। इस वजह से तारे के भीतर मौजूद विभिन्न प्रकार के परमाणु अपना रूप बदलने लगते हैं। इस बदलाव के दौरान उनसे बहुत सारी ऊर्जा मुक्त होती है। यही ऊर्जा ताप या विकिरण के द्वारा धरती तक पहुँचती है।

आमतौर से तारों में हाइड्रोजन तत्व अधिक होता है। यह अत्यधिक दाब और ताप पर हीलियम में बदल जाता है। ऐसा तब भी होता है, जब हाइड्रोजन बम फटता है। लेकिन तारे में यह प्रक्रिया बहुत बड़े स्तर पर होती है। इसलिए एक तारे की ऊर्जा को अरबों-खरबों हाइड्रोजन बमों से निकली हुई ऊर्जा के बराबर माना जा सकता है।

जब तारों के भीतर का ईधन एक सीमा से अधिक घट जाता है, तो वह फूल कर बड़ा होने लगता है। ऐसे में उसकी गुरूत्वाकर्षण शक्ति काफी बढ़ जाती है और वह अपने आसपास स्थित ग्रहों को अपने भीतर खींचने लगता है।

धीरे-धीरे तारे के भीतर का एक प्रकार का ईंधन समाप्त हो जाता है। फिर वह दूसरे प्रकार के ईंधन का प्रयोग करने लगता है। ऐसी दशा में तारे सिकुड़ने लगते हैं। इससे परमाणु खण्डित होकर प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन में बदल जाते हैं। उनसे बनी द्रव्यराशि ‘प्लाज्मा’ के नाम से जानी जाती है। ऐसी स्थिति में पहुँचने पर तारा ‘सफेद बौना तारा’ कहलाता है।

अपनी मृत्यु की ओर बढ़ता हुआ तारा इसके बाद भी तेजी से बदलता रहता है। अपने आंतरिक बदलावों के कारण इस अवस्थाय में वह तेजी से सिकुड़ने लगता है। बहुत ज्यादा सिकुड़ जाने के बाद तारे में विस्फोट हो जाता है और उसके अंदर के पदार्थ अंतरिक्ष में फैल जाते है। तारे की इस दशा को ही ‘सुपरनोवा’ कहा जाता है।

185 ईसवी में धरती पर जो आश्चर्यजनक पिण्ड देखा गया था, वैज्ञानिकों ने उसका नाम आरसीडब्यूफोट-86 रखा था। बाद में यह पता चला कि वह और कुछ नहीं पृथ्वी से 8000 प्रकाश वर्ष दूर स्‍ि‍थत एक सुपरनोवा का अवशेष ही था, जोकि काफी विशाल था। लेकिन यह एक पहेली ही थी कि‍ सितारे के गोलाकार अवशेष उम्मी्द से कहीं बड़े क्यों थे? 

नियॉन और उसकी टीम ने जब स्पित्जर अंतरिक्ष दूरबीन और व्यापक अवरक्त सर्वे अन्वेषक के द्वारा और गहराई से अध्ययन किया, तो उन्हें सुपरनोवा का 2000 साल पुराना रहस्य मिल गया।

चीनी खगोल वैज्ञानिकों ने इस सितारे में विस्फोट होते हुए देखा था। इन नतीजों ने दिखाया कि सितारे में विस्फोट की घटना एक गहरी गुफानुमा जगह पर हुई थी, जिसके कारण सितारे से निकलने वाले अवशेष सामान्‍य से कहीं ज्यादा तेजी से और काफी दूर तक बिखर गये। उत्तरी कैरोलिना विश्वाविद्यालय के खगोल विज्ञानी और दूरबीन की खोज का विवरण देने वाले नये अध्ययन के प्रमुख लेखक ब्रायन विलियम्स, जो नियॉन के ग्रुप में थे, ने कहा कि यह सुपरनोवा अवशेष काफी बड़ा था, काफी तेज था। 2000 साल पहले हुआ यह सुपरनोवा सामान्य सुपरनोवा से दो से तीन गुना बड़ा था।

सुपरनेवा से जुड़े आँकड़ों को देखकर नियॉन खुशी से फूला नहीं समाया। वह तुरन्त नासा के मुख्यालय में स्पित्जर दूरबीन और डब्यूआईएसई कार्यक्रम के वैज्ञानिक बिल डाँची को बताने दौड़ा। यह जानकर वे बहुत खुश हुए कि आखिर उनके ग्रुप ने सुपरनोवा के इस रहस्य को ढ़ूँढ़ निकाला। फिर उन्होंने पूरी दुनिया को बताया कि अंतरिक्ष में हमारी पहुँच को बढ़ा देने वाली अनेक वेधशालाओं की मौजूदगी से हम इस सितारे की मौत के बारे में पूरी तरह सटीक जानकारी दे सकते हैं, हालाँकि हम ब्रह्माण्ड में हो रही इन घटनाओं से चकित हैं।

इस तरह 2000 साल पुराने सुपरनोवा का रहस्य अब रहस्य नहीं रहा था।

इस सफलता के बाद नियॉन पूरे 15 दिनों के रेस्ट के लिए अपने घर चला गया, अपनी कामयाबी सेलिब्रेट करने के लिए और अपने प्यारे बेटे के साथ खूब सारे खेल खेलने के लिए।

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Scientific World: विज्ञान कथा-सुपरनोवा का रहस्य (लेखिका-अर्शिया अली)
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Supernova ka Rahasya : A Popular Hindi Science Fiction
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