जैविक खादः मृदा एवं पर्यावरण संरक्षण हेतु समय की आवश्यकता

SHARE:

Importance of Biofertilizer in Agriculture in Hindi

जैविक खादें रासायनिक खादों की तुलना में लागत की दृष्टि से बेहतर होती हैं। इनकी उत्पादन लागत भी कम होती है। जैविक खादें नाइट्रोजन यौगिकीकरण, फॉस्फोरस घुलनशीलता, और कार्बनिक पदार्थों के विघटन जैसी प्राकृतिक प्रक्रियाओं द्वारा मृदा में पोषक तत्वों को बढ़ाती हैं।
जैविक खाद
मृदा एवं पर्यावरण संरक्षण हेतु समय की आवश्यकता

-डॉ0 अरविन्द सिंह

जैविक खाद क्या है?
जैविक खाद वे सूक्ष्म जीव (microorganism) हैं जो मृदा में पोषक तत्वों को बढ़ा कर उसे उर्वर बनाते हैं। प्रकृति में अनेक जीवाणु और नील हरित शैवाल (blue green algae) पाए जाते हैं जो या तो स्वयं या कुछ अन्य जीवों के साथ मिलकर वायुमण्डलीय नाइट्रोजन का यौगिकीकरण (nitrogen fixation) करते हैं (वातावरण में मौजूद गैसीय नाइट्रोजन को अमोनिया में परिवर्तित करते हैं)। इसी प्रकार, प्रकृति में अनेक कवक (fungi) और जीवाणु (bacteria) पाए जाते हैं जिनमें मृदा में बद्ध फॉस्फेट को मुक्त करने की क्षमता होती है। कुछ ऐसे कवक भी होते हैं जो कार्बनिक पदार्थों को तेजी से विघटित करते हैं जिसके फलस्वरूप मृदा को पोषक तत्व प्राप्त होते हैं। अतः जैविक खादें नाइट्रोजन के यौगिकीकरण, फॉस्फेट की घुलनशीलता और शीघ्र पोषक तत्व मुक्त करके मृदा को उपजाऊ बनाती हैं।

जैविक खादों का उपयोग आज समय की आवश्यकता क्यों है?
biofertilizer
मृदा की उर्वरा शक्ति को बढ़ाने वाले रासायनिक उर्वरक काफी महंगे होते हैं और इनका उत्पादन अनवीकरणीय पेट्रोलियम फीडस्टॉक से किया जाता है जो धीरे-धीरे कम हो रहा है। रासायनिक खादों का निरंतर उपयोग मृदा के लिए हानिकारक होता है। उदाहरण के लिए, नाइट्रोजनी खाद यूरिया का अत्यधिक उपयोग मृदा की संरचना को नष्ट कर देता है। इस प्रकार मृदा, वायु और जल जैसे अपरदनकारी कारकों से क्षरण के प्रति संवेदनशील हो जाती है। रासायनिक खादें सतह और भूमिगत जल प्रदूषण के लिए भी उत्तरदायी होती हैं। 

इसके अतिरिक्त, नाइट्रोजनी खादों के प्रयोग से फसलों पर रोग और नाशिजीवों के प्रकोप की भी संभावना रहती है। रासायनिक खादों के निरंतर प्रयोग से मृदा में ह्यूमस और पोषक तत्वों की कमी हो जाती हैं जिसके परिणामस्वरूप उसमें सूक्ष्म जीव कम पनपते हैं। रासायनिक खादों के अत्यधिक उपयोग के कारण भारतीय मृदाओं में कार्बनिक पदार्थों और नाइट्रोजन की आमतौर पर कमी पाई जाती है। सुपरफॉस्फेट के अत्यधिक उपयोग से पौधों में तांबे (copper) और जस्ते (zinc) की कमी हो जाती है।

