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सूर्य की रहस्यमय दुनिया

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सूर्य की रहस्यमय दुनिया पर केंद्रित एक शोधपरक आलेख।

ब्रह्माण्ड क्या है, ये कैसे बना? तारों का जन्म कैसे हुआ? हमारी आकाशगंगा कितनी बड़ी है? और इन्हीं सब से जुडा है सूर्य का रहस्यमय संसार। इसका जन्म कैसे हुआ, इसके भीतर कैसे रहस्य छिपे हुए हैं, यह कब तक यूं ही धधकता रहेगा? आदि इत्यादि। तो आइए, इस महत्वपूर्ण श्रृंखला को आगे बढाते हैं और पढ़ते हैं एक महत्वपूर्ण लेख:
सूर्य : एक आदर्श तारा

-प्रदीप कुमार

जनमानस का एक बड़ा हिस्सा आज भी यह मानता है कि सूर्य आकाश में टंगा हुआ आग का एक विशाल गोला है। यही कारण है कि सूर्य आज भी जनमानस की आस्था का प्रतीक है। जबकि सत्य यह है कि सूर्य एक सामान्य, किन्तु दैनिक जीवन से गहरा सम्बन्ध रखनेवाला अत्यंत महत्वपूर्ण तारा है।

सूर्य को देखकर अक्सर लोगों के दिमाग में यह प्रश्न उठते होंगे कि सूर्य के अंदर कौन-सा ईधन है जो हमेशा जलता रहता है? यह हमसे कितनी दूर है? आखि‍र सूर्य-ग्रहण क्यों होता है? और ये तमाम ग्रह आखि‍र सूर्य की परिक्रमा क्यों करते हैं? और क्या सचमुच सूर्य का भी जन्म हुआ है? और यदि इसका जन्म हुआ है तो इसकी मृत्यु कब होगी?

विज्ञान के विद्यार्थियों के मन में भी ऐसे ही तमाम प्रश्न होते हैं, किन्तु उनकी वैज्ञानिक भाषा में। जैसे कि सूर्य का व्यास कितना है? सूर्य की सतह का तापमान कितना होता है? सूर्य की आंतरिक संरचना कैसी होती है? सौर ज्वालाएँ क्या होती हैं? सौर-कलंक क्या होते हैं? आदि-इत्यादि।
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सूर्य से सम्बंधि‍त प्रश्नों के उत्तर पाने के लिए मानव हमेशा से प्रयासरत रहा है। इसका सुफल यह है कि आज मनुष्य के पास इन तमाम प्रश्नों के सटीक उत्तर उपलब्ध हैं। आइए, हम इन प्रश्नों के उत्तर आधुनिक विज्ञान के नजरिये से जानने का प्रयास करते हैं।

आज हम यह जानते हैं कि सूर्य हमारी आकाशगंगा (Galaxy) में उपस्थित लगभग 200 अरब तारों में से एक सामान्य तारा हैं। हालांकि सूर्य हमें अन्य तारों की तुलना में अधिक प्रकाशमान प्रतीत होता है। इसका कारण यह है कि यह पृथ्वी से अन्य तारों की अपेक्षा अधिक निकट है। किन्तु इसकी इसी निकटता के कारण ही इसे महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है।

हम जानते हैं सूर्य पृथ्वी से लगभग 14,95,98,000 किलोमीटर दूर है। अन्य तारे सूर्य की तुलना में काफी दूर हैं। यही कारण है कि अभी तक पृथ्वी पर मौजूद सबसे शक्तिशाली दूरबीन भी सूर्य के अतिरिक्त किसी अन्य तारे की सतह को नहीं देख पाई है। खगोल वैज्ञानिकों के लिए सूर्य और पृथ्वी के मध्य की इस दूरी का विशेष महत्व है। वैज्ञानिकों ने इसे 'खगोलीय एकक' या 'खगोलीय इकाई' का नाम दिया है। इस 'खगोलीय इकाई' की सहायता से वैज्ञानिक सूर्य की दूरी को 1 मानकर सौरमंडल के अन्य ग्रहों की दूरियां बताते हैं।