उक्त के अतिरिक्त, रासायनिक खादें खाद्य फसलों के पोषक तत्वों की मात्रा को भी बदल देती हैं। नाइट्रोजनी खाद यूरिया के अत्यधिक प्रयोग से खाद्यान्नों में पोटैशियम तत्व की कमी हो जाती है। इसी प्रकार, पोटाश का अत्यधिक प्रयोग करने से पौधों में विटामिन सी और कैरोटीन (carotene) अंश की कमी हो जाती है। नाइट्रेट खाद फसल की पैदावार को तो बढ़ाती है लेकिन ऐसा प्रोटीन की कीमत पर होता है। इसके अतिरिक्त, इससे प्रोटीन के अणुओं में एमिनों अम्लों (amino acids) का संतुलन बिगड़ जाता है जिसके कारण प्रोटीन की गुणवत्ता कम हो जाती है। रासायनिक खादों के उपयोग से बड़े आकार के फल और सब्जियां उत्पन्न होती हैं जिन पर कीटों और अन्य नाशिजीवों का प्रकोप अधिक होता है।

जैविक खादों के क्या लाभ हैं?
जैविक खादें रासायनिक खादों की तुलना में लागत की दृष्टि से बेहतर होती हैं। इनकी उत्पादन लागत भी कम होती है। जैविक खादें नाइट्रोजन यौगिकीकरण, फॉस्फोरस घुलनशीलता, और कार्बनिक पदार्थों के विघटन जैसी प्राकृतिक प्रक्रियाओं द्वारा मृदा में पोषक तत्वों को बढ़ाती हैं।

जैविक खादें जड़ों पर आक्रमण करने वाले रोगाणुओं से पौधों को संरक्षण प्रदान करती हैं।
जैविक खादें मृदा के पोषक चक्र को पुनः स्थापित करती हैं और जैव पदार्थों का निर्माण करती हैं।
जैविक खादें विकास को बढ़ावा देने वाले पदार्थों का संश्लेषण करके पौधों के विकास में योगदान देते हैं।

जैविक खादें कितने प्रकार की होती हैं?
जैविक खादों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है: नाइट्रोजनी जैविक खाद, फॉस्फेटी जैविक खाद एवं सेल्यूलोलिटिक जैविक खाद।

1. नाइट्रोजनी जैविक खाद: नाइट्रोजनी जैविक खाद वे जैविक खाद होती है जो मृदा में नाइट्रोजन की मात्रा को बढ़ाती है। प्रकृति में कई ऐसे जीवाणु और नील हरित शैवाल हैं जो वायुमण्डलीय नाइट्रोजन का यौगिकीकरण करते हैं। राइजोबियम (Rhizobium), एज़ोटोबैक्टर (Azotobacter), बेजरिंकिया (Beijrinkia), क्लॉस्ट्रिडियम (Clostridium), रोडोस्पाइरिलम (Rhodospirillum), हर्बास्पाइरिलम (Herbaspirillum) और एज़ोस्पाइरिलम (Azospirillum) नाइट्रोजन यौगिकीकरण करने वाले कुछ महत्वपूर्ण जीवाणु हैं। राइज़ोबियम जीवाणु दलहनी वनस्पतियों की जड़ों में सहजीवी रूप में रहकर वायुमण्डलीय नाइट्रोजन का यौगिकीकरण करते हैं।

एज़ोटोबैक्टर, बेजरिंकिया, क्लॉस्ट्रिडियम तथा रोडोस्पाइरिलम गैर सहजीवी नाइट्रोजन यौगिकीकरण जीवाणु हैं क्योंकि वे वायुमण्डलीय नाइट्रोजन को मृदा में मुक्त अवस्था में यौगिकीकरण करते हैं। हर्बोस्पाइरिलम तथा एज़ोस्पाइरिलम सहजीवी नाइट्रोजन यौगिकीकरण जीवाणु हैं क्योंकि वे पौधों की जड़ों में रहते हैं और वायुमण्डलीय नाइट्रोजन का यौगिकीकरण करते हैं। ये दोनों जीवाणु उष्ण्णकटिबंधीय घासों और फसलों, जैसे मक्का और ज्वार के जड़ क्षेत्र (rhizosphere) में निवास करते हैं।

Azolla pinnata
नास्टॉक (Nostoc), ऐनाबीना (Anabaena), ऑलोसाइरा (Aulosira), सिलेंड्रोस्परमम (Cylinderospermum), ग्लिोइयोट्रिकिया (Gloeotrichia), ग्लयोकेप्सा (Gloeocapsa), कैलोथ्रिक्स (Calothrix), टालिपोथ्रिक्स (Tolypothrix) और साइटोनीमा (Scytonema) वे प्रमुख नील हरित शैवाल हैं जो वायुमण्डलीय नाइट्रोजन का यौगिकीकरण करते हैं। नील हरित शैवालों द्वारा यौगिकीकृत नाइट्रोजन की मात्रा 15 से 45 किलोग्राम नाइट्रोजन प्रति हैक्टेयर होती है। नील हरित शैवाल के विकास हेतु जमीन में मौजूद 2 से 10 से0मी0 जल की आवश्यकता होती है तथा वे 7 से 8 के पीएच रेंज में अच्छी तरह से पनपते हैं।

नील हरित शैवाल ऐनाबीना भी एक जलीय फर्न एज़ोला (Azolla pinnata) के साथ सहजीवी रूप में रहता हैं और नाइट्रोजन का यौगिकीकरण करता है। इसलिए एज़ोला पिन्नेटा का उपयोग जैविक खाद के रूप में धान के फसल में किया जाता है। एज़ोला पिन्नेटा की एक मोटी परत 30 से 40 किलोग्राम नाइट्रोजन की आपूर्ति प्रति हैक्टेयर की दर से करती है। एज़ोला पिन्नेटा की सामान्य वृद्धि 20 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान के बीच सामान्य वृद्धि होती है। वर्षा ऋतु में इसका बेहतर विकास होता है।

2. फॉस्फेटी जैविक खाद: ये वो जैविक खाद है जो मृदा में बद्ध फॉस्फेट को घुलनशील बना कर पौधों को उपलब्ध कराती है। फॉस्फेट को घुलनशील बनाने वाले कई कवक, जैसे ऐकॉलोस्पोरा (Acaulospora), जाइगास्पोरा (Gigaspora), एंडोगोन (Endogone, ग्लोमस (Glomus), स्केरोसिस्टिस (Sclerocystis), ऐमेनिटा (Amanita), बोलिटस (Boletus) आदि पौधों की जड़ों के साथ सहजीवन बिताते हैं तथा पौधों के लिए फॉस्फेट की आपूर्ति करते हैं। पौधों की जड़ों के साथ कवक के इस सहजीवन को कवक मूल संबंध (mycorrhizal association) कहा जाता है। आंतरिक कवकमूल (endomycorrhiza) और बाह्य कवकमूल (ectomycorrhiza) कवकमूल के दो अलग-अलग प्रकार हैं।

आंतरिक कवकमूल संबंध में कवक साथी पौधों की जड़ों में गहराई तक प्रवेश कर लेता है। इस प्रकार का कवकमूल संबंध आमतौर से फसलों के पौधों में पाया जाता है। आंतरिक कवकमूल दलहनी फसलों में गांठों की संख्या को बढ़ाता है जिससे पैदावार में वृद्धि होती है। ऐकॉलोस्पोरा (Acaulospora), एंडोगोन (Endogone), ग्लोमस (Glomus), जाइगास्पोरा (Gigaspora), स्केरोसिस्टिस (Sclerocystis) आदि वे कवक हैं जो आंतरिक कवकमूल संबंध बनाते हैं।

बाह्य कवकमूल संबंध में कवक साथी पौधों की जड़ों की सतह तक ही सीमित रहते हैं। ये आमतौर पर चीड़ एवं देवदार जैसी वन वृक्षों की प्रजातियों में पाए जाते हैं। ऐमेनिटा तथा बोलिटस वाह्य कवकमूल कवकों के उदाहरण हैं।

कवकों के अतिरिक्त स्वतन्त्र रूप से रहने वाले कुछ जीवाणु जैसे बैसिलस सब्टिलिस (Bacillus subtilis), स्यूडोमोनास फ्लोरोसेंस (Pseudomonas fluorescens) , एवं स्यूडोमोनास प्यूटिडा (Pseudomonas putida) भी हैं जो फॉस्फेट को घुलनशील बनाकर उसे पौधों को उपलब्ध कराते हैं।

3. सेल्यूलोलिटिक जैविक खाद: सेल्यूलोलिटिक जैविक खाद वह जैविक खाद है जो जैविक पदार्थों का तेजी से विघटन करके मृदा में पोषक तत्वों को मुक्त करती है। एस्पर्जिलस (Aspergillus), ट्राइकोडर्मा (Trichoderma), पेनिसिलियम (Penicillium) आदि कवक इस प्रकार के जैविक खाद के उदाहरण हैं।