इसी से आप समझ सकते हैं कि जब हमारा सबसे निकटतम तारा हमसे इतना दूर है, तो अन्य तारे हमसे कितनी दूर होंगे? यदि हम बाकी तारों की दूरियों को किलोमीटर में निकालने का प्रयास करेंगे, तो हमारे आकलन गडबड़ा जाएंगे। इसीलिए वैज्ञानिकों ने ‘प्रकाश वर्ष’ का पैमाना आविष्कृत किया। हम जानते हैं कि प्रकाश की किरणें एक सेकेंड में लगभग तीन लाख किलोमीटर की दूरी तय करती हैं। इस वेग से प्रकाश-किरणें एक वर्ष में जितनी दूरी तय करती हैं, उसे एक प्रकाश-वर्ष माना जाता है। यही कारण है कि एक प्रकाश-वर्ष 94 खरब, 60 अरब, 52 करोड़, 84 लाख, 5 हजार किलोमीटर के बराबर होता है।

सूर्य के पश्चात जो तारा हमारे पास है, उसका नाम प्रौक्सिमा-सेंटौरी है। और यह तारा हमसे लगभग 4.3 प्रकाश-वर्ष दूर स्थित है। इसे हम इस तरह से भी कह सकते हैं कि प्रौक्सिमा-सेंटौरी से प्रकाश को पृथ्वी तक पहुँचने में 4.3 प्रकाश-वर्ष लगेंगे। आकाश का सर्वाधिक चमकीला तारा लुब्धक या व्याध के नाम से जाना जाता है। यह तारा हमसे तकरीबन 9 प्रकाश-वर्ष दूर है।

तारों की दूरियां मापने के लिये ‘पारसेक’ पैमाने का भी प्रयोग होता है। एक पारसेक 3.26 प्रकाश-वर्षों के बराबर होता है। सूर्य हमसे लगभग 8 मिनट और 18 प्रकाश सेकेंड दूर है। जैसाकि हम जानते हैं कि अन्य तारे हमसे काफी दूरी पर हैं, इसलिए वैज्ञानिकों ने सूर्य के सतही तापमान, उपलब्ध तत्वों, द्रव्यमान इत्यादि को आधार मानकर ही अन्य तारों से समन्धित प्रतिरूपों (मॉडल्स) को निर्मित किया है।
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सूर्य आखि‍र पृथ्वी से कितना बड़ा है?
इस सवाल का उत्तर जानने के लिए हमें सबसे पहले पृथ्वी के आकार-प्रकार को समझना होगा। हम जानते हैं कि हमारी पृथ्वी का व्यास लगभग 12,700 किलोमीटर है। अब यदि इस आकार से सूर्य की तुलना करें तो हम कह सकते हैं कि सूर्य हमारी पृथ्वी से लगभग 109 गुना बड़ा है। अर्थात सूर्य की त्रिज्या पृथ्वी की त्रिज्या से लगभग 109 गुनी अधिक है।

हम जानते हैं कि किसी भी पिंड की त्रिज्या से यह पता चलता है कि उस पिंड में उपस्थित द्रव्यमान कितना स्थान घेरेगा। चूँकि पृथ्वी का व्यास 12,700 किलोमीटर है; अत: इसकी त्रिज्या लगभग 6,350 किलोमीटर होगी। और चूंकि पृथ्वी की त्रिज्या से सूर्य की त्रिज्या लगभग 109 गुना अधिक है, इसलिए सूर्य की त्रिज्या लगभग 6,350x109 = 6,92,150 किलोमीटर होगी। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि सूर्य इतना बड़ा है कि उसमे पृथ्वी जैसे लगभग 13,00,000 खगोलीय पिंड आराम से समा सकते हैं।

किन्तु इसका मतलब यह कदापि नहीं है कि सूर्य, पृथ्वी से 13 लाख गुना भारी भी है। इसका कारण कि सूर्य गैसों का एक विशाल एवं प्रखर गोला है। जबकि पृथ्वी तथा अन्य ग्रह ठोस हैं। यही कारण है कि पृथ्वी की तुलना में सूर्य के द्रव्यमान का घनत्व काफी कम है। इसे समझने के लिए हम पानी का उदाहारण लेते हैं। यदि हम पानी के घनत्व को 1 मानकर सूर्य का घनत्व निकालें, तो हम कह सकते हैं कि सूर्य के द्रव्यमान का घनत्व लगभग 1.4 होगा। जबकि पृथ्वी के द्रव्यमान का घनत्व होगा लगभग 5.5