निष्कर्ष:
रासायनिक खादों का प्रयोग पर्यावरण की गुणवत्ता और मृदा की उर्वरा शक्ति को कम करता है। इसके अतिरिक्त, रासायनिक खादें खाद्यान्नों की पोषणीय गुणवत्ता को भी कम कर देती हैं अतः मृदा की उर्वरता, पर्यावरण की गुणवत्ता और पोषकों से भरपूर खाद्यान्नों के उत्पादन के लिए जैविक खादों का उपयोग आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
-X-X-X-X-X-
-X-X-X-X-X-
डॉ. अरविंद सिंह वनस्पति विज्ञान विषय से एम.एस-सी. और पी-एच.डी. हैं। इनकी विशेषज्ञता का क्षेत्र पारिस्थितिक विज्ञान है। यह एक समर्पित शोधकर्ता हैं और राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर की शोध पत्रिकाओं में अब तक इनके चार दर्जन से अधिक शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं। खनन गतिविधियों से अव्यवस्थित भूमि का पुनरूत्थान इनके शोध का प्रमुख विषय है। इन्होंने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय मुख्य परिसर, वाराणसी की संवहनीय वनस्पतियों पर भी अनुसंधान किया है। इनके अतिरिक्त यह एक सक्रिय विज्ञान लेखक भी हैं और अब तक इनके 10 दर्जन से अधिक विज्ञान सम्बन्धी लेख राष्ट्रीय स्तर की विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। आपके अंग्रेज़ी में लिखे विज्ञान विषयक आलेख 'Science Log' पर पढ़े जा सकते हैं। आपसे निम्न ईमेल आईडी पर संपर्क किया जा सकता है-

keywords: liquid bio fertilizer in hindi, bio fertilizer types in hindi, how to make bio fertilizer in hindi, bio fertilizer manufacturing process in hindi, biofertilizer project in hindi, bio fertilizer manufacturers in hindi, bio fertilizer examples in hindi, bio fertilizer companies in hindi, bio fertilizer benefits in hindi, best bio fertilizer in hindi, biofertilizer technology in hindi, biofertilizer definition in hindi, bio fertilizer types in hindi, importance of biofertilizer in hindi, importance of biofertilizer in agriculture in hindi

COMMENTS

BLOGGER: 3
Loading...
नाम

अंतरिक्ष युद्ध,1,अंतर्राष्‍ट्रीय ब्‍लॉगर सम्‍मेलन,1,अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी ब्लॉगर सम्मेलन-2012,1,अतिथि लेखक,2,अन्‍तर्राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन,1,आजीवन सदस्यता विजेता,1,आटिज्‍म,1,आदिम जनजाति,1,इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी,1,इग्‍नू,1,इच्छा मृत्यु,1,इलेक्ट्रानिकी आपके लिए,1,इलैक्ट्रिक करेंट,1,ईको फ्रैंडली पटाखे,1,एंटी वेनम,2,एक्सोलोटल लार्वा,1,एड्स अनुदान,1,एड्स का खेल,1,एन सी एस टी सी,1,कवक,1,किंग जार्ज मेडिकल कॉलेज,1,कृत्रिम मांस,1,कृत्रिम वर्षा,1,कैलाश वाजपेयी,1,कोबरा,1,कौमार्य की चाहत,1,क्‍लाउड सीडिंग,1,क्षेत्रीय भाषाओं में विज्ञान कथा लेखन,9,खगोल विज्ञान,2,खाद्य पदार्थों की तासीर,1,खाप पंचायत,1,गुफा मानव,1,ग्रीन हाउस गैस,1,चित्र पहेली,201,चीतल,1,चोलानाईकल,1,जन भागीदारी,4,जनसंख्‍या और खाद्यान्‍न समस्‍या,1,जहाँ डॉक्टर न हो,1,जादुई गणित,1,जितेन्‍द्र चौधरी जीतू,1,जी0 एम0 फ़सलें,1,जीवन की खोज,1,जेनेटिक फसलों के दुष्‍प्रभाव,1,जॉय एडम्सन,1,ज्योतिर्विज्ञान,1,ज्योतिष,1,ज्योतिष और विज्ञान,1,ठण्‍ड का आनंद,1,डॉ0 मनोज पटैरिया,1,तस्‍लीम विज्ञान गौरव सम्‍मान,1,द लिविंग फ्लेम,1,दकियानूसी सोच,1,दि इंटरप्रिटेशन ऑफ ड्रीम्स,1,दिल और दिमाग,1,दिव्य शक्ति,1,दुआ-तावीज,2,दैनिक जागरण,1,धुम्रपान निषेध,1,नई पहल,1,नारायण बारेठ,1,नारीवाद,3,निस्‍केयर,1,पटाखों से जलने पर क्‍या करें,1,पर्यावरण और हम,9,पीपुल्‍स समाचार,1,पुनर्जन्म,1,पृथ्‍वी दिवस,1,प्‍यार और मस्तिष्‍क,1,प्रकृति और हम,12,प्रदूषण,1,प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड,1,प्‍लांट हेल्‍थ क्‍लीनिक,1,प्लाज्मा,1,प्लेटलेटस,1,बचपन,1,बलात्‍कार और समाज,1,बाल साहित्‍य में नवलेखन,2,बाल सुरक्षा,1,बी0 प्रेमानन्‍द,5,बीबीसी,1,बैक्‍टीरिया,1,बॉडी स्कैनर,1,ब्रह्माण्‍ड में जीवन,1,ब्लॉग चर्चा,4,ब्‍लॉग्‍स इन मीडिया,1,भंते बुद्ध प्रकाश,1,भारत के महान वैज्ञानिक हरगोविंद खुराना,1,भारत डोगरा,1,भारत सरकार छात्रवृत्ति योजना,1,मंत्रों की अलौकिक शक्ति,1,मनु स्मृति,1,मनोज कुमार पाण्‍डेय,1,मलेरिया की औषधि,1,महाभारत,1,महामहिम राज्‍यपाल जी श्री राम नरेश यादव,1,महाविस्फोट,1,मानवजनित प्रदूषण,1,मिलावटी खून,1,मेरा पन्‍ना,1,युग दधीचि,1,यौन उत्पीड़न,1,यौन रोग,1,यौन शिक्षा,2,यौन शोषण,1,रंगों की फुहार,1,रक्त,1,राष्ट्रीय पक्षी मोर,1,रूहानी ताकत,1,रेड-व्हाइट ब्लड सेल्स,1,लाइट हाउस,1,लोकार्पण समारोह,1,विज्ञान कथा,1,विज्ञान दिवस,2,विज्ञान संचार,1,विश्व एड्स दिवस,1,विषाणु,1,वैज्ञानिक मनोवृत्ति,1,शाकाहार/मांसाहार,1,शिवम मिश्र,1,संदीप,1,सगोत्र विवाह के फायदे,1,सत्य साईं बाबा,1,समगोत्री विवाह,1,समाचार पत्रों में ब्‍लॉगर सम्‍मेलन,1,समाज और हम,14,समुद्र मंथन,1,सर्प दंश,2,सर्प संसार,1,सर्वबाधा निवारण यंत्र,1,सर्वाधिक प्रदूशित शहर,1,सल्फाइड,1,सांप,1,सांप झाड़ने का मंत्र,1,साइंस ब्‍लॉगिंग कार्यशाला,10,साइक्लिंग का महत्‍व,1,सामाजिक चेतना,1,सुपर ह्यूमन,1,सुरक्षित दीपावली,1,सूत्रकृमि,1,सूर्य ग्रहण,1,स्‍कूल,1,स्टार वार,1,स्टीरॉयड,1,स्‍वाइन फ्लू,2,स्वास्थ्य चेतना,15,हठयोग,1,होलिका दहन,1,‍होली की मस्‍ती,1,Abhishap,4,abraham t kovoor,7,Agriculture,7,AISECT,11,Ank Vidhya,1,antibiotics,1,antivenom,3,apj,5,arshia science fiction,1,AS,26,B. Premanand,6,Bal Kahani Lekhan Karyashala,1,Balsahitya men Navlekhan,2,Bhante Budhh Prakash,1,Bharat Dogra,1,Bhoot Pret,7,Blogging,1,Bobs Award 2013,2,Books,55,Born Free,1,Bushra Alvera,1,Butterfly Fish,1,Chaetodon Auriga,1,Challenges,9,Chamatkar,1,Child Crisis,4,Children Science Fiction,1,current,1,D S Research