लेकिन चूँकि सूर्य के अंदर गुरुत्वाकर्षणीय दबाव बेहद अधि‍क है, इसलिए सूर्य के केंद्र में ताप, दाब और घनत्व में बहुत अधि‍क वृद्धि हो जाती है। यही कारण है कि सूर्य का द्रव्यमान लगभग 1.9891×10^30 किलोग्राम है, जो पृथ्वी के द्रव्यमान से लगभग 3,32,900 गुना ज्यादा है।

हो सकता है कि आपके दिमाग में यह सवाल आरहा होगा कि जब वैज्ञानिक सूर्य के सतह पर जा नहीं सकते, और वहाँ पर कोई रोबोट या अन्तरिक्षयान भी नहीं भेजा जा सकता, तो फिर सूर्य के द्रव्यमान का आकलन कैसे किया गया? तो इसका जवाब है कि सूर्य के द्रव्यमान का आकलन खगोलीय मापदंडों और प्रेक्षणों की सहायता से किया गया है, जोकि पूरी तरह से सही है।

हम यह बात जानते हैं कि हमारे सौरमंडल में कुल 8 ग्रह तथा 166 उपग्रह हैं। इसके अलावा हमारे सौरमंण्डल में कुछ बौने ग्रह, हजारों क्षुद्रग्रह तथा बहुत सारे धूमकेतु और ढ़ेर सारे उल्कापिंड मौजूद हैं। लेकिन इसके बावजूद अगर इन सबकी द्र्व्यराशि‍ को जोड़ दिया जाए, तो भी यह सूर्य की द्रव्यराशि‍ के सामने नगण्य ही रहेगी। क्योंकि सम्पूर्ण सौरमंडल की द्रव्यराशि‍ अकेले सूर्य के ही पास ही है। और यह ठहरती है औसतन 99.89 प्रतिशत।

हम यह भी जानते हैं कि सूर्य अपनी धुरी पर 25.6 दिनों में एक चक्कर पूरा करता हैं। चूंकि सूर्य गैसों का एक प्रखर गोला है, इसलिए इसके विभिन्न भाग अलग-अलग गति से घूमते हैं। यही कारण है कि इसके ध्रुवों पर इसके घुमने की रफ़्तार 33.5 दिनों की होती हैं। हालांकि, सूर्य की परिक्रमा के साथ-साथ पृथ्वी के सापेक्ष हमारी स्थिति भी बदलती रहती है, इसलिए सूर्य के अपनी भूमध्य-रेखा पर घूमने की रफ्तार लगभग 28 दिनों की होती है।

अगली कडी में पढिए- तारों के स्वरूप और सूर्य की हैसियत, सूर्य की आंतरिक संरचना, सूर्य की ज्वालाएं, सूर्य की तेजस्विता एवं सूर्य का जन्म और अंत।
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लेखक परिचय: श्री प्रदीप कुमार यूं तो अभी इंटरमीडिएट के विद्यार्थी हैं, किन्तु विज्ञान संचार को लेकर उनके भीतर अपार उत्साह है। आपकी ब्रह्मांड विज्ञान में गहरी रूचि है और भविष्य में विज्ञान की इसी शाखा में कार्य करना चाहते हैं। वे इस छोटी सी उम्र में 'वैज्ञानिक ब्रह्मांड' नामक ब्लॉग का भी संचालन कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त आप 'साइंस ब्लॉगर्स असोसिएशन' के भी सक्रिय सदस्य के रूप में जाने जाते हैं। आपसे निम्न ईमेल आईडी पर संपर्क किया जा सकता है:



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Scientific World: सूर्य की रहस्यमय दुनिया
सूर्य की रहस्यमय दुनिया
सूर्य की रहस्यमय दुनिया पर केंद्रित एक शोधपरक आलेख।
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