Centre,1,DDM,4,dinesh-mishra,2,Discount Coupon,1,DM,4,Dr. Prashant Arya,1,dream analysis,1,Duwa taveez,1,Duwa-taveez,1,Earth,41,Earth Day,1,eco friendly crackers,1,Education,3,Electric Curent,1,electricfish,1,Elsa,1,English Article,1,Environment,29,Featured,5,flehmen response,1,Gansh Utsav,1,Government Scholarships,1,Great Indian Scientist Hargobind Khorana,1,Green House effect,1,Guest Article,6,Hast Rekha,1,Hathyog,1,Health,60,Health and Food,2,Health and Medicine,1,Healthy Foods,2,Hindi Vibhag,1,human,1,Human behavior,4,humancurrent,1,IBC,5,Indira Gandhi Rajbhasha Puraskar,1,International Bloggers Conference,5,Invention,8,Irfan Hyuman,1,jacobson organ,1,Jadu Tona,3,Joy Adamson,1,julian assange,1,jyotirvigyan,1,Jyotish,11,Kaal Sarp Dosha Mantra,1,Kaal Sarp Yog Remady,1,Kranti Trivedi Smrati Diwas,1,lady wonder horse,1,Lal Kitab,1,Legends,13,life,2,Love at first site,1,Lucknow University,1,Magic Tricks in Hindi,8,magic-tricks,9,malaria mosquito,1,malaria prevention,1,man and electric,1,Manjit Singh Boparai,1,mansik bhram,1,media coverage,1,Meditation,1,Mental disease,1,MK,3,MMG,3,MS,2,mystery,1,Myth and Science,1,Nai Pahel,8,National Book Trust,3,Natural therapy,1,NCSTC,2,New Technology,3,NKG,30,Nobel Prize,5,Nuclear Energy,1,Nuclear Reactor,1,OPK,2,Opportunity,7,Otizm,1,paradise fish,1,personality development,4,PK,11,Plant health clinic,1,Power of Tantra-mantra,1,psychology of domestic violence,1,Punarjanm,1,Putra Prapti Mantra,1,Rajiv Gandhi Rashtriya Gyan Vigyan Puraskar,1,Report,9,Researches,2,SBWG,3,SBWR,5,SBWS,3,science blogging workshop,22,Science Blogs,1,Science communication,6,Science Communication Through Blog Writing,7,Science Fiction,7,Science Fiction Articles,6,Science Fiction Books,5,Science Fiction Conference,8,Science Fiction Writing in Regional Languages,11,Science Times News and Views,2,science-books,1,science-puzzle,44,Scientific Awareness,4,Scientist,30,SD,4,secret of happiness,1,secret of success,1,secrets of octopus paul,1,Sex Diseases,1,Sexpower,1,sexual harassment,1,shirish-khare,4,SKS,11,Social Challenge,1,Solar Eclipse,1,Steroid,1,Succesfull Treatment of Cancer,1,superpowers,1,Superstitions,48,Tantra-mantra,20,Tarak Bharti Prakashan,1,The interpretation of dreams,2,Tona Totka,3,travel,1,tsaliim,9,Universe,20,Vigyan Prasar,30,Vishnu Prashad Chaturvedi,1,VPC,4,Washikaran Mantra,1,Where There is No Doctor,1,wikileaks,1,wildlife,11,zakir science fiction,1,
ltr
item
Scientific World: जैविक खादः मृदा एवं पर्यावरण संरक्षण हेतु समय की आवश्यकता
जैविक खादः मृदा एवं पर्यावरण संरक्षण हेतु समय की आवश्यकता
Importance of Biofertilizer in Agriculture in Hindi
http://1.bp.blogspot.com/-2C3UaBErDR8/VNRqNz_oXFI/AAAAAAAAFUY/-soLEOWxhXs/s1600/biofertilizers%2Bin%2Bagriculture.jpg
http://1.bp.blogspot.com/-2C3UaBErDR8/VNRqNz_oXFI/AAAAAAAAFUY/-soLEOWxhXs/s72-c/biofertilizers%2Bin%2Bagriculture.jpg
Scientific World
http://www.scientificworld.in/2015/05/biofertilizer-hindi.html
http://www.scientificworld.in/
http://www.scientificworld.in/
http://www.scientificworld.in/2015/05/biofertilizer-hindi.html
true
3850451451784414859
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS CONTENT IS PREMIUM Please share to unlock Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy